2015 में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने उत्तराखंड की 500 वर्ग मी से बड़ी 1266 ग्लेशियर झीलों की सूचि जारी की थी तो हड़कंप मच गया था. 2013 की आपदा के बाद ये सूचि जारी की गई थी. दिसंबर 2018 में एक नई रिपोर्ट आई है जिसमें दावा किया गया है उत्तराखंड समेत नेपाल में 1466 ऐसी झीले हैं जो कभी भी तबाही मचा सकती हैं . इनके बढ़ने से लैंडस्लाइड के साथ साथ पहाड़ों में बने डैम भी टूट सकते हैं.

2015 में वाडिया हिमालय भू विज्ञान संस्थान ने उत्तराखंड की 500 वर्ग मी से बड़ी ग्लेशियर झीलों की एक सूची जारी की थी। इस सूची के मुताबिक अकेले उत्तराखंड में ग्लेशियरों के ऊपर बनी हुईं या उनसे सटी हुई क़रीब 1266 झीलें हैं । इनमें से 635 झीलें अकेले अलकनंदा घाटी में हैं जबकि 306 भागीरथी की घाटी में। ये सूची रिमोट सेंसिंग के जरिये सेटेलाइट डेटा के इस्तेमाल से बनाई गई है. सूची के मुताबिक ऐसी 92 झीलें गौरी गंगा घाटी, 75 धौली गंगा घाटी, 52 झीलें टौंस घाटी, 45 कुटियांग्टी घाटी, 22 भिलंगना घाटी, 9 मंदाकिनी घाटी, 13 यमुना घाटी और सात पिंडर घाटी में पायी गईं । नई रिपोर्ट में नेपाल समेत उत्तराखंड में 1466 झीलें देवभूमि के सिर पर खतरा बनकर नाच रही हैं । इसलिए सरकार को 2013 की आपदा से सबक लेनी चाहिए ।