अरुण प्रकाश

मोदी सरकार ने खजाना खोल दिया है । दावा है कि जो विकास दौड़ रहा था अब वो हवा में उड़ने लगेगा । इसके लिए सरकार ने तमाम उपाय किए हैं । उसी में एक है बैंकों को 2 लाख करोड़ से ज्यादा का पैकेज । हालांकि ये पैकेज सीधे तौर पर माल्या जैसे तमाम धनकुबेरों की डूब चुकी कंपनियों को उबारने के लिए तो नहीं दिया गया है । ये अलग बात है कि किंगफिशर समेत तमाम कंपनियों को कर्ज देकर आर्थिक तंगी का रोना रोने वाले बैंकों के लिए जरूर थोड़ी राहत का काम करेगा। ऐसे में सरकार का ये पैकेज विकास की आड़ में कई सवाल भी लेकर आया है जो हम जैसे अर्थशास्त का ककहरा भी नहीं समझने वाले अज्ञानियों के जेहन में उमड़-घुमड़ रहा है ।

पहला सवाल ये है कि क्या सरकार बैंकों के जरिए जिन बेरोजगारों युवाओं को मुद्रा लोन समेत तमाम सरकारी योजनाओं के तहत लोन देने का दम भर रही है वो क्या वाकयी में उनको मिल पायेगा या फिर कहीं बैंक इन पैसों का इस्तेमाल गुप्त दरवाजे से अपना एनपीएम की खाई पाटने के लिए लिए ना हजम कर जाए, क्योंकि सरकार ये बात अच्छी तरह जानती है कि अगर माल्या जैसी तमाम कंपनियों को बेलआउट पैकेज दिया जाएगा तो बवाल मचना लाजमी है ।

फ़ाइल फोटो

दूसरा सवाल ये है कि मोदी सरकार नोटबंदी के एक साल पूरे होने पर जश्न मनाने जा रही है । दावा है कि नोटबंदी सफल रही, बैंकों में खूब ढेर सारा कालाधन आकर सफेद हो गया और बैंकों में पैसे कि किल्लत दूर हो गई । बैंक मालामाल हो गए । ऐसे में जब बैंकों के पास पहले से ही पैसा आ गया था तो फिर अलग से पैकेज देने की जरूरत क्यों पड़ी । कालाधन, आतंकवाद, नक्सलवाद के खात्मे की मंशा से जो नोटबंदी की गई थी वो अपने मकसद में कितनी कामयाब हुई वो किसी से छिपा नहीं है । लोग ये सोचकर संतोष कर रहे थे कि चलो बैंकों के पास पैसा तो आ गया, फिर भी बैंकों को पैकेज देने की जरूरत पड़ रही है तो नोटबंदी पर तो सवार जरूर उठेगा ।

तीसरा सवाल- 2014 में मोदी सरकार बनने के कुछ महीने के भीतर ही मुद्रा योजना लॉन्च की गई । दावा किया गया कि अब अपना रोजगार शुरू करने वाले युवाओं के सामने पैसे की किल्लत नहीं आएगी । 50 हजार से लेकर 10 लाख तक आसानी से लोन मिल जाएगा और वो भी बिना किसी झंझट के, लेकिन मोदी के हाथो चेक पाने के अलावा शायद ही कुछ खुशकिस्तम युवा होंगे जिन्हें बैंकवालों ने मुद्दा योजना के तहत आसानी से लोन दिया हो, ये बात हम इसलिए कह रहे हैं कि पिछले दिन जब badalav.com पर मुद्रा बैंक से जुड़ी रिपोर्ट प्रकाशित की गई तो यकीन मानिये तमाम बेरोजगार युवाओं का मैसेज आना शुरू हो गया । तमाम युवा ऐसे थे जिन्हें मुद्रा योजना की जानकारी नहीं, लेकिन जिन्हें जानकारी थी उन्हें भी बैंक लोन नहीं दे रहे थे। ऐसे ही कुछ लोगों के मैसेज नीचे दिए हैं- नमस्कार, मैं अपना डी जे साउन्ड का काम शुरु करना चाहता हूँ । इसमें कुल खर्च लगभग 5 लाख रुपये है । इसके लिये मुझे लोन की आवश्यकता है । कृपया लोन पास कराने ब्याज दर, अदायगी सम्बन्धित जानकारी दें- अमित कुमार पटेल

सर मुझे लोन चाहिए, कपड़े जूतों की दुकान खोलना है, मैं गांव में रहता हूं वहीं दुकान खोलना चाहता हूं- शिवराज

http://badalav.com/mudra-bank-ki-hakikat/

ऐसे में अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं कि सरकार जो भी योजनाएं आम जनता के लिए बनाती है उसका लाभ शायद ही उन लोगों तक पहुंच पाता है, फिर भी सरकार या फिर हमारा प्रशासन उस ओर तकिन भी ध्यान नहीं देता है ।

ये सवाल इसलिए भी जरूरी है क्योंकि सरकार ने बैंको के लिए अगले दो साल में 2 लाख करोड़ रुपये का पैकेज देने की बात कही है जबकि बैंकों पर इस साल तक NPA  7.33 लाख करोड़ पहुंच चुका है । यानी पिछले दो साल में ही एनपीए में 4 लाख करोड़ का इजाफा हुआ है, क्योंकि साल 2015 में बैंकों का कुल एनपीए महज 2.75 लाख करोड़ था । यानी अकेल मोदी सरकार के शासन काल में ही बैंकों का एनपीए 4 लाख करोड़ से ज्यादा हो गया । ऐसे में बैंको को सरकार की ओर से मिलने वाला पैकेज कुल NPA का महज एक चौथाई हिस्सा ही है, ऐसे में ये समझ लेना कि बेरोजगारों के ऊपर बैंकों की मेहरबानी होने वाली है तो बड़ी भूल होगी ।


arun profile1अरुण प्रकाश। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।

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