kumar-ashish3दीपों के पर्व की रौनक हर तरफ बिखरी है। समाज का हर तबका अपने-अपने अंदाज में दीवाली मना रहा है। समाज के कुछ ऐसे दीपक भी हैं, जिसकी रोशनी से अंधेरा छंटने का भरोसा जगता है। टीम बदलाव दीवाली के मौके पर कुछ एक ऐसे ही लोगों का मन टटोलने की कोशिश कर रही है जो समाज में बदलाव के बीज बो रहे हैं। इस कड़ी में बात कुमार आशीष की जो ऐतिहासिक नगरी नालंदा में बतौर एसपी तैनात हैं। जेएनयू से पढ़े लिखे कुमार आशीष अपने नवाचारों से पुलिसिंग को कुछ और बेहतर बनाने की कोशिश कर रहे हैं। कुमार आशीष ने पुलिस और पब्लिक के बीच की खाई को पाटने के प्रयास किए हैं। मधेपुरा में उन्होंने ‘लव योर पुलिस’ नाम से मुहिम चलाई तो नालंदा में उन्होंने ‘कॉफी विद एसपी’ जैसे नए कार्यक्रम किए। पेश है समाज में बदलाव की दिशा में सतत प्रयत्नशील कुमार आशीष से अरुण यादव की बातचीत के कुछ अंश।

आत्म दीपो भवdeepak

बदलाव- समाज में पुलिस की छवि बहुत अच्छी नहीं है। ऐसे में बतौर एसपी आप पुलिस-पब्लिक की खाई को पाटने के लिए क्या कुछ कर रहे हैं ?

kumar-ashish-runकुमार आशीष- आप बिल्कुल ठीक कह रहे हैं। खासकर यूपी-बिहार में पुलिस को लेकर नकारात्मक सोच हर किसी के मन में रहती है। इसके लिए काफी हद तक हम खुद जिम्मेदार हैं। हमने कभी जनता को वो स्पेस ही नहीं दिया, जिससे वो बेझिझक हमारे पास आए। इसलिए हमारी कोशिश है कि पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद बढ़ाया जाए। पुलिस को लेकर अभी तक लोगों में जो एक नकारात्मक सोच बनी है उसे तोड़ने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। आजकल तो आम लोगों तक पहुंच बनाना बहुत आसान है। इसमें ना तो पुलिस का डर और ना ही थाने के चक्कर काटने की जरूरत। बस हमें सोशल साइट्स पर पुलिस को एक्टिव करने की जरूरत है। मैं जहां भी जाता हूं जनता से संवाद का माध्यम सोशल साइट्स को जरूर बनाता हूं। ये एक ऐसा माध्यम हैं जहां लोग अपनी समस्या बेझिझक शेयर करते हैं। यही नहीं फेसबुक पर हमें जो शिकायत मिलती है उस पर हम फौरन एक्शन लेते हैं। आप यकीन नहीं मानेंगे इसका आम लोगों पर इतना असर पड़ रहा है कि दूसरे जिले के लोग भी मुझसे कहते हैं कि सर हमारे जिले में भी कुछ इसी तरह की मुहिम चलाइए ।

बदलाव- नालंदा में ‘कॉफी विद एसपी’ कार्यक्रम की काफी चर्चा हुई, क्या अब पुलिस जनता को कॉफी की रिश्वत दे रही है ?

kumar-ashish-coffeeकुमार आशीष- जी नहीं, ये कोई रिश्वत नहीं बल्कि पुलिस और पब्लिक के बीच संवाद का एक जरिया है । जिसमें लोग अपनी समस्या लेकर सीधे मुझ तक पहुंचते हैं। इस दौरान किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती। कोई भी अपनी समस्याएं लेकर मुझ तक आ सकता है। मैं उनकी समस्याएं सुनता हूं और उसे दूर करने की हर मुमकिन कोशिश करता हूं। हालांकि अभी तक इसका सिर्फ एक सेशन ही हो पाया है, लेकिन लोगों की मांग को देखते हुए मेरी कोशिश है कि इसे नवंबर से दोबारा शुरू किया जाए। हमारी कोशिश है कि ‘कॉफी विद एसपी’ महीने में कम से कम दो बार किया जाए। अगर काम के दबाव में मुमकिन नहीं हुआ तो महीने में एक बार तो तय है। ये करीब 3-4 घंटे चलता है। इसे अलग-अलग सेशन में डिवाइड करने की योजना है ताकि आम लोगों को कोई असुविधा ना हो। हालांकि अभी हमारा फोकस युवाओं को लेकर ज्यादा है। खास बात ये है कि मुलाकात के आखिर में जितने लोग मौजूद रहते हैं उनको पुलिस की ओर से कॉफी पिलाई जाती है।

बदलाव- आमतौर पर दीपावली या किसी भी त्योहार के वक्त पुलिस की व्यस्तता और चुनौती दोनों काफी बढ़ जाती है। ऐसे में नालंदा पुलिस दीवाली कैसे मना रही है?

kumar-ashish-complain-boxकुमार आशीष- दिवाली पर सुरक्षा के साथ हम पर्यावरण का खास खयाल रख रहे हैं। हमने नालंदा की जनता से ‘ग्रीन दिवाली, क्लीन दिवाली’ की अपील की है। हमारी कोशिश है कि दीपावली पर लोग पटाखों की बजाय सिर्फ दीये जलाएं, यही नहीं पटाखे में जो पैसा खर्च होता है उससे गरीबों के लिए दीये बांटें। यकीन मानिए जब हमने इसकी अपील की तो मुझे बस इतना मालूम था कि कुछ लोग जरूर साथ देंगे लेकिन इतनी तादाद में लोग खड़े हो जाएंगे ये देखकर हैरान रह गया। आज कई समाजिक संगठन नालंदा पुलिस की इस मुहिम के साथ खड़े हैं। लिहाजा दीवाली के दिन सुबह हमलोग वृक्षारोपण की मुहिम चलाएंगे और शाम को हर गरीब परिवार के लिए 11 दीये (तेल,बाती के साथ) और मोमबती बांटेंगे। जिससे कोई भी गरीब दीपों के इस पर्व में रौशनी से दूर ना रहे।

साथ ही एक दीया शहीदों के नाम भी जलाएंगे। शहीदों के परिवारों को अपने साथ होने का अहसास दिलाएंगे। यही नहीं 29 अक्टूबर को शहीद जवानों के लिए हमने कैंडल मार्च की अपील की है जो गैर राजनीतिक और शांतिपूर्ण तरीके से आयोजित की जाएगी। इसके लिए बाकायदा एक ड्रेसकोड भी बनाया गया है।

बदलाव- दीपावली के साथ ही ठंड भी बढ़ने लगती है, ऐसे में तमाम लोग ठंड की वजह से मर जाते हैं, उनके लिए क्या कोई योजना बना रहे हैं ।

kumar-ashish-plantationकुमार आशीष- बिल्कुल, दीपावली के ठीक बाद हम ‘वस्त्रदान योजना’ की शुरुआत कर रहे हैं। हमारे आपके घर ऐसे तमाम कपड़े पड़े रहते हैं जो यूज नहीं होते लेकिन वो जरूरतमंदों के काम आ सकते हैं। कभी-कभी हम कपड़े दान देना तो चाहते हैं लेकिन कहां दान करें ये समस्या बनी रहती हैं तो इसके लिए हमने योजना तैयार कर ली है। जिसके मुताबिक थाने पर एक बॉक्स बनाया जाएगा, जहां आम लोग अपने पुराने या फिर नये कपड़े दान कर सकते हैं। जिसे धुलाने और प्रेस कराने के बाद गरीबों में बांटा जाएगा। हालांकि इसमें थोड़ा खर्च जरूर आएगा लेकिन समाजिक संगठनों और आम जनता की मदद से हम इसे पूरा जरूर कर लेंगे ।

बदलाव- बिहार में शराबबंदी से नालंदा में अपराध के ग्राफ में क्या कोई कमी आई है ?

कुमार आशीष- शराबबंदी का काफी सार्थक नतीजा देखने को मिल रहा है। पिछले साल के मुकाबले इस साल करीब एक हजार अपराध कम हुए । खासकर महिलाओं पर होने वाले अत्याचार में कभी आई है ।

बदलाव- जाहिर है समाजिक सरोकार से जुड़े काम करने में पुलिसवालों को अलग से मेहनत करनी होती है, आप इसे कैसे मैनेज करते हैं।

कुमार आशीष–  मेरी जिम्मेदारी जितनी जनता के प्रति है उतनी ही अपने सहयोगी पुलिसवालों के प्रति भी है। लिहाजा हमने सभी थानों को निर्देश दिया है कि जिस किसी भी पुलिसवाले का जन्मदिन होगा उस वक्त वो दो दिन की छुट्टी ले सकता है। यही नहीं अच्छा काम करने वाले थानों को हर महीने सम्मानित और पुरस्कृत किया जाता है। बेहतर काम के लिए पुलिसवालों को 500 रुपये से लेकर 5 हजार तक का ईनाम दिया जाता है।

kumar-ashish-with-wifeबदलाव-  निजी सवाल के लिए माफी चाहूंगा, लेकिन आपकी नई-नई शादी हुई है ऐसे में परिवार को शिकायत काफी होती होगी। परिवार और पुलिस के बीच वक्त का बंटवारा कैसे करते हैं ?

कुमार आशीष- ये सच है कि मेरी आदत देर रात तक काम करने की है फिर भी मेरी कोशिश होती है कि किसी ना किसी रूप में परिवार को भी थोड़ा वक्त दे सकूं। वैसे मेरी पत्नी पेशे से वकील हैं और सामाजिक काम में दिलचस्पी भी रखती हैं तो वो मेरी मजबूरी को बखूबी समझ जाती है। ऐसे में हम दोनों मिलकर समाज में बदलाव की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं।

बदलाव- हमसे बात करने के लिए शुक्रिया । उम्मीद है कि आपकी इस सोच से दूसरे होनहार अफसर भी प्रेरणा लेंगे और समाज को एक नई दिशा देंगे ।


अरुण यादव। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।

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