अजीत अंजुम

“हर आदमी में होते हैं दस बीस आदमी

जिसको भी देखना हो कई बार देखना“

किसी शख्स को परखने के लिए निदा फाजली जैसे शायर की लिखी ये मशहूर लाइनें हैं। आदमी कोई भी हो, उसके भीतर दस-बीस चेहरे होते हैं। कुछ जो आपको दिखता है, कुछ जो नहीं दिखता। कुछ जो वो दिखाना चाहता है, कुछ जो वो छिपाना चाहता। जवाहर लाल नेहरु के दामाद, उस दौर में देश की सबसे ताकतवर महिला इंदिरा गांधी के पति और राजीव-संजय के पिता फिरोज जहांगीर गांधी के कई चेहरों का जिक्र उनपर लिखने वाले इतिहासकारों-लेखकों ने किया है। फिलहाल हम सिर्फ दो चेहरों की बात करते हैं। निजी जिंदगी में फिरोज क्या थे? सार्वजनिक जिंदगी में फिरोज क्या थे? फिरोज की जिंदगी में जितना झांकेगे, उतनी ही गहराई दिखेगी। जवाब कम मिलेंगे। सवाल ज्यादा उगेंगे। बीते चालीस सालों में इंदिरा और नेहरु पर लिखी गई दर्जनों किताबों में फिरोज गांधी के बारे में काफी कुछ लिखा गया है। जितने मुंह, उतनी बातों के आधार पर फिरोज की शख्सियत को समझते हुए कई कुछ सवाल उगते हैं।

इंदिरा-फिरोज गांधी के रिश्तों की कहानी पार्ट-1

क्या फिरोज इंदिरा गांधी के बढ़ते प्रभाव और रुतबे से परेशान रहते थे? क्या फिरोज गांधी इंदिरा के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के खिलाफ थे?  क्या फिरोज का नेहरु सरकार से नाखुश होना खराब रिश्तों की वजह बना? क्या नेहरु की नापसंदगी की वजह से इंदिरा-फिरोज में अलगाव हुआ? क्या नेहरु-इंदिरा और फिरोज के बीच आपसी भरोसा खत्म हो गया था? क्या नेहरु इंदिरा और फिरोज का अलगाव चाहते थे? क्या इंदिरा के फैसलों का विरोध करके फैसले उनकी आंखों की किरकरी बन गए थे? क्या फिरोज ने इंदिरा को खाने की मेज पर ‘फासिस्ट’ कह दिया था? क्या फिरोज के मुंह से अपने लिए फासिस्ट सुनकर पहली बार इंदिरा बुरी तरह बौखला गईं थी? क्या फिरोज नेहरु के दामाद होने के ठप्पे से मुक्ति चाहते थे? क्या फिरोज नेहरु-इंदिरा से नाराज होकर अलग रहने चले गए थे? क्या इंदिरा फिरोज को अपना सबसे बड़ा सियासी दुश्मन मानने लगी थीं? क्या फिरोज से अपनी सत्ता को चुनौती मिलने से इंदिरा बहुत नाराज रहती थीं?

फ़ाइल फोटो

दो बार दिल का दौरा पड़ने के बाद सही इलाज होता तो बच जाते फिरोज? ऐसे पचासों सवाल के बाद कुछ सवाल उनकी निजी जिंदगी को लेकर भी हैं। इंदिरा गांधी से शादी से पहले और बाद में फिरोज की रंगीन मिजाजी के बारे में काफी कहा-सुना गया। निजी जिंदगी के बारे में कुछ सवाल हैं। जवाब तलाशने की कोशिश करेंगे तो कई बार ऐसा लगेगा कि कहीं से फिरोज के बारे में कुछ बातें निकली। किसी ने कोई किस्सा सुनाया। किसी जीवनी लेखक ने पहली बार उसे छाप दिया। फिर कई लेखकों ने उसको मूल श्रोत मानकर अपनी किताब में जिक्र कर दिया। फिरोज की निजी और सार्वजनिक जीवन के बारे में हर किताब में कुछ लोगों के बयान हैं। संस्मरण हैं। किस्से हैं। फिरोज की निजी जिंदगी उन्हें एक रंगीन मिजाज शख्स के तौर भी पेश करती है, जिसे महिलाओं की संगति बेहद पसंद थी।

क्या फिरोज गांधी वूमनाइजर थे?  क्या फिरोज की जिंदगी में कई महिलाएं थीं? क्या खाना-पीना और से** फिरोज की कमजोरी थी? इंदिरा से शादी के पहले क्या फिरोज इंदिरा गांधी की मां कमला नेहरु के भी ‘काफी करीबी ‘थे? क्या नेहरु फिरोज और अपनी पत्नी कमला के करीबी रिश्तों के बारे में जानते थे? क्या इलाहावाद में फिरोज और कमला के रिश्तों के बारे में पर्चे बांटे गए थे?

1912 में पैदा हुए फिरोज गांधी की मौत 1960 में दूसरी बार दिल का दौरा पड़ने से हुई। जब फिरोज की मौत हुई,  तब उनकी उम्र सिर्फ 48 साल थी। इंदिरा उनसे पांच साल छोटी थीं। पहली बार जब उन्हें 1958 में दिल का दौर पड़ा, तब भी इंदिरा दिल्ली से बाहर भूटान के दौरे पर थीं। आखिरी बार जब जानलेवा दौरा पड़ा, तब भी इंदिरा दिल्ली से बाहर केरल में थीं। संयोग देखिए। दोनों बार खबर मिलने पर वो अस्पताल में ही फिरोज को देखने आई। उन दिनों फिरोज अपनी कांग्रेस अध्यक्ष पत्नी और प्रधानमंत्री ससुर से अलग सांसद कोटे से आवंटित राजेन्द्र प्रसाद रोड वाले बंगले पर अकेले रहते थे।

मरने से कुछ साल पहले फिरोज गांधी से नेहरु और इंदिरा के रिश्ते इस कदर खराब हो गए थे कि कई बार एक कमरे में होकर भी नेहरु फिरोज से बात नहीं करते थे। इंदिरा बीच-बचाव करती थीं। कई बार इंदिरा बुरी तरह नाराज होती थीं। फिरोज पीएम हाउस छोड़कर चले जाते थे।इंदिरा-नेहरु से फिरोज के रिश्ते और उनके आखिरी दिनों की कहानियां एक साथ कई किताबों में पढ़ रहा हूं। इंतजार कीजिए। ये ऐसी जानकारियां हैं जो यकीनन आपने पहले नहीं सुनी-पढ़ी होगी।


10570352_972098456134317_864997504139333871_nअजीत अंजुम। बिहार के बेगुसराय जिले के निवासी। पत्रकारिता जगत में अपने अल्हड़, फक्कड़ मिजाजी के साथ बड़े मीडिया हाउसेज के महारथी। बीएजी फिल्म के साथ लंबा नाता। स्टार न्यूज़ के लिए सनसनी और पोलखोल जैसे कार्यक्रमों के सूत्रधार। आज तक में छोटी सी पारी के बाद न्यूज़ 24 लॉन्च करने का श्रेय। इंडिया टीवी के पूर्व मैनेजिंग एडिटर।

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