Archives for बिहार/झारखंड - Page 3

बिहार/झारखंड

जब मैंने पहली बार कर्पूरी ठाकुर को देखा और सुना

ब्रह्मानंद ठाकुर साल तो ठीक याद नहीं, शायद 1964-65 रहा होगा। मैं अपने गांव के बेसिक स्कूल में छठी कक्षा का विद्यार्थी था। नवम्बर का महीना था। मौसम भी खुशगवार।…
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नरसिम्हा राव से लेकर मोदी तक सवर्ण आरक्षण और राजनीति

सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में अब सवर्णों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा । अब तक आरक्षण का फायदा SC, ST और OBC को मिल रहा था, कुछ राज्यों…
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खुशहाली के ख्‍वाब और ‘रेगिस्‍तान’!

फाइल फोटो- साभार गूगल दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभार ‘डियर जिंदगी’ को देशभर से पाठकों का स्‍नेह मिल रहा है. हमें हर दिन नए अनुभव, प्रतिक्रिया मिल रही…
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मेरा बचपन और मेरा गांव

ब्रह्मानंद ठाकुर होश संभालते ही देखा  शीशम के खम्भे पर टिका फूस का घर । बाहर से टाटी से घिरे घर के दरबाजे पर शीशम के मोटे तख्ते  से बनी…
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अन्नदाता के लिए आखिर संसद का विशेष सत्र क्यों नहीं ?

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार मेरा रिपोर्टर-मन नहीं माना! दो दिन से तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी पहुंच गया संसद मार्ग! किसानों से…
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अगिला बार ढेर दिन खातिर अईह

अखिलेश्वर पांडेय तस्वीर सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार कम पानी वाले पोखर की मछलियां  दुबरा गयीं हैं ऊसर पड़े खेतों की मेढ़ें रो रही हैं बेरोजगार लड़कों का पांव मुचक…
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विकास में पिछड़ते गांव और बढ़ता आर्थिक असंतुलन

शिरीष खरे विशेष तौर पर सत्तर के दशक में गांवों के लिए कई परियोजनाएं और कार्यक्रम चलाए गए। इसके पीछे के कारण में जाएं तो इस समय तक यह सोचा…
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हाइब्रिड बीज का मायाजाल और किसानों की दुर्दशा

सांकेतिक तस्वीर ब्रह्मानंद ठाकुर मनकचोटन भाई के दलान पर सांझ होते ही हमेशा की तरह  आज भी टोला के लोगों का जुटान होने लगा। परसन कक्का और बटेसर भाई भी  साथ…
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 टीस भरा बचपन

वीरेन नन्दा बचपन की यादों में लौटना केवल वही चाहते खोना  बचपन के दिन ममता में जिनके बीते  समता में बीते जिनके बचपन के दिन जेम्स चूसते बीता जिनका बचपन सोफे…
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सुकराती पर्व की सोन्ही यादें और बैलों की घंटी का संगीत 

ब्रह्मानंद ठाकुर इस दुनिया मे चिरंतन ,शाश्वत और अपरिवर्तनशील कुछ भी नहीं है। वस्तुजगत का कण - कण परिवर्तनशील है। मूल्य, मान्यताएं, आस्था, धर्म, विश्वास, नीति-नैतिकता और परम्परा भी इस…
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