मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

रूपेश कुमार

सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है। जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम है। समाज का हर वर्ग इस पर क्रेंदित है। यह समाज का दिशा सूचक है। इससे समाज और देश सशक्त व मजबूत बन सकता है। ये बातें झल्लू बाबू सभागार में साहित्यकार पत्रकार क्लब के बैनर तले आयोजित एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार में डा जयकृष्ण मेहता ने कही।
बिहार राष्ट्र भाषा परिषद के निदेशक सह बीएनएमयू के सीनेट सदस्य डा जयकृष्ण मेहता ने कहा कि सोशल मीडिया के सकारात्मक पहलू से समाज के युवा वर्ग नयी-नयी जानकारियों को हासिल करते हैं। इसके कुछ नकारात्मक पहलू भी हैं जो कभी-कभी समाज में आपसी द्वेष को बढावादेते हैं। डा मेहता ने कहा कि सोशल मीडिया पर सक्रिय रहने वालों को पूरी निष्ठा, तन्मयता और लगन से काम करना चाहिए।
इससे पहले समारोह का विधिवत उदघाटन राष्ट्र भाषा परिषद के निदेशक डा जयकृष्ण मेहता,  पत्रकार पुष्यमित्र, प्राचार्य डा सत्यजीत यादव, विभागाध्यक्ष डा इंद्र नारायण यादव एवं पत्रकार रूपेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। मौके पर क्लब के सचिव संजय परमार एवं अर्थ सचिव रवि कुमार संत ने अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर जनसंचार प्रभा पत्रिका का भी अतिथियों ने विमोचन किया। समारोह की अध्यक्षता डा इंद्र नारायण यादव ने की। संचालन मिथिलेश वत्स ने किया। क्लब के साहित्य सचिव डा सिद्धेश्वर काश्यप ने विषय प्रवेश किया।
मुख्य वक्ता पुष्यमित्र ने मधेपुरा में सोशल मीडिया पर आयोजित ऐसे सेमिनार की सराहना करते कहा कि अब वह दिन दूर नहीं जब सुदूर देहात में भी इसकी खनक से लोगों में जनचेतना का संचार होगा। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता एवं साहित्य का समन्वित माध्यम है सोशल मीडिया। उन्होंने मानवाधिकार और मानवीय न्याय के लिए सोशल मीडिया की सराहना करते कहा कि यह जनमत तैयार करने का सक्षम माध्यम है। पुष्यमित्र ने कहा पिछले पांच सौ सालों से पूरी दुनियां में संवाद के लिए साहित्यकार और पत्रकार विभिन्न रूपों से जुड़े हैं। सोशल मीडिया की ताकत असीमित है। उन्होंने कहा कि कई ऐसी बातें है जो प्रिंट या इलेक्ट्रोनिक मीडिया के जरिए मुमकिन नहीं हो पाती, वहां सोशल मीडिया एक सशक्त विकल्प बन जाता है।  यह आम जनता की अपनी आवाज है।

आप आते हैं तो हमारी पॉजिटिव एनर्जी और बढ़ जाती है- राकेश सिंह

रविवार का दिन था, व्यस्तताओं में वृद्धि स्वाभाविक थी। नया DSLR लेंस 70-300mm अमेजन से आया तो सुबह छत पर उसी के एक्सपेरिमेंट में काफी समय लग गया। सबसे महत्वपूर्ण था मधेपुरा में पहली बार सोशल मीडिया पर आयोजित सेमिनार में भाग लेना। सेमिनार के ख़ास आकर्षण पटना में प्रभात खबर के सीनियर जर्नलिस्ट पुष्यमित्र जी से मिलने की ख्वाहिश थी। वक्ताओं ने अपने-अपने विचार रखे तो गर्व इस बात पर भी होने लगा कि बुजुर्गों से लेकर मधेपुरा के युवाओं में भी अब सोशल मीडिया के निगेटिव-पॉजिटिव असर को लेकर जागरूकता काफी बढ़ी है।

सेमिनार के बाद पुष्यमित्र जी का मधेपुरा टाइम्स ऑफिस भी आना हुआ। अबतक उनके सधे और असरदार लेख पढ़कर प्रभावित होता था आज उनकी बातें और विचार भी प्रभावित कर गए। घंटों जीवन और कैरिअर के उतार-चढ़ाव और संघर्ष पर बातें होती रहीं। प्रभात खबर मधेपुरा के ब्यूरो चीफ रूपेश जी और चन्दन जी भी साथ थे। जानकर मनोबल और बढ़ा कि कई सालों से पुष्यमित्र जी मधेपुरा टाइम्स को फ़ॉलो करते आ रहे हैं और उन्होंने मुझे ये भी बताया कि आपलोग शुरू से ही वीडियो सेक्शन पर काम कर रहे हैं जबकि अधिकांश पोर्टल ने हाल से इस चीज को अपनाया है। मैंने बताया कि टोटल कॉन्सेप्ट ही मेरा अपना था, जिसे बाद में लोगों ने इस्तेमाल किया। 2010 से ही मधेपुरा टाइम्स के चलने और अबतक की पूरी व्यवस्था पर उनसे प्रशंसा के शब्द मिले जो सुकून दे गये। जाहिर है, राज्यस्तरीय बड़े पत्रकार जब इस छोटे जिले के न्यूज पोर्टल के स्टूडियो में अपना बहुमूल्य समय घंटों में दें तो तय मानिए, बहुत कुछ सीखने के साथ-साथ हमारी पॉजिटिव एनर्जी और बढ़ जाती है।
पुष्यमित्र ने शहाबुद्दीन, चंदा बाबू, रॉकी यादव सहित कई ऐसे प्रकरणों की चर्चा करते कहा कि आज जो स्थिति है, वह सोशल मीडिया के कारण है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया आदिवासी क्षेत्रों में भी अपनी धाक जमा रहा है। साथ ही उन्होंने इसके नकारात्मक पहलूओं की चर्चा करते कहा कि कुछ गलत मानसिकता के लोग सोशल मीडिया पर नकारात्मक पक्ष रख कर समाज को कमजोर करते हैं। जरूरत है ऐसे तत्वों से बच निकलने की। विशिष्ट वक्ता चंद्रशेखरम ने दुनिया में संवाद की पौराणिक पद्धति की चर्चा करते हुए आज की नयी तकनीक तक की बात कही। उन्होंने कहा अभी भी इस क्षेत्र में बहुत आगे बढने की जरूरत है। भारत में उदारीकरण और वैश्वीकरण के विकास के साथ ही पत्रकारिकता में नैतिकता और मानवीय मूल्य धुंधले हुए हैं। ऐसे में सोशल मीडिया आम लोगों की आवाज बन कर उभरा है। इसके माध्यम से समाजिक सांस्कृतिक गतिविधियों में एक गति आई है।

विशिष्ट अतिथि सह एसपीएम लॉ कॉलेज के प्राचार्य प्रो सत्यजीत यादव ने कहा कि सोशल मीडिया ने अभिव्यक्ति का फलक व्यापक कर दिया है। हर व्यक्ति इससे प्रभावित हो रहे हैं लेकिन इसके नकारात्मक पक्ष से बच्चों को सतर्क करने की भी जरूरत है। सत्यजीत यादव ने कहा, साहित्यकार पत्रकार क्लब ने मधेपुरा में एक नयी संस्कृति को जन्म दिया जो यहां की ख्याति को दूर दूर तक फैलाने का काम करेगी। सेमिनार में राकेश सिंह ने कहा, लोग सोशल मीडिया के निगेटिव पक्ष को ज्यादा ग्रहण कर रहे हैं। डा आलोक कुमार, रंधीर कुमार, चंदन कुमार, संदीप शांडिल्य, तुरबशु, गौरव कुमार, राहुल यादव, अमन कुमार सिंह ने सोशल मीडिया के वर्तमान परिवेश पर अपने अपने विचार रखे। इस अवसर पर डा ललन कुमार अद्री, डा नीलाकांत, दीपक सिंह, वार्ड पार्षद ध्यानी यादव, रजीउररहमान, प्रभात कुमार मिस्टर, निशांत यादव, गरिमा उर्विशा, विकास कुमार, मानस चंद्र सेतु, ओम प्रकाश, राज कुमार, सुभाष चंद्र, कुमार शंभू शरण सिंह, निशांत कुमार, अभिषेक कुमार अनंत, शिवजी शिरण सिंह, हिमांशु विक्की, सारंग तनय, कृष्ण मुरारी, अशोक कुमार सहित दर्जनों की संख्या में साहित्यकार व पत्रकार मौजूद रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन क्लब के सचिव संजय परमार ने किया।


rupesh profile

मधेपुरा के सिंहेश्वर के निवासी रुपेश कुमार की रिपोर्टिंग का गांवों से गहरा ताल्लुक रहा है। माखनलाल चतुर्वेदी से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद शुरुआती दौर में दिल्ली-मेरठ तक की दौड़ को विराम अपने गांव आकर मिला। उनसे आप 9631818888 पर संपर्क कर सकते हैं।

One thought on “मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

  1. 70के दशक के बाद प्रिंट और इलेक्ट्रानिक मीडिया पर कारपोरेट्स घरानो का कब्जा हो जाने के बाद सोशल मीडिया का दायित्व सचमुच बढ गया है। कुछ कमियां तो हैं ,उसे दूर करना होगा।लेकिन वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था में यह काम कठिन है।असम्भव नही ।

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