कुंदन शशिराज एक ऐसे युवा के तौर पर अपने साथियों के बीच जाने जाते हैं, जो अपने जुनून के लिए किसी भी हद तक जा सकता है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की अच्छी खासी नौकरी छोड़कर कुंदन ने अपनी कंपनी शुरू की है। 15 साल के संघर्ष के बाद आज वो 15 साथियों की टीम के साथ अपने पैशन के क्षेत्र में काम कर रहे हैं। ऐसे युवा साथी हमें रिस्क लेने की प्रेरणा देते हैं। कुछ पाने के लिए कुछ खोने का हौसला देते हैं। कुंदन शशिराज एडिटर, प्रोड्यूसर, एक्टर, वॉयस ओवर आर्टिस्ट, रंगकर्मी… एक ही शख्सियत के कई आयाम हैं। लेकिन हर मौके पर वो अपनी प्रतिबद्धता, लगन, मेहनत और जुनून से हमें चौंकाते हैं। पत्रकार ए प्रकाश और एस के यादव ने बदलाव के लिए कुंदन शशिराज से तमाम औपचारिक-अनौपचारिक सवाल किए ताकि अपने बीच के एक युवा साथी की शख्सियत को कुछ और बेहतर तरीके से समझा जाए।


बदलाव-
 आप पहले मीडिया में नौकरी करते थे, आज अपनी कंपनी बना ली है , कैसा लग रहा है ?

कुंदन शशिराज-  डिजिटल मीडिया की शुरूआत हुई तो इसकी खूबी ये रही कि पहले दिन से ही इसका पूरा माहौल बड़ा डेमोक्रेटिक रहा। यही इसकी ताकत भी है जो एक आम आदमी को भी अपने बूते कुछ करने का हौसला देती है। यही वजह रही कि मीडिया से ऊब कर मैंने और मेरे मित्र विकास ने 2014 में डिजिटल मीडिया में कंटेन्ट के क्षेत्र में कुछ नया करने के हौसले के साथ एक छोटा सा ऑफिस शुरू किया था। पता नहीं था कि आगे कैसे बढ़ेंगे, लेकिन रास्ते खुलते गए और डिजिटल मीडिया का रोचक सफर सिर्फ हम दोनों के लिए ही नहीं, बल्कि आज एक छोटी सी टीम के लिए भी बदलाव की काफी कहानियां लिख रहा है।

बदलाव- क्या है आपका पैशन ? और  आपके इस पैशन ने कैसे आपको एंटरप्रेन्योरशिप के लिए प्रेरित किया ?

कुंदन शशिराज- मूलत: मेरा पैशन कुछ नया क्रिएट करने का है। अब ये कुछ नया क्रिएट करने का जो पैशन है, वो वक्त वक्त पर अलग अलग तरीकों से करवट लेता रहता है। जब मैं मीडिया में नौकरी कर रहा था, शायद उस वक्त कुछ नया क्रिएट करने के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से बेहतर कोई प्लेटफॉर्म नहीं था, लिहाजा मुझे उसमें मजा आ रहा था। लेकिन साल 2013 -2014 में जब डिजिटल मीडिया की शुरूआत हुई तो उसके डेमोक्रेटिक अंदाज ने मुझे लुभा लिया। काम शुरू हुआ तो लगा कि कुछ और साथियों की जरूरत है। एंटरप्रेन्योरशिप कहने के बजाय मैं ये कहूंगा कि हम कुछ लोगों ने साथ में एक सपने जैसा कुछ देखा और फिर शायद सबकी मिली-जुली मेहनत ने अनगढ़ कच्ची मिट्टी जैसी शुरूआत को भारत के कुछ बड़े कन्टेन्ट ब्रान्ड में तब्दील कर दिया।

बदलाव- मीडिया से अपने जुड़ाव के बारे में हमें बताएं।

कुंदन शशिराज- मेरे मीडिया करियर की शुरूआत 2002 नवंबर से हुई।  करीब 3 साल मैंने वीडियो एडिटर और क्रिएटिव सहायक के तौर पर काम किया। फिर आउटपुट डेस्क पर 2005 में सुदर्शन टीवी के लिए काम करने का मौका मिला। 2006 में कोबरा पोस्ट के लिए इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग की। यहां दो स्टिंग ऑपरेशन किए, फिर करीब एक साल की बेरोजगारी के बाद एमएच-1 में दोबारा आउटपुट डेस्क पर नौकरी मिली। क्राइम डेस्क पर था, रोज़ सनसनी और रेड अलर्ट देखता था। अजीत अंजुमजी से काफी प्रभावित था। उन दिनों अजीत अंजुम सर न्यूज-24 में हुआ करते थे। बात बनी तो न्यूज़ 24 में भी आउटपुट डेस्क पर भी काम करने का मौका मिला। इसके बाद इंडिया टीवी में करीब 3 साल काम किया। इन्हीं आखिरी 3 सालों में मुझे मीडिया से मोक्ष का मंत्र मिल गया।

 

कुंदन और साथियों की पहल

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बदलाव- क्या मीडिया आपके पैशन का हिस्सा नहीं था ?

कुंदन शशिराज- नहीं.. नहीं.. ऐसा नहीं है। मीडिया मेरी जिंदगी के सबसे पहले पैशन और प्यार में से एक है। लेकिन मेरे साथ मजबूरी ये है कि मेरे पैशन हमेशा बदलते रहे हैं। जब तक और जितने दिन भी मीडिया में मैंने काम किया, जबर्दस्त पैशन के साथ काम किया। लेकिन लगभग 13 साल काम करने के बाद फिर एक दिन आया, जब मुझे लगा कि मैं हर रोज खुद को रिपीट कर रहा हूं। कुछ नया नहीं हो रहा। कुछ सीखने को मिल नहीं रहा। बस ये पूर्ण विराम मुझे पसंद नहीं था। लिहाजा कुछ नया करने की चाह में न्यूज़ चैनल्स को छोड़ने का फैसला किया। खुशकिस्मत रहा कि मां पिताजी और मेरी पत्नी ने मेरे इस पागलपन में हर कदम पर मेरा साथ दिया।

बदलाव- तो फिर आपकी मंजिल क्या है?

कुंदन शशिराज- देखिए.. मंजिल यानि पूर्णविराम। और ये पूर्णविराम मुझे पसंद नहीं। मुझे तो मंजिल से ज्यादा मजा सफर में आता है। जो पैशन हो उसे जी भर कर किया जाए उससे ज्यादा मजा किस बात में है। पहले मीडिया मेरा पैशन था… अभी डिजिटल मीडिया में है। हो सकता है कि अगले 5 साल बाद मेरा पैशन कुछ और हो। पैशन के पीछे भागने का मजा ही कुछ और होता है। अगर सरल अर्थों में कहें तो मैं एक जगह टिकने वाला आदमी नहीं हूं। जिस दिन मुझे डिजिटल मीडिया बोरिंग लगने लगा, मैं इसे भी छोड़ दूंगा और वो करूंगा जिसमें रोज कुछ नया करने का मजा आए।

 

बदलाव- क्या आपने कोई तकनीकी डिग्री ली है…

कुंदन शशिराज- जी नहीं, मैं तकनीकी तौर पर कोई बहुत एक्सपर्ट आदमी नहीं हूं। उतना ही जानता हूं, जितना एक नॉर्मल टेक-सेवी जानता है। लेकिन हां पढ़ाई के दौरान मेरी दिलचस्पी ग्राफिक्स में जरूर थी। फिल्मों के ग्राफिक्स एनिमेशन मुझे आकर्षित करते थे। साल 2001 में मेरा सपना भारत की पहली एनिमेटेड थ्री-डी फिल्म बनाने का था। इसलिए इसकी पढ़ाई की। लेकिन 2002 तक मुझे पता चला कि भारत में थ्री डी एनिमेशन और इन चीजों में तकनीक अभी काफी पीछे है। लिहाजा मैंने अपने आप को उस वक्त शुरू हो रहे न्यूज़ मीडिया से जोड़ लिया।

बदलाव- पटना के कल्याणपुर से दिल्ली के कल्याणपुरी कैसे आना हुआ ?

कुंदन शशिराज- जब पटना में ग्राफिक्स एनिमेशन का कोर्स कर रहा था उसी दौरान मेरी मुलाकात बिहार के मशहूर टीवी प्रोड्यूसर प्रणव साही से हुई। प्रणव साही दिल्ली से प्रसारित होने वाले मॉर्निंग ब्रेकफास्ट शो गुड मॉर्निंग मेट्रो शो के प्रोड्यूसर थे। जब उन्हें लगा कि मुझमें ग्राफिक्स एनिमेशन और मीडिया को लेकर काफी उत्साह है तो उन्होंने मुझे अपने टीवी शो के लिए काम करने का मौका दिया। मुझे उस वक्त मीडिया में कुछ आता जाता नहीं था। लेकिन एनिमेशन और ग्राफिक्स में अपने आप को तुर्रम खां समझता था। धीरे धीरे जब काम की गहराई में गया तो मुझे पता चला कि इस समंदर में सीखने को कितना कुछ बाकी है। 2002 में जब इतने सारे मीडिया इंस्टीट्यूट नहीं थे तो गुड मॉर्निंग मेट्रो टीवी शो ने मेरे लिए लर्निंग सेंटर का काम किया। यहां मैंने वीडियो एडिटिंग भी की और शो प्रोडक्शन के सारे आयाम भी सीखे।                                    

बदलाव- तो आपकी जिंदगी में 13 साल बाद ये टर्निंग प्वाइंट आया कैसे  ?

कुंदन शशिराज- ये बात साल 2013 की है। इंडिया टीवी में मेरी नाइट शिफ्ट लगी और यही मेरी लाइफ का टर्निंग प्वाइंट रहा। वैसे पहले ही इस बात का अहसास होने लगा था कि कुछ नया नहीं कर रहा हूं। रात की शिफ्ट ने जागते हुए और सोचने का मौका दिया। कुछ ही रातों में दिल ने दिमाग को कनफर्म नोटिस भेज दिया कि ऐसे तो कुछ होने से रहा। नाइट शिफ्ट में अपना काम पूरा करने के बाद मैं अपना काफी सारा वक्त यूट्यूब पर बिताता था। मैंने ऑनलाइन काफी इंटरव्यूज़ देखे, कुछ बायोग्राफी देखी। तब मेरा विश्वास और यकीन में बदल गया कि हां वाकई अब जिंदगी में बदलाव की जरूरत है।

इसी तलाश के क्रम में मैंने थियेटर भी शुरू किया। थियेटर मुझे काफी पसंद आया। मजा भी आ रहा था, लेकिन एक सवाल दिमाग को मथ रहा था और वो ये कि थियेटर में हम जो कुछ भी कर रहे हैं, वो बस मुट्ठी भर लोग देखते हैं। दूसरी बात थियेटर का आर्थिक मॉडल दिल्ली में बेहद कमजोर है। ऐसे में मुझे लगा कि डिजिटल मीडियम शायद मेरे दिमाग मे चल रहे दोनों सवालों का जवाब है। नौकरी छोड़कर दिल्ली – मुंबई के कुछ चक्कर लगाने के बाद ये फिगर आउट कर लिया कि अब डिजिटल से शुरूआत कैसे करनी है।

2014 में मैंने और मेरे दोस्त विकास ने प्रैंकबाज नाम से यूट्यूब पर एक चैनल बनाया और काम शुरू किया। विकास और मैंने इंडिया टीवी और न्यूज़ 24 में काफी सारा वक्त एक साथ बिताया था। हम दोनों का मिजाज भी काफी मिलता था। मीडिया में नौकरी के दरम्यान भी हम दोनों घंटों फिल्मों और दूसरे क्रिएटिव माध्यमों पर बात किया करते थे। विकास और मैंने प्रैंकबाज शुरू किया तो धीरे धीरे हौसला बढ़ा और आज न्यूज़, इंटरटेनमेंट समेत तमाम सेक्टर में हम सभी साथी मिलकर काम कर रहे हैं।

बदलाव- बाकी सेक्टर से आपका क्या मतलब है और इसमें कैसे काम कर रहे हैं ?

कुंदन शशिराज- दरअसल प्रैंकबाज एक विशुद्ध रिएल्टी मनोरंजन चैनल था। इसी दरम्यान मेरे एक और मित्र मनमोहन के दिमाग में आइडिया आया कि क्यों ना डिजिटल न्यूज में भी कुछ किया जाए। मनमोहन और मैंने साल 2013 में दिल्ली में शॉर्ट फिल्म फेस्टीवल का आयोजन किया था। मीडियाकर्मी के तौर पर मैंने और मनमोहन ने काफी समय तक साथ काम भी किया था। लिहाजा हम दोनों ने साथ मिलकर 2016 में INDIA NEWS VIRAL के नाम से डिजिटल न्यूज़ के लिए एक प्लेटफॉर्म शुरू किया है। हालांकि ये अभी काफी नया है, लेकिन शुरूआती रिस्पांस हमारे लिए काफी उत्साहवर्धक हैं। इन दोनों प्लेटफॉर्म के अलावा Crazy 4 Bollywood नाम से भी एक बॉलीवुड खबरों का काफी पापुलर प्लेटफॉर्म हम चलाते हैं।

बदलाव- आपने इंटरनेट से पैसा कमाने  के गुर सिखाने वाली किताब भी तो लिखी है ?

कुंदन शशिराज-  हा..हा..हा..हा ! बस ऐसी ही एक छोटी सी किताब है। जो कुछ सीखा और समझा है उसे एक किताब में अपने दोस्तों और साथियों के लिए लिखने की कोशिश की है। मेरा खुद का सफर बस एक लैपटॉप के जरिए शुरू हुआ था और आज ये मेरा दृढ़ विश्वास है कि आप एक लैपटॉप के जरिए पूरी दुनिया बदलने की ताकत रखते हैं। बस इन्हीं बातों और कुछ टिप्स ट्रिक्स को मिलाकर एक किताब की शक्ल में छाप डाला गया है।

 

बदलाव- वर्चुअल दुनिया में अपना काम करने वाले नए साथियों को क्या मशविरा देना चाहेंगे ?

कुंदन शशिराज- देखिए, मैं बहुत छोटा आदमी हूं, लेकिन जितना मेरा अनुभव है उससे मैं ये कह सकता हूं कि आप पैशन के साथ शुरूआत कीजिए। जितना प्रयोग करेंगे कामयाबी उतना ही आपके करीब आएगी। अगर आपमें कन्टेन्ट की समझ है तो फिर आपको कामयाब होने से कोई रोक नहीं सकता।

टीम बदलाव से बात करने के लिए शुक्रिया ।

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