Archives for बिहार/झारखंड - Page 2

बिहार/झारखंड

स्वतंत्र पत्रकारिता के नए प्रयोग पर निकल पड़ा है पथिक पुष्यमित्र

फाइल फोटो देश में चुनाव आने वाला है। सरकार अपना गुणगान करने में लगी है और विपक्ष सवाल उठाने में जुटा है । ऐसे में मीडिया का रोल अहम हो…
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बिहार/झारखंड

विकास के दावों के बीच पानी ढोना ही जहां ज़िन्दगी है !

विकास के बड़े दावों के बीच देश के आदिवासी क्षेत्रों में पानी के रंग कुछ ऐसे है। ये आदिवासी किसान रोजमर्रा की ज़रूरत को कोसों पथरीली सड़क पर नंगे पांव…
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गांव के नायक

घर में खुशियां आने वाली है… पिता को समझ नहीं आया बहू से क्या बताऊं ..?

भागलपुर, बिहार: शहीद रतन ठाकुर की तस्वीर के साथ पिता। वे गांव में रहते थे। साधारण किसान थे। वक़्त बदला तो अहसास हुआ कि परिवार की जिंदगी बदलनी है। शहर…
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बिहार/झारखंड

राजगीर की प्राकृतिक छटा और टमटम की सवारी

 पुष्यमित्र राजगीर का घोड़ाकटोरा झील, मानसरोवर नहीं है, न ही सिक्किम के नाथुला इलाके में बसा छांगू लेक। मगर जनवरी के इस आधे कंपकपाते आधे सुलगते दिन में जब आप…
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बिहार/झारखंड

जब मैंने पहली बार कर्पूरी ठाकुर को देखा और सुना

ब्रह्मानंद ठाकुर साल तो ठीक याद नहीं, शायद 1964-65 रहा होगा। मैं अपने गांव के बेसिक स्कूल में छठी कक्षा का विद्यार्थी था। नवम्बर का महीना था। मौसम भी खुशगवार।…
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बिहार/झारखंड

नरसिम्हा राव से लेकर मोदी तक सवर्ण आरक्षण और राजनीति

सरकारी नौकरियों और शिक्षा संस्थानों में अब सवर्णों को भी 10 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा । अब तक आरक्षण का फायदा SC, ST और OBC को मिल रहा था, कुछ राज्यों…
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बिहार/झारखंड

खुशहाली के ख्‍वाब और ‘रेगिस्‍तान’!

फाइल फोटो- साभार गूगल दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभार ‘डियर जिंदगी’ को देशभर से पाठकों का स्‍नेह मिल रहा है. हमें हर दिन नए अनुभव, प्रतिक्रिया मिल रही…
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मेरा बचपन और मेरा गांव

ब्रह्मानंद ठाकुर होश संभालते ही देखा  शीशम के खम्भे पर टिका फूस का घर । बाहर से टाटी से घिरे घर के दरबाजे पर शीशम के मोटे तख्ते  से बनी…
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अन्नदाता के लिए आखिर संसद का विशेष सत्र क्यों नहीं ?

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार मेरा रिपोर्टर-मन नहीं माना! दो दिन से तबीयत कुछ ठीक नहीं लग रही थी, फिर भी पहुंच गया संसद मार्ग! किसानों से…
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अगिला बार ढेर दिन खातिर अईह

अखिलेश्वर पांडेय तस्वीर सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार कम पानी वाले पोखर की मछलियां  दुबरा गयीं हैं ऊसर पड़े खेतों की मेढ़ें रो रही हैं बेरोजगार लड़कों का पांव मुचक…
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