टीम बदलाव

अंधभक्ति में हरियाणा और पंजाब जल रहा है । बालात्कारी बाबा के गुंडे पंचकुला से लेकर दिल्ली, गाजियाबाद तक तांडव मचा रहे हैं । ऐसा लग रहा है देश में सरकार नाम की चीज नहीं बची है । रेप केस में राम रहीम को पंचकूला की सीबीआई अदालत ने जैसे ही दोषी करार दिया अदालत के बाहर हिंसा भड़क उठी । गोलियों की आवाज, लाठीडंडे से तोड़फोड़,मीडिया की गाड़ियों में आगजनी होने लगी । देखते ही देखते कोर्ट परिसर के बाहर अफरा-तफरी मच गई । फिर क्या था हरियाणा से उठी आग की लपटों में पंजाब के कई शहर घिर गए । बटिंडा, मुक्तसर, संगरूर सब जगह बलात्कारी बाबा के भक्तों ने तांडव मचाना शुरू कर दिया । पंचकूला से लेकर सिरसा तक हिंसा भड़क उठी । इस हिंसा में 25 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर चूक कहां हुई । जब हाईकोर्ट दो दिन से सरकार को फटकार लगा रहा था उसके बाद भी सरकार और प्रशासन क्यों सोता रहा । क्या हरियाणा की हिंसा की पटकथा पहले से तो नहीं लिखी जा चुकी थी ।

ये हम इस लिए कह रहे हैं क्योंकि जिस तरह पिछले एक हफ्ते से सिरसा से लेकर पंचकूला तक राम रहीम समर्थकों का जमावड़ा लग रहा था उससे साफ हो गया था कि अगर राम रहीम दोषी करार दिया गया तो हंगामा होना तय है, फिर भी हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार का बलात्कारी बाबा से मोहभंग नहीं हो रहा था । हरियाणा सरकार के मंत्री बाबा के गुंडों की तारीफों के पुल बांध रहे थे । पुलिस के मुखिया सुबह से बार-बार ये कह रहे थे कि हालात पूरी तरह काबू में है । हैरानी की बात तो ये है कि सिरसा समेत हरियाणा के तमाम शहरों में धारा 144 लागू होने के बाद भी रामरहीम सैकड़ों समर्थकों के साथ सौकड़ों गाड़ियों का काफिला लेकर सिरसा से निकला और पुलिस प्रशासन देखता रह गया । सिरसा से लेकर पंचकूला तक बाबा राम रहीम के समर्थक सड़कों पर लाठीडंडे लेकर जमा थे, फिर भी हरियाणा सरकार को लग रहा था कि सबकुछ काबू में है ।

अगर सबकुछ काबू में था तो फिर अचानक हिंसा कैसे भड़क उठी, पंचकूला से जो तस्वीरें सामने आईं वो बेहद हैरान करने वाली थी । बाबा के गुंडों के आगे पुलिस फोर्स भी घुटने टेकती नजर आई । मीडिया कर्मियों को बाबा के गुंडों के बीच छोड़ पुलिस भाग खड़ी हुई। फिर क्या था राम रहीम के गुंडों ने जमकर उत्पात मचाया । सरकार का पूरा फोकस सिरसा पर रहा क्योंकि सिरसा में बाबा का डेरा है, सेना को भी स्टैंडवाय में वहां पहले से रखा गया लेकिन मैदान में उतारा नहीं गया । पहले कहा गया था कि सेना दोपहर 12 बजे फ्लैगमार्च करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ, डीजीपी साहब ने कहा कि सेना को अभी उतारने की जरूरत नहीं, तो क्या सरकार हिंसा का इंतजार कर रही थी या फिर सीएम साबह की बाबा भक्ति प्रशासन की राह में रोड़ा आ रही थी । क्योंकि बीजेपी के मिशन स्वच्छता अभियान में बाबा को पूरा सहयोग था और कुछ दिन पहले खट्टर साहब बाबा के साथ झाड़ू लेकर कदम से कदम मिला रहे थे । अगर बाबा पर भरोसा नहीं था तो हाईकोर्ट की फटकार के बाद भी इतनी ढिलाई क्यों की गई। हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार को निर्देश दिया था कि अगर जरूरत हो तो सेना बुलाइए उसके बाद सेना को बुलाने का फैसला किया गया फिर वक्त पर सेना को तैनात क्यों नहीं किया गया । कहीं ऐसा तो नहीं कि सीएम खट्टर साहब को आर्मी से ज्यादा बाबा के भक्तों पर भरोसा रहा हो ।

हैरानी की बात तो ये है कि जब बलात्कारी बाबा के गुंडे हरियाणा आ रहे थे तो उन्हें पहले क्यों नहीं रोका गया । पहले तो सरकार और प्रशासन ने उन्हें आराम से आने दिया और फिर धारा 144 लगाने का दिखावा करने लगी । जिसका भी कोई खास असर नहीं पड़ा और धारा 144 लगने के बाद भी लाखों समर्थक पंचकूला में जमा हो गए । पुलिस, अर्थसैनिक बल, आरएएफ की कई टुकड़ियां पंचकूला से लेकर सिरसा तक मोर्चा संभाले हुए थी, लेकिन बाबा के भक्तों की संख्या के आगे उनकी संख्या नाकाफी साबित हुई और हुआ वहीं जिसका डर था । हरियाणा की खट्टर सरकार कानून व्यवस्था को संभाल पाने में खटहरा साबित हुई और बलात्कारी बाबा के गुंडे आतंक फैलाने में कामयाब हो गए । हालांकि हाईकोर्ट ने साफ ये जरूर कहा है कि जो भी नुकसान हुआ है उसकी भरपाई डेरा की संपत्तियां बेंचकर की जाएंगी, लेकिन जो जिंदगियां चली गईं उसे कौन लौटाएगा । यही नहीं अभी कितने दिन तक हरियाणा, पंजाब और आसपास की जनता खौफ में जीने को मजबूर रहेगी वो कोई नहीं जानता ।