क्यों कर रही हो इतना चीं-चीं ?

क्यों कर रही हो इतना चीं-चीं ?

नीलू अखिलेश कुमार

क्यों कर रही हो इतना चीं-चीं
कि
मेरे सारे काम रुक गए हैं ।
देखो
शाम ढली।

तुम्हारे जैसे
कितने ही पक्षी
लौट रहे हैं
अपने घोंसले को
निकल गए हैं
कितनी दूर….

और तुम
अब तक यहीं बैठी
चीं- चीं कर रही हो?
चुप हो जाओ
वरना
मुझे अपनी बोली सिखाओ

ताकि
मैं भी बुला सकूं
तुम्हारे साथी को
जो शायद कहीं
छूट गया है।

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 नीलू ने हिंदी साहित्य से एमए और एमफिल की पढ़ाई की है। वो पटना यूनिवर्सिटी से ‘हिंदी के स्वातंत्र्योत्तर महिला उपन्यासकारों में मैत्रेयी पुष्पा का योगदान’ विषय पर शोध कर रही हैं।


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