अरुण प्रकाश

देश का अन्नदाता बदहाल है, उसके पीछे कई वजह हैं, सबसे बड़ी वजह है बाजार के हिसाब से खेती की जानकारी का अभाव होना । साथ ही किसानों को उनकी पैदावार का उचित मूल्य ना मिलना । हमारी सरकारें किसानों की फसल का न्यूनतम समर्थन मूल्य तो तय करती हैं, लेकिन अधिकतम विक्रय मूल्य तय नहीं करती। मसलन बिचौलिए कम कीमत पर किसान से खरीदारी करें और मनमाने रेट पर बाजार में बेचें। ऐसे में किसान भी परेशान और महंगी कीमत से खरीददार भी बेहाल । लिहाजा जरूरत है किसानों को जागरुक करने की, उन्हें बाजार की तिगड़मबाजियों की समझ होने की। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर टीम बदलाव किसानों को जागरुक और प्रशिक्षित करने में जुटी है ।

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में पिछले दिनों टीम बदलाव ने फूलों की खेती कैसे करें ? नाम से एक कार्यशाला का आयोजन किया। सेहमलपुर गांव में आयोजित इस कार्यशाला में मैनपुरी के मास्टर्स इन फ्लावर रवि पाल ने किसानों को फूलों की खेती के गुर सिखाए और अपने अनुभव साझा किए। रवि ने बताया कि कैसे उन्होंने नौकरी छोड़कर फूलों की खेती शुरू की। पहले घरवालों ने उन्हें काफी भला-बुरा कहा, लेकिन जब फूलों से घर में पैसे आने लगे तो हर कोई उनकी तारीफ करने लगा और आज मैनपुरी के आसपास के करीब 500 किसान उनके साथ मिलकर गेंदे के फूलों की खेती करते हैं। रवि पाल ने किसानों को अच्छे बीज के बारे में भी जानकारी दी और बताया कि कौन से बीच कब बोने चाहिए, ताकि जब बाजार में फूलों की डिमांड ज्यादा हो ठीक उसी वक्त आपकी फसल तैयार हो जिससे आपको अच्छा मुनाफा मिल सके । इसके लिए आपको शादी-विवाह के सीजन के साथ त्यौहारों पर भी फोकस करना होगा, क्योंकि इस वक्त फूलों की खपत कई गुना बढ़ जाती है ।

यही नहीं रवि पाल ने खेत में अलग-अलग प्रजाति के बीज डालकर किसानों को सही विधि के बारे में जानकारी दी और उसके रख-रखाव के साथ उनमें लगने वाले रोगों से निपटने के उपाय भी सुझाए । रवि पाल ने बताया कि 30 से 45 दिन में फूलों की नर्सरी तैयार होने के बाद कैसे खेत में उसकी रोपाई करें। रोपाई के दौरान फूलों के बीच कम से कम 9 से 12 इंच की दूरी जरूर रखें।

रवि पाल ने सबसे ज्यादा जोर मार्केटिंग पर दिया और किसानों को अपना संगठन बनाने की सलाह दी । रवि पाल ने किसानों से कहा कि अगर बिचौलिया आपके माल से अच्छी कमाई कर सकता है तो फिर हम उस काम को क्यों नहीं कर सकते। मसलन हर किसी के पास अलग-अलग हुनर है, जरूरत है उसे पहचानने की । हमारा एक भाई फूल पैदा कर रहा है तो दूसरा भाई उसकी मार्केटिंग आसानी से कर सकता है । उसके लिए रवि पाल ने किसानों को उदाहरण देकर समझाया कि मान लीजिए आपके जौनपुर में आपके फूलों की डिमांड कम है तो आप मुझसे संपर्क कीजिए और अपना माल मैनपुरी और आगरा की मंडी में भेजिए, मैं खुद आपका माल बेचूंगा । इसी तरह अगर आगरा में माल सस्ता है और जौनपुर में महंगा तो आप लोग मेरा माल यहां की मंडी में बेचिए और अपना मुनाफा और कमिशन दोनों लीजिए । इससे आपके पास नए बाजार खुलेंगे और सस्ते में माल बेचने के लिए मजबूर भी नहीं होना होगा । इसी तहर अलग-अलग शहरों में किसानों से संपर्क कीजिए । जितना बड़ा नेटवर्क होगा उतनी अच्छी कमाई होगी । ये फॉर्मूला आप अपनी दूसरी फसलों के लिए भी इस्तेमाल कर सकते हैं ।

रवि पाल ने बर्मिंग कंपोस्ट के इस्तेमाल पर भी जोर दिया और कहा कि आप बर्मिंग कंपोस्ट बनाकर ना सिर्फ अपने उत्पाद की क्वालिटी बढ़ा सकते हैं बल्कि इसे बेचकर मुनाफा भी कमा सकते हैं ।

वहीं कार्यशाला में शामिल जीत बहादुर ने किसानों को जैविक खेती की ओर लौटने की सलाह दी और बताया कि कैसे आप जैविक खेती के जरिए अपने माल की अलग ब्रॉन्डिंग कर बाजार में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं ।

वहीं मिट्टी जांच को लेकर काम कर रहे दिलीप मौर्या ने किसानों को मिट्टी के पोषक तत्वों के बारे में जानकारी दी और बताया कि कैसे आप अपनी मिट्टी की जांच कर ना सिर्फ अपनी फसल की लागत कम कर सकते हैं बल्कि खेती की उर्वरा शक्ति भी बढ़ा सकते हैं। दिलीपजी ने ये भी बताया कि जगह-जगह मिट्टी जांच केंद्र भी खोले जा चुके हैं, बस जरूरत है हमें उस दिशा में सोचने की।

बदलाव की इस कार्यशाला में किसान मंच से जुड़े सत्यप्रकाश आजाद ने किसानों को छोटे-छोटे समूह बनाने के लिए प्रेरित किया और बताया कि कैसे आप किसानों का समूह बनाकर नाबार्ड की योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं और अपने साथ अपने गांव की तस्वीर और तकदीर बदल सकते हैं। सत्यप्रकाश ने बदलाव की इस मुहीम की सराहना कि और कहा कि टीम बदलाव की ये पहल तभी सार्थक होगी जब हमारे किसान भाई आगे आगकर खुद को बदलने की दिशा में कदम बढ़ाएंगे ।

भगरी गांव के रहने वाले राम धारी यादव ने गांव में रहने वाले युवाओं से आधुनिक खेती पर जोर देने की अपील की।

बदलाव की ये कार्यशाला की अध्यक्षता खरपत्तू यादव ने की, जबकि विशिष्ठ अतिथि रिटायर्ड डिप्टी कमिश्नर मंगला प्रसाद यादव रहे । कार्यक्रम के संचालन का जिम्मा सिंचाई विभाग में बतौर प्रशासनिक अधिकारी कार्यरत मंगल देव यादव ने संभाला । कार्यक्रम के आयोजन में टीम बदलाव की जौनपुर यूनिट से जुड़े सत्य प्रकाश यादव, डॉ. हरि प्रकाश सिंह और विजय प्रकाश ने अहम भूमिका निभाई।


arun profile1अरुण प्रकाश। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय।