अरुण प्रकाश

कोरोना में देशव्यापी बंद का आज दूसरा दिन रहा। पहले दिन के मुकाबले दूसरे दिन लोग ज्यादा संयमित नजर आए। जिन दुकानों पर कल तक सामान लेने की मारा-मारी दिख रही थी आज वहां लोग कतार में उचित दूरी बनाकर खड़े नजर आए । सब्जी मंडी हो या फिर राशन की दुकान, डेयरी हो या फिर दवा की दुकान, हर जगह सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का लोग पालन करते दिखे, जो एक अच्छा संकेत हैं। दिनभर देश के अलग-अलग हिस्सों से आई ऐसी तस्वीरों को देखने के बाद शाम करीब 6 बजे मैं दिल्ली के मयूर विहार फेस-3 के मेन मार्केट की ओर निकला।

कॉलोनी से बाहर निकलते वक्त जब पार्क की ओर नजरें घुमाई तो इक्का-दुक्का लोग नजर आए। लॉक डाउन की वजह से आसमान साफ और पर्यावरण प्रदूषण मुक्त दिखा, फिर भी लोग  घरों से नहीं निकले जो एक अच्छी बात है। कॉलोनी के गेट पर बना मंदिर भी बंद दिखा। मंदिर के दरवाजे पर ताला लटका था और पुजारी मंदिर के भीतर साफ सफाई और धूप-अगरबत्ती करने में जुटे थे। मंदिर के गेट पर एक स्लिप लगी थी जिसपर लिखा हुआ था कि मंदिर बंद है । सुबह शाम आरती होगी । अब ये सिर्फ सांकेतिक आरती का जिक्र है या फिर भक्तों के साथ इसका कोई निर्देश नहीं लिखा था, लेकिन मुझे मंदिर के आसपास कोई नजर नहीं आया। वैसे सरकार का आदेश है कि सभी धार्मिक स्थान बंद रहेंगे ।

जब मैं मेन मार्केट की ओर बढ़ा तो रास्ते में डेयरी फार्म से दूध लेने जाने वालों की कतार नजर आई, हाथ में डब्बा लिए लोग डेयरी फार्म की ओर जा रहे थे हालांकि लोगों के बीच दूरियां भी दिखीं । मैं आगे बढ़ता गया । रास्ते में सब्जी वाले, फल वाले नजर आए और हर दुकान के सामने सड़क पर कहीं एक-एक मीटर की दूरी पर कहीं गोला घेरा दिखा तो कहीं वर्गाकार घेरा दिखाई दिया। शायद ही कोई ऐसी दुकान रही होगी जहां सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन ना किया जा रहा हो। राशन की दुकानों और मेडिकल स्टोर्स पर भी कमोबेस ऐसी ही व्यवस्था थी। अगर कोई ग्राहक इन नियमों को तोड़कर आगे जाकर खड़े होने की कोशिश करता तो उसे ग्राहक ही टोक देते और नियम तोड़ने वाले शर्मिंदगी के भाव से पीछे आकर खड़े हो जाते। फेस-3 के मेन मार्केट में जितने भी मेडिकल स्टोर्स और फल सब्जी की दुकानें दिखीं हर जगह ऐसे ही इंतजाम नजर आए।

दिल्ली सरकार ने ऑन लाइन फूड चेन को इजाजत दे दी है लिहाजा फेस थ्री मार्केट में कुछ डिलिवरी ब्व़ॉय आते-जाते दिखाई दिये साथ ही एक जगह गेट के बाहर कुछ डिलिवरी ब्वॉय खड़े दिखे तो जिस जगह ये सभी रुके थे वहां गेट बंद था और चहारदीवार के दूसरी ओर से एक लड़का इन डिलिवरी ब्वॉय को उनका ऑर्डर दे रहा था । तभी नजर ऊपर बोर्ड की ओर गई तो बोर्ड पर अलग से स्लिप पर लिखा हुआ था कि डिलिवरी के लिए इस नंबर पर संपर्क करें। ये एक फूड कोर्ट का बोर्ड था हालांकि फूड कोर्ट बंद था। लोगों के सामने खाने का संकट ना हो इसलिए खाना ग्राहकों के लिए बनकर आ रहा था और डिलिवरी ब्वॉय उसे पहुंचाने के लिए जा रहे थे ।

यानी पहले दिन के मुकाबले लोग भी संयमित थे और सरकारें भी पहले दिन की गलतियों से सीख लेते हुए लोगों की जरूरतों के मुताबिक सुविधाएं बढ़ाती दिखी । इसलिए आपको पैनिक होने की जरूरत नहीं । ज्यादातर राज्य सरकारें अपने लोगों के लिए अलग-अलग सुविधाएं मुहैया करा रही हैं । संकट बड़ा है इसलिए मुश्किलें भी बड़ी होंगी लिहाजा कुछ कोशिश सरकार कर रही है कुछ कोशिश आप भी करिए । तभी इस मुश्किल घड़ी से निकलने  में हम कामयाब हो पाएंगे । अगर सरकार या फिर हम कोई भी अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से और पूरी ईमानदारी से नहीं करेगा तो लॉकडाउन और बढ़ेगा, मुश्किलों का अंबार भी बढ़ता जाएगा ।