टीम बदलाव

मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार और शासन की लापरवाही ने 150 से ज्यादा मासूमों की जान ले ली, बिहार में शुरू हुई बारिश इस आपदा के बीच थोड़ी राहत जरूर लेकर आई है, लेकिन उन परिवारों का दर्द कम नहीं हो सकता, जिन्होंने अपने कलेजे के टुकड़े दम तोड़ते हुए देखा है, फिर भी यहां एक बात हम सभी के लिए जाननी जरूरी है कि अगर कुछ युवा साथी आगे ना आए होते तो शायद ये मौत का आंकड़ा और भी बढ़ सकता था, लिहाजा उनका जिक्र भी जरूरी है, इन तस्वीरों में जो लोग नजर आ रहे हैं वो मुजफ्फरपुर के लिए देवदूत बनकर आए पिछले करीब 8 दिन से ये लोग मुजफ्फरपुर में डेरा डाले हुए हैं और चमकी बुखार को लेकर ना सिर्फ जागगरुकता फैला रहे हैं बल्कि चमकी और बच्चों को ना लील ले इसके लिए गरीब तपके के बच्चों में ग्लुकोज समेत जरूरी सामग्री भी बड़े पैमाने पर घर घर जाकर वितरित करने में मदद की ।

इनके चेहरों में उन सबकी छवि भी है जो परदे के पीछे हैं या आपना हिस्सा करके आगे बढ़ गए। सबका नाम याद नहीं। ये इतने ही नहीं हैं। तमाम ऐसे भी साथी हैं जो चुपचाप आकर मदद में जुटे रहे, इस तस्वीर ये जो साहब गाड़ी में आगे बैठे हैं वो हैं हृषिकेश शर्मा। 17 तारीख से लगातार मुजफ्फरपुर में हैं, वहां पहुंचने वाली पहली टीम का हिस्सा हैं और जिन चंद लोगों ने इस जागरुकता अभियान का मॉडल गढ़ा है, वे उनमें से हैं। काफी खुशमिजाज हैं। दो दिन पुरानी इस तस्वीर में भी देखिये वे एक बुखार से पीड़ित बच्चे के परिवार को अस्पताल पहुंचा रहे हैं। आज खबर आई है कि पत्रकारिता के श्रेष्ठ संस्थान IIMC में रेडियो जर्नलिज़्म और हिन्दी पत्रकारिता में एंट्रेंस में इनका चयन हो गया है। अभी इंटरव्यू होना है, उम्मीद है वह भी ये निकाल लेंगे। इन्हें शुभकामनाएं दीजिये।

यह तस्वीर देखिये। आपको स्वयंसेवकों की भीड़ में हाथ बांधे कार्टूनिस्ट पवन दिख रहे होंगे। साथियों ने बताया कि वे भी दो दिन से यहां रह कर जागरुकता का काम कर रहे हैं। कल लौट गये। चुपचाप अपना योगदान देना शायद इसी को कहते हैं। सीखने वाली बात है। ऐसे ही एक दो नहीं करीब 200 साथी देश के अलग अलग हिस्सों से हमारी टीम की मदद कर रहे हैं, कोई आर्थिक सहायता दे रहा है तो कोई श्रमदान कर रहा है, मुजफ्फरपुर इनके योगदान को हमेशा याद रखेगा ।

मनीष, मोहित और प्रिंस के साथ एक टीम एसकेएमसीएच में है।  मनीष हॉस्पिटल के वार्ड के चक्कर लगा रहे थे। उन्होंने कई जगह गंदगी देखी। अस्पताल के कर्मचारियों से बात की पर वो टाल मटोल करते दिखे।  बस पूरी टीम ने झाड़ू उठाया और लग गए सफाई अभियान में। हालांकि जब हमारे साथ सफाई करने लगे तो अस्पताल के सफाईकर्मी भी मदद के लिए आ खड़े हुए ।

अस्पताल के बाहर दो टाइम खाना खिलाया जा रहा है। दोपहर में और शाम में। मरीज़ के परिजनों के लिये यह व्यवस्था की गई है। तकरीबन 6 सौ के करीब लोग सुबह शाम खा ले रहे हैं। सुबह खिचड़ी और शाम को आलू परवल सब्जी और दाल चावल। ले दे के मदद तो हो ही जा रही होगी। हमारे साथी  इसी तरह अपने अपने तरीके से मदद पहुंचा रहे हैं, जो मुजफ्फरपुर नहीं आ सके उन्होंने आर्थिक सहायता पहुंचाकर इन साथियों का काम थोड़ा आसान करने में मदद की, अब तक जो राशि खर्च की गई है उसका व्यौरा भी इन साथियों ने फेसबुक पर साझा किया है, फिलहाल टीम के तमाम साथी अब भी मुजफ्फरपुर में डटे हुए हैं, राहत की बात ये है कि इनकी मेहन और मौसम की मेहरबानी से शनिवार को एक भी बच्चा अस्पताल में भर्ती होने नहीं आया, लिहाजा इन साथियों की मुहिम फिलहाल जारी है, मुजफ्फरपुर के इन देवदूतों को सलाम कीजिए ।