• ब्रह्मानन्द ठाकुर
    जी हां , विद्रोही कवि रामधारी सिंह दिनकर। हालांकि मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण पर टिकी इस व्यवस्था के संचालक, आधुनिक राष्ट्रवादियों को दिनकरजी के प्रति मेरा यह संबोधन नागवार लग सकत […]

  • सच्चिदानंद जोशी
    नवरात्रि की शुभकामनाओं के बीच एक किस्सा कुछ अलग सा। हम जानते हैं कि नवरात्रि के पहले अमावस्या आती है। सर्वपितृमोक्ष अमावस्या। इसका बहुत महत्व है। इस दिन हममें से कई कोई दान पुण्य करते हैं। मुझे भी […]

  • कोई भी सरकार हो उसकी कोशिश होती है कि जनता के बीच उसके एक्शन का असर दिखे । उसकी योजनाओं का लाभ लोगों को मिले । सरकार की कोशिशों को अमलीजामा अधिकारी और कर्मचारी पहुंचाते हैं । अगर अधिकारी और कर्मचारी ला […]

  • संतोष कुमार सिंह
    देश के अलग-अलग हिस्सों में इन दिनों गाय को लेकर खूब चर्चा हो रही है। गाय से नफे-नुकसान की भी बात हो रही है। गाय के कुछ प्राकृतिक गुणों को अनमोल माना जाता है, लेकिन हमने गौपालन के आर्थिक पक्ष औ […]

  • काले कपड़े पहनने का शौक़ । सादगी पसंद, बेबाक़ी से अपनी राय रखना उनकी आदत । अपनी फ़िल्मों से लेकर उनके डायलॉग तक हर जगह उनकी छाप दिखती है । साल 1948 में 20 सितंबर को मुंबई में जन्मे इस शख्स के विचारों और […]

  • वर्षा मिर्जा
    इन दिनों गधों की हज़ार सालों की सहनशीलता दाव पर है। सब उन्हीं पर जुमले बोल रहे हैं। गधा पचीसी , धोबी का गधा न घर का ना घाट का , गधे की पहलवानी और दुलत्ती तो याद आई ही; मुल्ला नसरुद्दीन , […]

  • राकेश कायस्थ
    सोशल मीडिया पर हंगामा ना हो फिर काहे का सोशल मीडिया। अगर शांति चाहते हैं तो कुछ समय के लिए फेसबुक और ट्विटर से दूर हो जाइये। अगर जिंदगी में गॉसिप की छौंक और कंट्रोवर्सी का तड़का मिस कर […]

  • पुष्यमित्र
    जब मेन स्ट्रीम मीडिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सरदार सरोवर डैम को तोहफे के तौर पर दिए जाने की खबर चलती रही, सोशल मीडिया में छाती भर पानी में डूबे उन विस्थापितों की तस्वीर हमें […]

  • शंभु झा
    दोस्तो, 

    समाज में सार्थक और सकारात्मक बदलाव के लिए वैल्यू एजुकेशन एक बुनियादी जरूरत है। लेकिन हमने विकास का जो मॉडल अपनाया है, उसमें समाज के बहुत बड़े भाग को अच्छी तालीम से वंचित होना पड़ रहा […]

  • राधे कृष्ण
    देश में पहली बुलेट ट्रेन की नींव सही मायने में न्यू इंडिया की आधारशिला रखी गई है । ये कहना है देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पत्नी जसोदा बेन का । 14 सितंबर को अहमदाबाद में […]

  • सच्चिदानंद जोशी
    7 सितंबर 2017 को कोपेनहेगन में था। थोड़ा तफरी करने के इरादे से विश्व प्रसिद्ध लिटिल मर्मेड की प्रतिमा तक चला गया। वो जगह सचमुच बहुत सुंदर और शांत है ।वही उसके निकट एक चर्च था। उसके द्वार पर लिखा […]

  • ब्रह्मानंद ठाकुर
    आज हिन्दी दिवस है। राजभाषा हिन्दी के विकास के बड़े-बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं। बाबजूद इसके आज अपने ही घर में हिन्दी कितनी उपेक्षित और पददलित है , यह बताने की जरूरत नहीं है। हिन्दी दिव […]

  • ब्रह्मानंद ठाकुर
    यह गौरव मुजफ्फरपुर को हासिल है, जहां अयोध्या प्रसाद खत्री ने भारतेन्दु युग  (1850-1900) में हिन्दी साहित्य में आधुनिक युग की शुरुआत की। यह खत्रीजी के ही सतत प्रयास का परिणाम हुआ कि खड़ी बो […]

  • टीवी पत्रकारिता से जुड़े 10 साल हो गए हैं । कई कमियों का बावजूद ये पेशा मुझे सबसे बेहतर लगता है तभी में आज तक इसके साथ बना हुआ हूं । अक्सर ये सुनने को मिलता है कि घर की बातों को बाहर नहीं ले जाना चाहिए लेक […]

  • कल, यानी 14 सितंबर 2017, हिंदुस्तानियों के लिए ऐतिहासिक पल होगा । भले ही भारतीय रेल इस वक्त पटरी से उतर गई है लेकिन कल बुलेट ट्रेन को पटरी पर दौड़ाने के लिए आधारशिला रखी जाएगी। अहमदाबाद-मुंबई (साबरमती से […]

  • विकास मिश्रा
    मेरी पत्नी का सेविंग अकाउंट था इंडियन ओवरसीज बैंक में। गुप्त खाता। जिसमें जमा रकम का मुझे घर में लिखित कानून के मुताबिक पता नहीं होना था, लेकिन श्रीमतीजी के मोबाइल में बैंक से अक्सर […]

  • गौरी लंकेश की हत्या से देश स्तब्ध है। पत्रकार-साहित्यकार वर्ग सहमा हुआ है। आखिर अभिव्यक्ति की आज़ादी के मतलब क्या हैं? हिंसा और उन्माद के इस दौर में कैसे अपनी बात कही जाए, ये एक बड़ा सवाल बन गया है। ऐसे ही तमा […]

  • मृदुला शुक्ला
    बच्चों के साथ घटती तमाम घटनाओं में हम आसानी से किसी न किसी को दोष देकर अपनी जिम्मेदारी से मुक्त हो जाते हैं। घर, स्कूल, सड़कें, अस्पताल, रेलवे स्टेशन यहां तक कि बाल उद्यान भी क्या बच्चों को ध् […]

  • बदलाव प्रतिनिधि, दिल्ली

    गुरुग्राम में रेयान इंटरनेशनल स्कूल में मासूम प्रद्युम्न की हत्या की ख़बर से देश सन्न रह गया । लिहाजा हर कोई अपने-अपने तरीके से गुस्से का इजहार कर रहा और प्रद्युम् […]

  • देवांशु झा
    मां जब कहती है कि
    उसे ईश्वर ने आंखें ही क्यों दीं
    तब मुझे शेक्सपीयर की पंक्तियां याद आती हैं
    अंधकार में खुद को धिक्कारती हुई
    और तब मैं किसी अंधी दुनिया में
    रोशन […]

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