बदलाव के लिए अरुण प्रकाश की रिपोर्ट

पूरी दुनिया कोरोना संकट से जूझ रही है। अलग-अलग देश अपन-अपने तरीके से इससे निपटने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं । दक्षिण कोरिया कोरोना टेस्ट किट और दूसरे उपायों के जरिए कोरोना पर काबू पाने की कोशिश में जुटा है तो चीन, इटली जैसे सुविधा संपन्न देश लॉकडाउन के सहारे इस महामारी को बढ़ने से रोकने की जुगत में हैं। हिंदुस्तान में भी लॉक डाउन हो चुका है। कर्फ्यू से लड़ने के लिए पूरा देश 21 दिन तक लॉकडाउन रहेगा। लिहाजा कोरोना की चेन को किस हद तक रोकने में हम कामयाब होते हैं इसके लिए थोड़ा इंतजार करना पड़ेगा, लेकिन इस बीच लॉकडाउन से निपटने के लिए जो चुनौतियां सरकारों के सामने आई हैं वो भी कम नहीं हैं । लोगों के सामने जो सबसे बड़ा संटक आने वाला है वो है खाने-पीने के सामानों का ।

पिछले 24 घंटे में कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं जो लॉकडाउन को पूरी तरह धता बताती दिखीं और इसके लिए लोग आम जनता को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं । सवाल ये है कि अगर आपके पड़ोस में सब्जी मार्केट लगता है तो भला कौन ऐसा है जो सब्जी खरीदने नहीं निकलेगा और ये कैसे पता चलेगा कि मार्केट में अभी भीड़ कितनी है और ये भी सच है कि ओपन मार्केट में भीड़ पर कंट्रोल करना आसान नहीं होगा जिससे एक नई चुनौती से जूझना पड़ेगा । इसके लिए सबसे अच्छा तरीका यही है कि कॉलोनियों की दुकानें खुली रखी जाएं और कीमतों को कंट्रोल में रखा जाए जिससे कॉलोनी के बाहर मार्केट में खुली दुकानों पर ज्यादा भीड़ ना हो और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन भी हो सके ।

मैं दिल्ली के मयूर विहार फेस 3 में रहता हूं, दिनभर घर में लॉक रहने के बाद शाम करीब 6 बजे घर से बाहर निकला । मुझे भी कुछ सामान लेना था, लिहाजा कॉलोनी के गेट के बाहर तक गया। मुझे लगा कि बाहर दुकानें नहीं खुली होगी, लेकिन कॉलोनी के भीतर लॉकडाउन से पहले जो रोशन और सब्जी की दुकानें खुलती थी खुली मिलीं । लिहाजा मैंने कॉलोनी से बाहर करीब 200 मीटर की दूरी पर मेन मार्केट में राशन की दुकानों का जायजा लेने का फैसला किया। कॉलोनी के गेट से निकलकर थोड़ी दूर इंदिरा मार्केट के कॉर्नर तक गया, वहां पहले भी फलों के ठेले लगे रहते थे और आज भी लगे दिखे । कुछ ठेलेवाले मास्क और हाथ में ग्लब्स लगाए हुए थे लेकिन कुछ का ग्लब्स बेहद गंदा और फटा हुआ था लिहाजा मैंने उसको ऐसे ग्लब्स ना पहनने की सलाह दी, बोला भाई आप ज्यादा लोगों के संपर्क में आते हैं लिहाजा आपको अपनी हिफाजत भी करनी है। दुकानदार मेरी बात से सहमत तो दिखा लेकिन शायद गंभीरता से नहीं लिया। ऐसा मुझे उसके हावभाव से नजर आया ।

सामने ही थोक मार्केट है, मार्केट में थोड़ी चहल-पहल दिखी, राशन की कुछ दुकानें भी खुली थी, लेकिन बाकी दुकानें बंद थी, थोड़ा आगे बढ़ा तो मेडिकल स्टोर की लाइट जलती दिखी लिहाजा मैं आगे बढ़ते हुए मेडिकल स्टोर तक पहुंच गया। मेडिकल स्टोर पर काउंटर के बाहर रस्सी के सहारे लक्ष्मण रेखा खींच दी गई थी और लोगों को उचित दूरी बनाकर एक-एक कर आगे आने को कहा जा रहा था, मेडिकल स्टोर का एक कर्मचारी वहां आने वाले हर शख्स को पहले सैनिटाइजर से हाथ साफ करने के लिए देता और फिर दूरी बनाकर खड़े होने की अपील करता। अच्छा लगा मेडिकल स्टोर वाले नियमों का अच्छी तरह से पालन कर रहे हैं। हालांकि राशन की दुकानों पर आने-जाने वाले इन नियमों को पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं, वैसे राशन की दुकानों पर आम दिनों के मुकाबल भीड़ भी न के बराबर दिखी।

जैसे ही मैं मेडिकल स्टोर से वापस निकल रहा था तभी एक पुलिसवाले भाई साहब बाइक से सामने से आते दिखे। मास्क भी पहने हुए थे, लेकिन बाइक पर एक और शख्स को बैठाए हुए थे, मैंने फोटो खींचने की कोशिश की लेकिन साफ नहीं आई । हमें ऐसी गलती करने से बचना होगा ।

मार्कट से होते हुए अब मैं वापस कॉर्नर पर आ चुका था, तभी देखा अचानक एक गुमटीनुमा दुकान के बाहर पांच-6 लोग खड़े दिखे। एक शख्स से मैंने पूछा यहां कुछ हुआ क्या,तो जवाब मिला नहीं कुछ नहीं। लेकिन मेरी उत्सुकता और बढ़ गई कि आखिर दुकान बंद है फिर लोग रोड पर क्यों खड़े हैं । लेकिन अगले ही पल जैसे ही गुमटी थोड़ी खुली माजरा समझ आ गया । ये पान-गुटखा की दुकान थी और लोग पान-गुटखा और सिगरेट लेने के लिए वहां खड़े थे । शायद ये लोग पुलिसवालों का वेट कर रहे थे कि वो यहां से जाएं तब दुकान से खुलवाकर गुटखा सिगरेट लिया जाए । लेकिन सवाल ये है कि फिर लॉकडाउन का क्या मतलब है जब हम और आप उसकी धज्जियां उड़ाने में जुटे हों । ये पाबंदी हमारे आपके लिए है अगर हम आप उसका पालन नहीं करेंगे तो जिंदगी के साथ खिलवाड़ होगा और प्रशासन की मुश्किलें भी बढ़ेंगी ।

फिलहाल लॉकडाउन के पहले दिन हमारे इलाके में जरूरी सामानों की दुकानें खुली रहीं, इसलिए लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है । आप आराम से जब बहुत जरूरी हो तभी सामान लेने के लिए घर से निकले । कोशिश करें कि दिन में एक बार से ज्यादा ना निकलें । घर का एक ही सदस्य सामान लेने जाए और कोशिश करे कि जो बेहद जरूरी हो वो सामान एक बार में ही लेकर आए जिससे बार-बार जाकर दुकान पर भीड़ ना लगे। चूंकि आपके मोहल्ले की दुकानें भी खुल रही हैं इसलिए आपको ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं है। दिल्ली सरकार ने लोगों को भरोसा दिया है कि आपके मोहल्ले में राशन की जो दुकानें पहले खुलती थी वो खुलती रहेंगी। उसी तरह सब्जी और दूध की दुकानें भी खुलती रहेंगी। अगर आपके घर में खाने-पीने का सामान है तो फिर चिंता किस बात की । संयम और धैर्य से काम लें । बाहर ना निकलें ।

हां चिंता उन लोगों की जरूर है जो दिहाड़ी मजदूर हैं सड़क किनारे सोने वाले हैं । ऐसे लोगों के लिए राज्य और केंद्र सरकारों को मिलकर जल्द से जल्द उचित इंतजाम करने होंगे, लेकिन तब तक हमें और आपको भी कोशिश करनी होगी कि आसपास जो गरीब रहता हो वो भूखा ना सोने पाएं ।