Archives for सुन हो सरकार - Page 22

मेरा गांव, मेरा देश

सोती कौम के नायक कांशीराम

पीयूष बबेले 90 के दशक का वह दौर जब एक बच्चे ने दलितों की जिजीविषा को राजनैतिक आंदोलन का रूप लेते देखा। घर से दफ्तर के लिए निकला तो सड़क…
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मेरा गांव, मेरा देश

फकीरा खड़ा बाज़ार में…मांग रहा है वोट

राकेश कायस्थ मांगना अच्छा है या बुरा? यह निर्भर इस बात पर है कि मांगा क्या जा रहा है। उदाहरण के लिए वोट मांगना अच्छा है लेकिन भीख मांगना बुरा,…
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मेरा गांव, मेरा देश

काश ! एक माइक जनता की तरफ भी होता…

आशीष सागर दीक्षित (फेसबुक वॉल से) '' तुम बतलाते रहे अपने काम के नजराने इस कदर अखिलेश, कि एक हम मैदान में जार-जार रो रहे थे... '' मुख्यमंत्री अखिलेश यादव…
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सुन हो सरकार

क़ातिलों देख लो जिंदा हैं कॉमरेड नागेन्द्र!

18 फरवरी 1994 को मेजर नागेन्द्र प्रसाद की आतताईयों ने हत्या कर दी थी। तब मैं आईपीएफ बोकारो जिला का अध्यक्षऔर मेजर नागेन्द्र प्रसाद उपाध्यक्ष थे। हम दोनों के नेतृत्व…
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माटी की खुशबू

विकास की आपाधापी में दम तोड़ती नैतिकता

ब्रह्मानंद ठाकुर आज हमारा गांव विकास के इस आपाधापी में अतीत के तमाम उच्च नैतिक मानदंडों को बड़ी तेजी से खोता जा रहा है। सम्पूर्ण युवा पीढी अपसंस्कृति की जाल…
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मेरा गांव, मेरा देश

लोकल चेहरों से क्यों डरती है मोदी-शाह की जोड़ी?

पुष्यमित्र पंजाब, यूपी, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर में चुनावी मौसम। कहीं अखिलेश-राहुल जलवा बिखेर रहे हैं तो कहीं केजरीवाल-भगवंत मान की चर्चाएं होती रही। इन पांचों राज्यों में मोदी-अमित शाह घूम-घूम…
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बिहार/झारखंड

मुद्रा स्कीम में लोन हासिल करना ही बड़ी चुनौती-पीड़ित

'यहां तक आते-आते सूख जाती हैं नदियां, मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा होगा । वैसे तो कवि दुष्यंत ने ये लाइन कई बरस पहले लिखी लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज…
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मेरा गांव, मेरा देश

यूपी को ‘बेस’ पसंद है !

कुमार सर्वेश यूपी चुनाव में सत्ता के लिए बिसात बिछ चुकी है। हर कोई अपने-अपने मोहरे मैदान में उतार चुका है। अखिलेश और राहुल गांधी की युवा जोड़ी के पहले…
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सुन हो सरकार

सरकार ! उनकी तुरबत पर नहीं है एक भी दीया…

जरा याद उन्हें भी कर लो । शहीद अमीर सिंह । ब्रह्मानंद ठाकुर सारा देश 68वां गणतंत्र बड़े उत्साह से मना रहा है । 26 जनवरी 1950 को आजाद भारत…
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चौपाल

‘सरकारी मंडी’ में दम तोड़ता कुटीर उद्योग

नीरज सारांस देश में लोक कलाओं की लंबी परंपरा रही है। लोक कलाएं जीवन का आधार रही हैं, क्योंकि इसके ज़रिए कई पीढ़ी से लोग जीवन यापन कर रहे हैं।…
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