विवाह की पेचीदगियां-कुछ कहा, कुछ अनकहा

विवाह की पेचीदगियां-कुछ कहा, कुछ अनकहा

रूचा जोशी

रेवा और अविनाश पेशेवर बैठकों में मिले और तुरंत एक-दूसरे के प्रति झुकाव महसूस किया ओर आकर्षित हुए। जल्द ही वे अविभाज्य हो गए और बाद में आधिकारिक रूप से शादी के बंधन में बंध गये। जैसे ही वे अपने हनीमून से वापस आए, रेवा को लगने लगा जैसे कुछ गलत हो रहा है, कुछ तो ठीक नहीं हैं। शुरू में उसने इसे एक संक्रमणकालीन चरण का नाम दिया और कुछ दिनों के लिए इसे अनदेखा करने की कोशिश की।

धीरे-धीरे रेवा ने अविनाश के व्यवहार में बदलाव देखना शुरू कर दिया। वह उसके साथ रहने की तुलना में देर तक दफ्तर में रहने लगा। कोई शारीरिक आसक्ति नहीं थी और कभी-कभी उसे ऐसा लगता था कि वह एक ‘प्रेशर कुकर’ के साथ रह रही है जो कभी सीटी नहीं बजाता है! उसने अविनाश को अपने गैजेट्स के साथ पहले से अधिक व्यस्त पाना शुरू किया, कुछ अजीब कॉल और मैसेज अविनाश के मोबाइलमें आ रहे थे, कुछ न सुलझे हुए पैसे के मामले काफी समय से लंबित थे और आने वाले पैसे का कोई हिसाब-किताब नहीं था। वह रेवा के प्रति अब आकर्षित नहीं था और यह  उनके विवाहित जीवन के बहुत ही प्रारंभिक दिनों में शुरू हुआ जिसने उनके जीवन को दयनीय बना दिया।

रेवा ने अविनाश के लिहाज से मिसफिट होने के लिए खुद दोषी ठहराना शुरू कर दिया। वह लगातार खुदको शक की निगाह से देखने लगी थी। अविनाश के कुछ गलत कामों के लिए उसको टोकने पर, उसे आत्म-संदेह और भ्रम से भर दिया जाता था। वह जानती थी कि अविनाश ईमानदार नहीं है, वह इसे महसूस कर सकती थी , लेकिन उसके पास हमेशा पूछे जाने वाले प्रत्येक प्रश्न के लिए उसके कारण तैयार रहते थे। वह ये भी जानती थी कि अविनाश के उत्तर कभी तर्कसंगत नहीं थे और वह हमेशा अपने अतार्किक उत्तरों के कारण तर्कों में खोई रहती थी।

रेवा अपने जीवन से दुखी, उदास और थकी हुई थी। उसकी तबियत पर इन सब का असर दिखना जल्द ही शुरू हो गया | वजन का बढ़ना, रोग प्रतिरोधक शक्ति में गिरावट की वजह से हमेशा बीमार रहना, मासिक धर्म में अनियमितता, हड्डियों का कमजोर हो जाना, अचानक से सांस की बीमारी का उखड़ जाना, यह सब इन्हीं परेशानियों के निशान थे |

उसका मन संदेह से और भर गया जब उसने अविनाश के पीठ पीछे चीजों को टटोलना शुरू किया। उसने उसके कॉल रिकार्ड्स, संदेश और बातचीत, उसके डिजिटल फूटप्रिंट्स जांचने के लिए उसके गैजेट्स की जाँच की तो परिणाम चौंकाने वाले थे! उसे पता चला कि अविनाश चुपके से दूसरे पुरुषों को चाह रहा था। वह एक नकाबपोश समलैंगिक था ! इस तथ्य से रेवा पूरी तरह से टूट गई और उसने अविनाश के साथ कानूनी तौर पर अलग होने का फैसला लिया।

क्या यह अलग होने का कोई नया कारण है? नहीं! यह अभी शुरू हुआ है क्योंकि कई महिलाएं इसके बारे में मुखर होने लगी हैं। इस प्रकार के विवाहों को आम तौर पर मिश्रित-उन्मुख विवाह  (Mixed-oriented/ mismarriages) कहा जाता है। यह तलाक के लिए सामान्य कारणों में से एक बन रहा है जैसे कि समायोजन के मुद्दे, वित्तीय मुद्दे, समसामयिक मुद्दे, हिंसा, मादक द्रव्यों के सेवन, आदि।

मेरी राय में समलैंगिकता के मुद्दे को समाज द्वारा समझने की आवश्यकता है। माता-पिता को, विशेष रूप से माताओं को बच्चे के साथ सभी मुद्दों पर स्वतंत्र रूप से और स्वस्थ तरीके से चर्चा करने की आवश्यकता है। केवल कुछ यौन अभिविन्यास के बारे में बोलना या स्वीकार करना या ऐसे लोगों के अधिकारों के समर्थन में बोलना पर्याप्त नहीं होगा, उन्हें मुख्य धारा में शामिल करने की आवश्यकता है | इन्हे किसी अन्य विषम-लैंगिक व्यक्ति की तरह व्यवहार करने की आज़ादी होगी तब ही उन्हें पूरी तरह से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता प्राप्त होगी और  इस तरह के गलत विवाह को होने से रोका जा सकेगा।


रूचा जोशी। महाराष्ट्र के सांगली जिले की निवासी। MSc (environmental science), MTech ( Remote sensing and GIS)। बिरला इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी, मेसरा से पीएचडी कर रही हैं। आपको भेड़चाल पसंद नहीं है, जिंदगी को अपने तरीके से जीने में यकीन रखती हैं।

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