अरुण यादव

फेसबुक पर सर्च करते वक्त अचानक एक तस्वीर पर नजर टिक गई । जिसमें एक शख्स हाथ में तख्ती लिए हुए है और उस पर लिखा है हर 6 करोड़ की आबादी पर एक एम्स । यानी जिस दौर में लोग आरक्षण या फिर दूसरी बातों के लिए अनशन करते नजर आते हैं उस दौर में कोई स्वास्थ्य के लिए अनशन कर रहा हो तो उससे बेहतर समाज में और क्या हो सकता है । ये तस्वीरें वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश जी ने साझा करते हुए अपने फेसबुक वॉल पर लिखा है—

 

हमने-आपने अच्छे और बुरे अनेक डॉक्टर देखे होंगे। दिल्ली के एम्स(AIIMS) में हमने कई डाक्टरों को जनता के पक्ष में शासन से टकराते भी देखा है। पर हम और आप अक्सर अपने आसपास ऐसे डाक्टर देखते हैं, जिनका मकसद रोगियों को रोगमुक्त करने से ज्यादा अपने लिए अकूत धन कमाना है।पर आज आपको एक ऐसे डॉक्टर से मिलवा रहा हूं, जो अपने प्रमोशन, अपने निजी कारोबार या अपने किसी स्वार्थ के लिए नहीं, जनता के सवाल को लेकर शांतिपूर्ण-सत्याग्रह कर रहा है। ये हैं: पूर्वांचल के जाने-माने ह्रदय-रोग विशेषज्ञ और BHU स्थित सर सुंदरलाल अस्पताल के लोकप्रिय डाक्टर ओमशंकर। देश भर में बेहतर स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने और वाराणसी सहित देश के दर्जनों स्थानों पर नया ‘एम्स’ बनाने की मांग को लेकर डॉ शंकर इन दिनों बनारस में अनशन कर रहे हैं। मेरा इन्हें पूरा समर्थन और शुभकामना है

डॉक्टर ओम शंकर के अनशन का दूसरा दिन है । वो रविवार से बीएचयू सिंह द्वार पर अनशन पर बैठे हैं और उनका कहना है कि जब तक वाराणसी में एम्स बनाने की घोषणा नहीं हो जाती उनका अनशन जारी रहेगा । ऐसा नहीं है कि उनकी मांग सिर्फ वाराणसी में एम्स खोलने तक सीमित है बल्कि उनकी मांग है कि देश में हर 6 करोड़ की आबादी में एम्स होना चाहिए । इस हिसाब से यूपी में कम से कम 3-4 एम्स होना जरूरी है । या यूं कहें की हर राज्य में कम से कम एक एम्स जरूरी है । खास बात ये है कि ये वाराणसी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र है । डॉक्टर ओमशंकर के अनशन को वाराणसी के शिक्षाविदों, वकीलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिल रहा है और बड़ी संख्या में लोग उनके साथ खड़े हो रहे हैं । ऐसा नहीं है कि डॉक्टर ओम शंकर अचानक एम्स की मांग को लेकर अनशन पर बैठ गए हों, ओमशंकर लंबे वक्त से एम्स की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे थे, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र होने पर भी लंबी लड़ाई के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई तो मजबूर होकर डॉक्टर ओमशंकर को अनशन पर बैठना पड़ा है ।

 है प्रमुख मांग ?

वाराणसी में BHU से अलग एम्स खोला जाए ।

यूपी में कम से कम 6 एम्स खोला जाएगा ।

यूपी में 24 सुपर स्पेशियलिटी सेंटर की स्थापना

देश में हर 6 करोड़ की जनसंख्या पर एक एम्स खुले।

केंद्र और राज्यों के कुल बजट का कम से कम 10 फीसदी स्वास्थ्य के लिए निर्धारित किया जाए

सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों को एम्स की तरह विकसित करने की राष्ट्रीय नीति बनाई जाए ।

वैसे केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकारों का जब बजट पेश होता है तो सबसे कम पैसा स्वास्थ्य और शिक्षा पर ही खर्च किया जाता है । जबकि ये दोनों आम जनता के लिए बेहद जरूरी हैं। ऐसे में डॉ. ओमशंकर की पहल का ना सिर्फ समर्थन करना चाहिए बल्कि शिक्षा के लिए भी ऐसे ही प्रयास करने की जरूरत है ।