ब्रह्मानंद ठाकुर

आज से 6 साल पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मुजफ्फरपुर जिले के पिलखी मे बूढीगंडक नदी पर बने पुल का शिलान्यास करने आए थे। उसी दिन मौका पाकर स्थानीय मुखिया सीता देवी ने मुख्यमंत्री से एक अस्पताल की मांग कर दी। मांग चूंकि ग्रामीण जनता की सेहत से जुड़ी थी सो मुख्यमंत्री ने उपस्थित स्थानीय लोगों की भावना की कद्र करते हुए अस्पताल के लिए जमीन उपलब्ध कराने का इशारा किया और चलते बने। फिर इसी गांव के कृष्णदेव चौधरी और डाक्टर देवनारायण चौधरी दोनों सहोदर भाइयों ने एक एकड़ जमीन दान में दी। अस्पताल भवन बन कर तीन साल पहले ही तैयार हो गया और अब उद्घाटन की बाट जोह रहा है।

आज से साढे चार साल पहले 7 फरवरी, 2012 को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पिलखी गांव आए थे। बूढी गंडक नदी पर निर्मित पुल का उद्घाटन करने। जब वे वापस जाने लगे तो स्थानीय मुखिया सीता देवी ने उनसे यहां एक अस्पताल का निर्माण कराने का अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने उनके इस अनुरोध पर विचार करने का आश्वासन दिया। इसके बाद अस्पताल भवन के लिए जमीन की तलाश शुरू हुई। इसी गांव के कृष्णदेव चौधरी और डाक्टर देवनारायण चौधरी दो सहोदर भाइयों ने मुजफ्फरपुर – पूसा मार्ग पर पिलखी गांव में इस प्रस्तावित अस्पताल भवन निर्माण हेतु अपेक्षित एक एकड़ जमीन दान मे देने की सहमति दे दी। उन्हें बताया गया कि जमीन दान में देने पर अस्पताल का नाम उनके माता – पिता के नाम पर रामदुलारी देवी – मिठ्ठुलाल चौधरी मेमोरियल अस्पताल रखा जाएगा।

15 जनवरी 2013 को राज्यपाल के नाम रामदुलारी देवी – मिठ्ठुलाल चौधरी मेमोरियल हास्पिटल के नाम कृष्णदेव चौधरी ,डाक्टर देवनारायण चौधरी ने एक एकड़ जमीन का दानपत्र लिख दिया। 30 जुलाई 2013 को 30 शय्या वाले इस मातृ- शिशु अस्पताल का शिलान्यास हुआ। शिलान्यास पट पर स्पष्ट रूप से रामदुलारी – मिठ्ठुलाल चौधरी स्मृति मातृ चिकित्सालय लिखा हुआ है। शिलान्यास मुरौल प्रखंड के तत्कालीन प्रमुख पवन कुमार ने किया था। निर्माण कार्य बड़ी तेजी से होने लगा और दो वर्ष के अंदर ही दिसम्बर 2015 में 30 शय्या वाले मातृ-शिशु अस्पताल एवं चिकित्सक एवं नर्सेज आवास की भव्य इमारत सिविल सर्जन को हस्तगत करा दी गई। सिविल सर्जन ने प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र मुरौल को निर्देश दिया कि वे भवन को अपने प्रभार में लेकर अस्पताल को संचालित करने हेतु चिकित्सक एवं पारा मेडिकल स्टाफ उपलब्ध कराने संबंधी प्रस्ताव भेजें। इस निर्देश के भी दो साल हो रहे हैं लेकिन अस्पताल अबतक चालू नहीं हो सका है।

अस्पताल को शीघ्र चालू कराने की मांग को लेकर इस वर्ष मई महीने के तीसरे सप्ताह में पिलखी एवं आस – पास के गांव से 5 सदस्यों का एक प्रतिनिधि मंडल पटना पहुंचा। पिलखी गजपति पंचायत की मुखिया सीता देवी के नेतृत्व में स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय से उनके सचिवालय कक्ष में मुलाकात की। उस प्रतिनिधि मंडल में यक्ष संवाददाता भी शामिल था।स्वास्थ्य मंत्री ने इस सम्बंध में अबतक किए गए कामकाज से सम्बंधित सरकार के विशेष सचिव , स्वास्थ्य विभाग से जारी एक पत्र प्रतिनिधिमंडल को थमा दिया। जिसमें यह कहा गया है कि मुजफ्फरपुर के पिलखी गांव के 30 शय्या वाले मातृ – शिशु अस्पताल के लिए कुल 50 नियमित पदों के सृजन की स्वीकृति मिल चुकी है। इनमें प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी का – 1 , विशेषज्ञ चिकित्सक , 6 , सामान्य चिकित्सक –6 , ए ग्रेड स्टाफ नर्स -12 , एक्सरे टेक्नीसियन – 1, लैब टेक्नीसियन –4 , फार्मासिस्ट -3, ओटी टेक्नीसियन- 6, ड्रेसर -6 , निम्न वर्गीय लिपिक -4 और आपथेलमिक का 1 पद शामिल है। पत्र मे यह भी बताया गया है कि सृजित पदों अनुमानित वार्षिक व्यय 2 करोड़ 59 लाख 5 हजार 876 रूपये सम्भावित है। यह भी बताया गया कि इस राशि का वहन मांग संख्या -20, मुख्य शीर्ष 2210–चिकित्सा तथा लोक स्वास्थ्य, उप मुख्य शीर्ष–03– ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं–एलोपैथी, लघु शीर्ष—110– अस्पताल तथा औषधालय ,उप शीर्ष—0001–सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, विपत्र कोड–20–2210031100001 के अंतर्गत उपबंधित राशि से विकलनीय होगा। यह भी कि सभी सृजित पदों का अनुमोदन स्वास्थ्यमंत्री और मंत्रीपरिषद से हो चुका है।

मंत्री महोदय ने प्रतिनिधि मंडल को यह भी जानकारी दी कि बस ,अब रोस्टर फाइनल होते ही सभी पदों पर बहाली हो जाएगी और अस्पताल शीघ्र चालू हो जाएगा। पंचायत की मुखिया सीता देवी कहती हैं कि उस आश्वासन को भी चार महीने से ज्यादा वक्त बीत गया। अब तक बहाली नहीं हुई। यहां यह सब विस्तार से इसलिए लिखना पड़ा कि गांव में एक पुरानी कहावत है – पइली बिन पाहुन उपास ।’ घर में भोजन बनाने की सभी सामग्री थी लेकिन चावल नापने वाली पइली न रहने के कारण भोजन नहीं बना और पाहुन उपास रह गये। पद सृजित हो गया। वेतन – भत्ते की राशि और उसके निकासी की प्रक्रिया भी तय हो गई लेकिन बहाली ही नहीं हो रही है। मुरौल के पूर्व प्रमुख पवन कुमार कहते हैं कि स्थानीय लोगों के दबाव पर सिविल सर्जन मुजफ्फरपुर ने 15 अगस्त से इस अस्पताल मे ओपीडी चालू करने की बात कही थी। स्थानीय समाचारपत्रों मे भी इस आशय की खबर छपी थी। लोगों में उत्साह जगा कि ओपीडी ही सही , कुछ तो फायदा होगा। लेकिन 15 अगस्त के दिन लोग इंतजार करते रह गये। निराशा ही हाथ लगी। इस बाबत पूछे जाने पर सिविल सर्जन शिवचंद्र भगत कहते हैं कि डाक्टर की कमी के कारण मातृ-शिशु अस्पताल में तत्काल ओपीडी सेवा शुरू नहीं की जा सकी है। डाक्टर एवं अन्य चिकित्सा कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रियाधीन है। नियुक्ति होते ही विधिवत अस्पताल चालू हो जाएगा। आर्यावर्त प्रसंग ने जब जिला जद यू अध्यक्ष हरीओम कुशवाहा, जो इसी मुरौल प्रखंड के मुरौल गांव के रहने वाले हैं, से अस्पताल के उद्घाटन मे हो रहे विलम्ब के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ग्रामीण क्षेत्रों मे बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। बड़ी संख्या में डॉक्टरों की बहाली की प्रक्रिया चल रही है। अक्टूबर के अंत तक बहाली यदि हो जाती है तो नवम्बर में हर हाल में पिलखी अस्पताल चालू हो जाएगा।

अब थोड़ी चर्चा पिलखी अस्पताल के लिए जमीन दाता की पीड़ा की। पिलखी निवासी कृष्णदेव चौधरी 76 वर्ष की उम्र पूरी कर चुके हैं। इनके अनुज देवनारायण चौधरी एमबीबीएस डाक्टर हैं। शहर में रह कर प्रैक्टिस करते हैं। बड़ा ही सुखी सम्पन्न परिवार। दोनों भाई मे राम – लक्षमण जैसा प्रेम। अस्पताल के लिए जब जमीन दान में देने की बात आई तो कुछ लोगों ने कृष्णदेव जी से सम्पर्क किया। कहा-बड़ा पुण्य होगा चौधरी जी। इलाके के लोग नाम लेंगे आपका। अस्पताल का नाम आपके स्वर्गीय मां – पिता जी के नाम से होगा। अमर हो जाएंगे वे। आप दोनों भाई भी यश के भागी हो जाएंगे। पसीज गया कृष्णदेव जी का दिल। मान लिए गांव के लोगों की बात। छोटे भाई डाक्टर देवनारायण जी से पूछा। छोटा भाई बड़े भाई की इच्छा का हमेशा सम्मान करने वाला। कह दिया-हां। इलाके में खुशी की लहर दौड़ गई। कहां मिलता है अब ऐसा कोई दाता जो जनहित में कुछ बड़ा काम कर सके?

15 जनवरी 2013 के दिन अस्पताल के लिए राज्यपाल के नाम एक एकड़ जमीन का दानपत्र लिख दिया दोनों भाइयों ने। दस्तावेज सबूत है, जिसमें लिखा हुआ है -रामदुलारी – मिठ्ठूलाल चौधरी मेमोरियल हास्पिटल , पिलखी गजपति। राम दुलारी इनकी मां का और मिठ्ठूलाल चौधरी इनके पिता का नाम है। वर्तमान में इस एक एकड़ जमीन की कीमत होगी लगभग डेढ से दो करोड़ रुपये। अस्पताल भवन बना। उसका नाम हो गया –  मातृ – शिशु अस्पताल , पिलखी। जमीन रजिस्ट्री की शर्तों के अनुसार रामदुलारी – मिठ्ठु लाल चौथरी मेमोरियल अस्पताल गायब। यह बदलाव देख कृष्णदेव जी के होश उड़ गये। वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। पिछले 3 अगस्त को उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा जी को बड़ा मार्मिक पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए लिखा है कि यदि सरकार अपनी जरूरत के लिएआज के बाजार दर पर इस जमीन का अधिग्रहण करे तो तो इस एक एकड़ का मुआवजा उन्हें लगभग 10 करोड़ मिलेगा। इतनी कीमती जमीन उन्होंने मुफ्त में दी। सरकार ने शर्त का उल्लघंन किया है। इसलिए जमीन उपहार रजिस्ट्री के शर्त उल्लंघन और लोक लाभ की पूर्ति में अत्यधिक विलंब को देखते हुए भविष्य में जमीन वापसी का मेरा दावा या वर्णित मुआवजा पाने का मेरा दावा और कानून हक बना हुआ है।

पत्र में उन्होंने यह भी लिखा है कि जमीन रजिस्ट्री के शर्तानुसार रामदुलारी – मिठ्ठु लाल चौधरी मेमोरियल हास्पिटल , पिलखी गजपति नामकरण अबतक बिहार सरकार द्वारा नहीं किया गया है जो कानून और न्याय के विरुद्ध मेरे संवैधानिक अधिकार और द्विपक्षीय विश्वास और समझौते का उल्लंघन है। पत्र में आगे उन्होंने लिखा है कि आज से तीन साल पहले बनकर तैयार अस्पताल भवन, कर्मचारी एवं चिकित्सक आवास और उनके द्वारा दी गई उपहार स्वरूप एक एकड़ जमीन बिना उद्देश्य पूर्ति के गैर उत्पादक एवं गैर कार्यात्मक रूप से पड़ी हुई है जो एक राष्ट्रीय क्षति है। उन्होंने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री से आग्रह किया है कि वे अपने स्तर से राज्य सरकार को निर्देश दें कि जमीन दान के शर्तों के अनुरूप अस्पताल के नाम के साथ उनके माता -पिता का नाम जोड़ा जाए और जनहित में यह अस्पताल शीघ्र चालू किया जाए।


ब्रह्मानंद ठाकुर। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के निवासी। पेशे से शिक्षक। मई 2012 के बाद से नौकरी की बंदिशें खत्म। फिलहाल समाज, संस्कृति और साहित्य की सेवा में जुटे हैं। मुजफ्फरपुर के पियर गांव में बदलाव पाठशाला का संचालन कर रहे हैं।

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