Archives for बिहार/झारखंड - Page 10

बिहार/झारखंड

भुईली के ‘रायबहादुरों’ ने दिल्ली में लिया बड़ा संकल्प

संजीव कुमार सिंह भुईली के साथियों का दिल्ली में मिलन। सिर मुड़ाते ही ओले पड़ने की कहावत खूब सुनी है, लेकिन इस बार अपने अरमानों पर ओले पड़े। 26 जनवरी…
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बिहार/झारखंड

फूस की झोपड़ी में छिपा कोसी का दर्द

फोटो- अजय कुमार पुष्यमित्र कोसी के तट पर बसे लोगों का दर्द वही समझ सकता है जो या तो वहां रहता हो या फिर वहां के लोगों को के दर्द…
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बिहार/झारखंड

मुजफ्फरपुर के किसानों की उम्मीदों पर ‘पाला’ मार गया

ब्रह्मानंद ठाकुर पूरा उत्तर भारी पिछले 15 दिनों से भीषण ठंड की चपेट में है । पहाड़ों पर हो रही भारी बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों में भी देखने को…
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चौपाल

‘शिक्षा के दंगल’ में बिहार की बेटियां गुजरात पर भारी

ब्रह्मानंद ठाकुर बालिका शिक्षा के मामले बाईब्रेन्ट गुजरात की असलियत क्या है, यह आ़ंकड़े बता रहे हैं। जहां बिहार ने पिछले 10वर्षों में बालिका शिक्षा के क्षेत्र में ऊंची छलांग…
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बिहार/झारखंड

कितने पत्रकारों की हत्या के बाद जागेगी सरकार?

पुष्यमित्र घुमक्कड़ पत्रकारिता की अपनी नौकरी की वजह से अक्सर ग्रामीण क्षेत्र के पत्रकार साथियों से मिलना-जुलना होता रहता है। कुछ साथियों के घर भी चला जाता हूँ। पिछले दिनों…
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बिहार/झारखंड

एक महान साहित्यकार की दम तोड़ती विरासत !

ब्रह्मानंद ठाकुर मुज़फ्फरपुर जिले के औराई प्रखण्ड में आने वाले जनाढ पंचायत का एक गांव है बेनीपुर जो समाजसेवी, पत्रकार और साहित्यकार बेनीपुरी के नाम पर पड़ा है । 23…
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बिहार/झारखंड

पटना में प्रकाशोत्सव की रौनक

पुष्यमित्र पटना साहिब दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है । हर तरफ प्रकाशोत्सव की तैयारियां चल रही हैं । आखिर गुरु गोविंद सिंह की 350वीं वर्षगांठ जो है ।…
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बिहार/झारखंड

8 घंटे की नौकरी और पगार महज 42 रुपये

ब्रह्मानंद ठाकुर मुंशी प्रेमचंद की कहानी सद्गति का किरदार घासीराम हो या फिर रामवृक्ष बेनीपुरी के ‘कहीं धूप कहीं छाया’ का 'बाबू साहेब’ दोनों तत्कालानी सामंतवादी सोच के वाहक थे…
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परब-त्योहार

मधेपुरा में सोशल मीडिया पर बड़ी बहस

रूपेश कुमार सोशल मीडिया जनक्रांति का सशक्त माध्यम है। जिस गति से समाज बदल रहा है उसमें सोशल मीडिया की भूमिका अहम है। समाज का हर वर्ग इस पर क्रेंदित है।…
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खुद खाली पेट और वो चलाते हैं ‘एक रोटी अभियान’

पुष्यमित्र दुनिया अच्छे लोगों से खाली नहीं हुई है। दिलचस्प बात यह है कि आप महानगर छोड़ कर बाहर निकलें आपको ऐसे लोग कदम-कदम पर मिल जाते हैं। ऐसे ही…
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