अरुण प्रका

सेना के रिटायर्ड मेजर जनरल एसएन यादव का पार्थिव शरीर गुरुवार को पंचतत्व में विलीन हो गया । द्वारका सेक्टर 24 स्थित शवदाह गृह में सैन्य सम्मान के साथ एसएन यादव की अंतेष्टि की गई । इस दौरान सेना के तमाम बड़े अधिकारी और पारिवार से जुड़े लोग मौजूद रहे । एसएन यादव का  10 अप्रैल, बुधवार को जोधपुर के पास सड़क हादसे में निधन हो गया था । एसएन यादव अपने मित्रों के साथ किसी काम से जोधपुर जा रहे थे, तभी हाईवे पर अचानक एक बच्चा आ गया, जिसे बचाने के लिए ड्राइवर ने इमरजेंसी ब्रेक लगाया और एसएन यादव की कार पलट गई, जिसमें उनके सिर में गंभीर चोट आई, इलाज के लिए उन्हें नजदीक के अस्पताल ले जाया गया, लेकिन खून इतना ज्यादा बह चुका था कि उन्हें बचाया नहीं जा सका, जबकि उनके दूसरे साथियों को भी गंभीर चोट आई है और अस्पताल में उनका इलाज चल रहा है।सेना को जब इस हादसे के बारे में जानकारी मिली तो सेना के अधिकारियों ने उनका शव दिल्ली के आरआर हॉस्पिटल लाया, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद गुरुवार को पार्थिव शरीर उनके आवास पर लाया गया और शाम 4 बजे उनका अंतिम संस्कार किया गया ।

आपको बता दें कि जौनपुर के जलालपुर क्षेत्र के मूल निवासी एसएन यादव एक का जन्म भगरी गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। एसएन यादव बचपन से ही पढ़ाई-लिखाई में काफी तेज रहे और एनडीए की परीक्षा में सफलता हासिल कर सेना में अधिकारी बने । सेना ज्वाइन करने के बाद अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर वो मेजर जनरल जैसे पद तक पहुंचे । एसएन यादव मेजर जनरल बनने वाले जौनपुर जिले के पहले व्यक्ति भी रहे । उनके बड़े भाई ह्दयनारायण बताते हैं कि ”वो स्वभाव से काफी मिलनसार थे । सेना में जिम्मेदारियों की वजह से उनका गांव आना कम हो गया था लेकिन वो जब भी गांव आते हर किसी से मिलते । गांव के विकास को लेकर भी वो काफी चिंतित रहते । दो साल पहले एसएन यादव सेना से रिटायर्ड हुए और गांव में विकास को लेकर कुछ एक्शन प्लान भी तैयार कर रहे थे, लेकिन किसी को क्या मालूम था कि जौनपुर का ये योद्धा इस तरह छोड़कर हम सभी को चला जाएगा।‘’

दो साल पहले जब वो सेना से रिटायर्ड हुए उसी दौरान उन्होंने अपने इकलौते बेटे को खो दिया फिर भी वो हालात से एक योद्धा की तरह लड़े और पूरे परिवार को संभाला । यही नहीं बेटे राहुल ने समाज के लिए जो काम शुरू किया था उसे भी उन्होंने आगे बढ़ाया । राहुल का निधन कैंसर की वजह से हुआ था लिहाजा उन्होंने कैंसर पीड़ितों की मदद के लिए योद्धा नाम से एक संस्था का गठन कर रखा था, जो आज हजारों कैंसर पीड़ितों के इलाज के लिए मदद कर रहा है । लेकिन एसएन यादव के जाने के बाद ना सिर्फ पूरा परिवार सदमे में है बल्कि योद्धा परिवार भी इस सदमे से उबर नहीं पा रहा । एक योद्धा के यूं चले जाने पर हर कोई स्तब्ध है ।किसी को यकीन ही नहीं हो रहा है वो अब उनके बीच नहीं हैं। कैंसर के खिलाफ ‘योद्धा’ की ये मुहिम किस रूप में आगे बढ़ेगी ये तो वक्त बताएगा, लेकिन इतना जरूर है कि बेटे के संकल्प को एसएन यादव ने जिस तरह जीया योद्धा परिवार उनके भी सपने को जरूर आगे बढ़ाएगा । फिलहाल जरूरत है एसएन यादव के परिवार को सांत्वना की जिससे वो इस संकट की घड़ी से उबर सके ।

एस एन यादव कैसे सेना में आए, एक गांव के लड़के ने इसके लिए कितनी मेहनत की इन तमाम पहलुओं पर रिपोर्ट की अगली कड़ी में बात होगी


arun profile1अरुण प्रकाश। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।