सर्बानी शर्मा

बदलाव की ओर से मुजफ्फरपुर में इस बड़ी पहल के लिए श्री ब्रह्मानंद ठाकुर बधाई के पात्र हैं। उन्होंने बदलाव का मान बढ़ाया है।

‘आओ पढ़ें, सुनें और सुनाएं किस्से’, बदलाव बाल क्लब की वर्कशॉप अब एक मुहिम का हिस्सा बनती जा रही है। गाजियाबाद के वैशाली सेक्टर-6 में 6 जून से कहानियों पर एक कार्यशाला चल रही है। इसी तर्ज पर दिल्ली के मयूर विहार में 10 जून से कहानी कार्यशाली की शुरुआत हो गई है। आज  मुजफ्फरपुर जिले के पियर गांव में वरिष्ठ साहित्यकार, संस्कृतिकर्मी और समाजसेवी ब्रह्मानंद ठाकुर कहानी वर्कशॉप शुरू कर रहे हैं। छोटे स्कूली बच्चों के लिए आयोजित इस कार्यशाला का उद्धाटन आज शाम 7 बजे वरिष्ठ साहित्यकार और युवा कवि डाक्टर संजय पंकज करेंगे। ब्रह्मानंद ठाकुर ने मई 2017 में बदलाव के अतिथि संपादक के तौर पर वेबसाइट को समृद्ध किया और अब सहजता से बदलाव के कार्यक्रमों को सुदूर गांवों में क्रियान्वित कर रहे हैं। बदलाव के असली योद्धा और मार्गदर्शक हम ऐसे ही लोगों को मानते हैं।

यह कार्यक्रम 17 जून तक प्रतिदिन शाम सात बजे से आठ बजे तक अलग-अलग शहरों में यूं ही जारी रहेगा। 18 जून को पत्रकार विनय तरुण की स्मृति में एक आयोजन जमशेदपुर में हो रहा है। उसी आयोजन में अपनी-अपनी सहभागिता हम साथी अपने शहरों से ही सुनिश्चित करेंगे।

10 जून से दिल्ली, मयूर विहार में भी किस्सों की कार्यशाला

करीब एक हफ़्ते पहले नवोदय विद्यालय के आर्ट टीचर श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने बदलाव के साथियों से सवाल किया- इस साल कोई कार्यक्रम बदलाव बाल क्लब का नहीं हो रहा, क्यों? उनके इस सवाल ने एक प्रेरणा का काम किया। किस्सों की कार्यशाला का ड्राफ्ट बना और बदलाव की कार्यशैली के मुताबिक उस पर अमल भी शुरू कर दिया गया। एक हफ्ते में तीन शहरों में कार्यशाला की शुरुआत से एक हलचल जरूर पैदा हुई है। खुशी की बात ये है कि पटना से नवोदय के पूर्व छात्र और वर्तमान में पुलिस विभाग से जुड़े अधिकारी अखिलेश यादव भी इसमें गहरी दिलचस्पी ले रहे हैं। अखिलेश और नीलू अग्रवाल जल्द ही ऐसी ही कार्यशाला पटना में शुरू कर सकते हैं।

बच्चों के साथ ढाई आखर फाउंडेशन के सक्रिय सदस्य- संदीप शर्मा। अगली हलचल, बारपा-औरंगाबाद में।

इसके साथ ही औरंगाबाद के बारपा गांव में ढाई आखर फाउंडेशन और बदलाव बाल क्लब के संयुक्त तत्वावधान में किस्सों की कार्यशाला जल्द ही शुरू हो सकती है। ढाई आखर फाउंडेशन और बदलाव, दोनों ही संस्थाओं से गहरा नाता रखने वाले साथी संदीप शर्मा ने ये पहल की है। ढाई आखर फाउंडेशन के साथी बारपा में आर्थिक रूप से पिछड़े बच्चों के लिए एक स्कूल का संचालन पिछले कई सालों से कर रहे हैं। किस्सों के जरिए इस तरह की एक शृंखला का बनना बदलाव के सभी साथियों के कार्य करने की इच्छाशक्ति को और मजबूत बनाता है।

बदलाव की अपील ये है कि जो अभिभावक और बच्चे इन कार्यशालाओं में शिरकत नहीं कर पा रहे। वो अपने घरों में दादा-दादी से कहानियां सुनें। अपनी सेल्फी लें, तस्वीरें खिंचवाएं और सोशल साइ्ट्स पर शेयर करें। अगर वो #badalav kissagoi का इस्तेमाल करें तो बेहतर होगा। बदलाव बाल क्लब, घर-घर में चले तो कितना सुखद हो। मोबाइल, इंटरनेट और टीवी ने हमारी किताबों का स्पेस हमसे छीनना शुरू कर दिया है। दादा-दादी और नाना-नानी के किस्सों की अहमियत कम कर दी है। हम किस्सों के साथ ही इन रिश्तों की पुरानी तासीर की तलाश भी कर रहे हैं।


सर्बानी शर्मा। रायगंज, पश्चिम बंगाल में पली बढ़ी सर्बानी इन दिनों गाजियाबाद में रहती हैं। बीएनएमयू से एलएलबी की पढ़ाई। संगीत और रंगमंच में अभिरुचि।

 

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