Archives for सुन हो सरकार - Page 24

आईना

यात्रीगण, सीमांचल ‘सुपर-लेट’ का कोई टाइम टेबल नहीं है!

पुष्यमित्र चार अगस्त की रात 11 बजे पटना जंक्शन पर कुछ यात्री दिल्ली से आने वाली सीमांचल सुपरफास्ट एक्सप्रेस का इन्तज़ार कर रहे थे। एक डेढ़ घंटे बाद यह ट्रेन…
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मेरा गांव, मेरा देश

तेज़ाब में घुली और पिघल गई उनकी ‘आज़ादी’

पुष्यमित्र  अपनी बहन सोनम के साथ मनेर की चंचल. जिसने मुकदमा लड़ कर देश भर की तेजाब पीड़िताओं को हक दिलाया. पिछले दिनों वैशाली में एक तेजाब पीड़िता की खुदकुशी…
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चौपाल

गांव की कब्र पर बनेंगे स्मार्ट शहर, पढ़ लो मर्सिया

नरेंद्र अनिकेत संघ के सर्वेसर्वा मोहन भागवत ने इंदौर के तथाकथित आध्‍यात्मिक नेता (जैसा कि संघ और भाजपा अपने आपको और अपने गढ़े गए समर्थकों के बारे में प्रचारित करते…
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प्रमाण पत्र सही, सत्यापन ‘ग़लत’… हम तो जेल में डालेंगे

दलितों के रहनुमा बैजू राम का साथ कब देंगे? फोटो- पुष्यमित्र पुष्यमित्र बैजूराम पर आठवीं के सर्टिफिकेट के सत्यापन में जालसाजी का आरोप है। मतलब यह कि नौकरी पक्की कराने…
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गौ-रक्षा पर पीएम के ‘विस्फोट’ का वेलकम!

संदीप सिंह ‘गौ-रक्षा की दुकानें’ चला रहे लोगों पर प्रधानमंत्री मोदी का ग़ुस्सा खुलकर सामने आया है। मोदीजी के अनुसार इनमें से अधिकांश असामाजिक तत्व हैं जो रात में आपराधिक…
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पंजाब में हर महीने एक टोल नाके पर डेढ़ करोड़ की लूट !

पंजाब में टोल टैक्स के साथ 50 रुपए जजिया टैक्स विनोद कापड़ी संभव हो तो इस पोस्ट को ज़्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाएँ ताकि ये लूट रोकी जा सके।…
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बाढ़ के पानी और बिहार के ‘हाहाकार’ की कहानी

पुष्यमित्र सरहसा के सलखुआ अंचल की तस्वीर। फोटो- अजय कुमार कोसी बिहार। इन दिनों वाल्मिकीनगर से लेकर किशनगंज के कोचाधामन तक उत्तर बिहार का हर इलाका बाढ़ के पानी में…
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रोपिया तो हो गईल लेकिन अब पानी नइखे

गोरखपुर में धान की रोपाई। फोटो- दीपक तिवारी सत्येंद्र कुमार यादव माता-पिता के पास मैं रोजाना फोन करता हूं। लेकिन जिस दिन साप्ताहिक छुट्टी रहती है उस दिन रिश्तेदारों से…
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गिर ना पड़े शिवराज की ‘सवारी’

शिरीष खरे गणेश पाटीदार को मध्य-प्रदेश केभोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर बड़वानी पहुंचने में कोई 8 घंटे का सफर तय करना चाहिए, लेकिन सफर 12 घंटे से भी ज्यादा…
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आदिवासियों की उपेक्षा कब तक ?

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के गायडबरी गांव की महिलाएं। सत्येंद्र कुमार यादव अगर हम सवाल करें कि दिल्ली में बैठे पत्रकार आदिवासियों के बारे में कितना समझते हैं तो शायद…
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