पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार

गांधी चाहते थे कि इस देश के युवा एक निश्चित लक्ष्य लेकर गांवों में जायें और वहां कुछ सृजनात्मक काम करें. ताकि गांव और देश की स्थितियां बदले, बेहतर हो. इसको लेकर कई युवाओं ने अपने-अपने समय में गांवों में जाकर खूब काम किया. आज भी देश में कई लोग इस तरह के प्रयास कर रहे हैं। बिहार में पिछले कुछ सालों से युवाओं में गांव और ग्रामीण क्षेत्र में जाकर काम करने की अभिरुचि उत्पन्न हुई है। हालांकि अमूमन युवा आपदा के वक्त इस तरह के काम के लिए जुटते हैं, मगर कई लोग लंबे समय से गांव जाकर बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। इन प्रयासों के बारे में जान कर हमारे मन में एक तरह की खुशी का भाव उत्पन्न होता है। स्वाभाविक है कि ऐसे साथियों से मिलकर जानने समझने की भी इच्छा होती है कि वे क्या कर रहे हैं, क्या कोई साझा प्रयास हो सकता है, क्या हम एक दूसरे की मदद कर सकते हैं। यह गांधी की 150 वीं जयंती का साल भी है।

तस्वीर- रामनंदन जी

इसी इरादे से मित्र निराला जी और मुजफ्फरपुर के चंद्रहटी गांव में रहकर आम लोगों के जीवन में बदलाव की कोशिश कर रहे हम सब के वरिष्ठ साथी संजीव भाई के विचारों से एक योजना बनी कि क्यों न बिहार के सभी ऐसे युवा दो दिन के लिए कहीं मिल कर बैठें। बातचीत करें, तारीख प्रसिद्ध गांधीवादी समाजवादी विचारक एवं आंदोलनकर्ता रामनंदन जी की जयंती 15 जनवरी को चुनी गयी।

काफी विचार विमर्श के बाद मुजफ्फरपुर के चंद्रहटी गांव में स्थित एक आश्रम में जो रामनंदन जी के विचारों पर ही आधारित है, 15-16 जनवरी को मिलने-मिलाने का एक आय़ोजन तैयार हुआ है. लोग चाहें तो दिन में आकर शाम को जा भी सकते हैं, कुछ लोगों के रात को ठहरने की भी व्यवस्था हो रही ह।.

कई गांधीवादी विचारकों से भी निराला जी बातचीत कर रहे हैं कि वे आकर हमलोगों को बतायें कि गांव में और क्या काम हो सकता है, कैसे हो सकता है. गांधी और विनोबा पर लिखने वाले साथी अव्यक्त जी ने सहमति दी है कि वे इस मौके पर 15 को हमारे साथ होंगे. कई साथी जो हमलोगों की नजर में पहले से हैं, उन्हें तो हम बुला ही रहे हैं. अगर आप भी किसी ऐसे युवा साथी को जानते हैं, जो गांधी वादी तरीके से अपने इलाके में, बिहार में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं तो हमें रिकमेंड करें. हम उन्हें सादर आमंत्रित करेंगे।

आयोजन स्थल पर उनके ठहरने, भोजन आदि का इंतजाम होगा, मुजफ्फरपुर उन्हें चंद्रहटी लाने की भी व्यवस्था की योजना बन रही है. वैसे यह जगह मुजफ्फरपुर-हाजीपुर मुख्य मार्ग से सिर्फ दो किमी ही दूर है. आने-जाने की व्यवस्था खुद करनी होगी. यह कुछ लोगों का एक छोटा सा प्रयास है, आशा है इसे आपका सहयोग और मानसिक संबल मिलेगा

तस्वीर- रामनंदन जी की है. यह चन्द्रहटी के आश्रम में लगी है।