Archives for सुन हो सरकार - Page 3

आईना

अदालतों में फ़ैसले होते हैं, इंसाफ़ हो यह ज़रूरी नहीं

राकेश कायस्थ जस्टिस सावंत सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस पी.वी. सावंत ने आजतक को जो इंटरव्यू दिया है, उसमें बहुत सी बातें गौर करने लायक हैं। जस्टिस सावंत का…
और पढ़ें »
आईना

सुकून का कहीं कोई वाई फाई नेटवर्क नहीं!

सच्चिदानंद जोशी मैं जैसे ही उस रिसोर्ट में दाखिल हुआ अचंभित रह गया। शहर से इतने पास, लेकिन शहर के कोलाहल से दूर, इतनी सुंदर जगह की तो मैंने कल्पना…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

सुहाग की रक्षा के लिए संतान का सौदा क्यों?

साभार- एएनआई ब्रह्मानंद ठाकुर हमारा समाज और सरकार देश को किस ओर ले जाना चाहता है, आज के दिनों में ये एक बड़ा सवाल बना हुआ है । पिछले कुछ…
और पढ़ें »
चौपाल

किसके डर की अभिव्यक्ति है भीमा-कोरेगांव की घटना

ब्रह्मानंद ठाकुर जहां तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सिरे से नकारते हुए अंधविश्वास, कूपमंडूकता  और अतार्किक मानसिकता को बढावा देकर आर्थिक और सामाजिक विषमता की खाई चौड़ी करने में ही…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

बहू अंजलि ग्रेजुएट हो गई!

मिथिलेश कुमार राय सवेरे जब मैं काम पर निकल रहा था, माँ बोली कि मिठाई लेते आना। कल शुक्रवार है। थान पर चढ़ाना है- पतोहू ग्रेजुएट हो गई। जरूर। यह…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

पारदर्शी कैबिनेट में गांधी का चरखा और समय का चक्र

धीरेंद्र पुंडीर “ अगर हमने गांधी को विश्व की शांति के लिए एक मसीहा के रूप में जन-मन तक स्थिर करने में सफलता पाई होती तो United Nations का General…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

जाति न पूछो अपराधी की…

राकेश कायस्थ अगर लालू यादव केवल इसलिए दोषी करार दिये गये क्योंकि उनका नाता पिछड़े समाज से हैं तो फिर ए.राजा और कनिमोड़ी टू जी में कैसे छूट गये? हर…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

गुजरात- NCP, BSP ने क्या वाकई कांग्रेस का खेल बिगाड़ा?

शिरीष खरे गुजरात चुनाव के नतीजों के बाद आंकड़ों के आईने से अलग-अलग विश्लेषक अपनी-अपनी तरह से तस्वीरें दिखा रहे हैं। हर बार की तरह इस बार फिर राज्य के…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

पटाखे धीरे चलाओ, स्क्रीन हिली तो सीटें कम हो जाएंगी!

धीरेंद्र पुंडीर ये जीत का जश्न फीका है, ये हार का स्वाद मीठा है। ये गुजरात की उलटबांसी है। सिर्फ जनता चाणक्य है बाकि सब मुहावरे हैं। करोड़ों के कमलम…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

मीडिया से गांव गायब बताना आंचलिक पत्रकारिता की अनदेखी है

शिरीष खरे क्या मीडिया से गांव गायब हो गए हैं? जवाब है- हां। यदि कोई एक जगह से एक जगह को उल्टा होकर लगातार इक टक देखे जा रहा हो…
और पढ़ें »