विकास तिवारी

शिराज-ए-हिंद जौनपुर वीर सपूतों की धरती है । शेर शाह सूरी से लेकर आधुनिक युग में जौनपुर शिक्षा में अग्रणी भूमिका निभाता रहा है । शिक्षा शिराज-ए-हिंद की शान है तो वहीं स्वास्थ्य बेहद खराब । हम बात कर रहे हैं दोहरे की मार छेल रहे जौनपुर के वासिंदों की । दोहरे को आप नशीले खाद्य पदार्थ की श्रेणी में रख सकते हैं । युवा हों या फिर बुजुर्ग, यहां की एक बड़ी आबादी दोहरे की आदी हो चुकी है, आलम ये है कि दोहरे की वजह से हर साल कई लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है । कैंसर, अल्सर, मुंह में फाईब्रोसिस, जीभ का कैंसर, आंत के कैंसर जैसे रोग लोगों को अपनी गिरफ्त में लेते जा रहे हैं, लेकिन ना तो सरकार को जनता की फिक्र है और ना ही लोगों को अपनी सेहत की चिंता। शहर हो या फिर गांव जौनपुर में खुलेआम जानलेवा दोहरा बिक रहा है । हर तरफ दोहरे की बिक्री धड़ल्ले से हो रही है । अब तो इसका असर पड़ोसी जिलों पर भी पड़ने लगा है । दोहरा की लत ऐसी है कि एक बार लग गई तो फिर छुड़ाए नहीं छोड़ती । यही वजह है कि जिले में हर दिन माउथ कैंसर के मरीजों की संख्या बढ़ती बढ़ रही है ।  माउथ कैंसर के शिकार मरीजों की बढ़ती संख्या डॉक्टरों के लिए भी चिंता का सबब बनी हुई है ।  

दोहरा जौनपुर के हर गली-मोहल्ले  में दुकानों पर आपको मिल जाएगा । 10 रुपये से लेकर 50 रूपये तक के दोहरे के पैकेट बाजार में बिकते हैं । हैरानी की बात ये है कि समाजसेवी संगठनों की शिकायत के बाद जिला प्रशासन ने दोहरे की बिक्री पर साल 2011 में रोक लगा लगाई थी फिर भी इसे बाजार में खुलेआम बेचा जा रहा है और प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है ।

क्यों रनाक होता है दोहरा ?
दोहरे में तम्बाखू का प्रयोग होता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है ।
PFA
एक्ट के तहत दोहरे का कोई भी मानक निर्धारित नहीं है, जिससे दोहरे के निर्माण का कोई मानक नहीं है ।

दोहरे के पैकेट पर कोई चेतावनी अंकित नहीं की जाती और ना ही एक्सपायरी डेट दिया जाता है ।
दोहरे के सेवन से कैंसर, दांत की बीमारी, मुह में फाईब्रेसिस, आंत का अल्सर, मुंह का कैंसर का खतरा ज्यादा होता है ।

दोहरे पर पूर्ण पाबंदी संबंधी याचिका 6 साल से इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है लेकिन अभी तक उसपर कोई फैसला नहीं हो सका है । सामाजिक संगठनों की पहल पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अन्तर्गत कई नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसे खाद्य विश्लेषक प्रयोगशाला में भी भेजा गया है। स्वास्थ्य के लिए दोहरा कितना खतरनाक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बीएचयू, टाटा कैंसर अस्पताल मुम्बई द्वारा दोहरा को कैंसर का कारण बताया गया है। टाटा कैंसर अस्पताल में हर साल 15-20 माउथ कैंसर के मरीज जौनपुर से पहुंचते हैं । ऐसे में दूसरे कैंसर संस्थानों में कितने मरीज जौनपुर से जाते होंगे इसका अंदाजा आसानी से लाया जा सकता है । जौनपुर के लाइन बाजार इलाके में हाल ही में चंद्रभूषण शुक्ला की मौत हो गई तो पंकज सोनकर मुंह के अल्सर का इलाज कराकर मुंबई से लौटे हैं । फिलहाल हमारे कई युवा साथी दोहरे के खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं लेकिन जरूरत इस बात की है कि सरकार और प्रशासन के साथ आम लोगों को भी अपनी आदत बदलने की । ताकि शिराज-ए-हिंद को दोहरा मुक्त बनाया जा सके ।


विकास तिवारी/ दोहरे के खिलाफ़ जौनपुर में अभियान चला रहे हैं । समा ज में फैली कुरीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद करते रहते हैं ।

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