टीम बदलाव

मंगलवार का दिन समाजवादी परिवार में दंगल में मंगल लेकर आया क्योंकि कई दिन बात मुलायम और अखिलेश के बीच मुलाकात हुई । मुलायम सिंह से उनके घर बंद कमरे में हुई अखलेश की मुलाकात बहुत खास रही । सूत्रों के मुताबिक करीब तीन घंटे तक चली इस मुलाकात में शुरुआती दो घंटे पिता-पुत्र के बीच समाजवादी पार्टी के घोषणा पत्र को लेकर चर्चा चली । दोनों नेताओं ने आगामी चुनावी घोषणा पत्र पर काफी गंभीरता से चर्चा की । सूत्रों की मानें तो इस दौरान उस कमरे में मुलायम सिंह यादव और अखिलेश के अलावा कोई तीसरा नहीं रहा । हालांकि दोपहर करीब तीन बजे शिवपाल यादव जब शिवपाल यादव दिल्ली से लौटे तो उनको भी मुलायम और अखिलेश की मुलाकात के बारे में कोई खबर नहीं थी ये अलग बात है कि उन्होंने दिल्ली से लखनऊ की उड़ान भी तब भरी जब मीडिया में खबर चली कि मुलायम सिंह ने अखिलेश से फोन पर बात की । लिहाजा वो अगली फ्लाइट से ही लखनऊ लैंड कर गए । इस बीच करीब दो घंटे तक अखिलेश और मुलायम की मुलाकात हो चुकी थी ।

हालांकि शिवपाल के करीबी गायत्री प्रजापति और मुलायम के करीबी बलराम यादव इस बैठकके दौरान मुलायम सिंह के आवास पर ही रहे लेकिन बंद कमरे में हुई इस मुलाकात से दूर रहे । करीब तीन बजे जब शिवपाल यादव मुलायम सिंह के घर पहुंचे तो मुलायम सिंह ने शिवपाल और बाकी दूसरे नेताओं को मीटिंग रूम में बुलाया और फिर शुरू हुई पार्टी में सुलह के फार्मूले पर चर्चा । अखिलेश  का काम करीब-करीब पूरा हो चुका था लिहाजा उन्होंने मुलायम सिंह यादव के सामने सुलह के लिए कुछ शर्तें रखीं। सूत्रों के मुताबिक शर्त के मुताबिक मुलायम सिंह यादव को अध्यक्ष और खुद अखिलेश कार्यकारी अध्यक्ष होंगे, शिवपाल सिंह यादव को यूपी की सियासत से दूर दिल्ली की राजनीति में भेजना शामिल रहा । हालांकि अमर सिंह को लेकर अखिलेश और शिवपाल अड़े रहे और बातचीत जहां से चली थी वहीं रह गई । लेकिन अखिलेश यादव का काम (यानी चुनावी घोषणा पत्र पर नेताजी की सहमति ) पूरा हो चुका था और वो वहां से सीधे अपने आवास गए और फिर समर्थक नेताओं के साथ चुनावी घोषणा पत्र पर चर्चा की ।

ख़बर है कि मुलायम सिंह का चुनाव आयोग के सामने रामगोपाल और अधिवेशन से जुड़े पूरे दस्तावेज पेश न करना भी उनकी रणनीति का ही हिस्सा है । जबकि रामगोपाल यादव ने सभी दस्तावेज चुनाव आयोग के सामने रखे हैं । समाजवादी पार्टी के चाणक्य कहे जाने वाले रामगोपाल जिस दावे के साथ साइकिल संबल को लेकर आश्वस्त है वो भी इस बात की ओर  इशारा करता है कि कहीं ना कहीं अखिलेश गुुट को मुलायम की रजामंदी है । अखिलेश गुट के सूत्रों के मुताबिक मुलायम सिंह ने पार्टी के सिंबल से लेकर अधिवेशन बुलाने तक के तमाम अधिकार पहले से ही लिखित रुप में प्रोफेसर रामगोपाल यादव को दिये हुए थे जिसे रामगोपाल यादव ने चुनाव आयोग के सामने रखे हैं । इसलिए अखिलेश गुट को पूरा भरोसा है कि अगर मुलायम सिंह नहीं मानें तो भी साइकिल निशान उन्हीं को मिलेगा । खैर गेंद फिलहाल चुनाव आयोग के पाले में है लेकिन ये तो तय है कि यूपी में चुनाव की तारीखों के साथ ही अखिलेश यादव का चुनावी घोषणा पत्र भी जारी हो सकता है । मतलब साफ है कि अखिलेश के हर काम में मुलायम सिंह की मौन सहमति है, फिर भी कुछ ना कुछ जरूर है जो उन्हें खुलेआम अखिलेश के साथ खड़े होने से रोक रही है । मुलायम सिंह यादव अखाड़े के माहिर खिलाड़ी है इसलिए इंतजार कीजिए दंगल का क्लाइमेक्स का ।