Archives for माटी की खुशबू - Page 9

कीर्ति दीक्षित के उपन्यास ‘जनेऊ’ की पहली झलक

कीर्ति दीक्षित का उपन्यास जनेऊ । बुंदेलखंड के पृष्ठभूमि पर आधारित । सत्येंद्र कुमार यादव मार्च 2009 में ईटीवी न्यूज से जुड़ा। फिर मुझे रायपुर से हैदराबाद जाना हुआ। चूंकि…
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माटी की खुशबू

यात्रीगण, पहलेजा घाट पर अब न ढूंढें पुरानी गंगा

अभया श्रीवास्तव घाट के नाम पर ही बन गया स्टेशन। जहां से कभी स्टीमर चला करते थे, वहां से अब रेल पुल बन गया है। मैं गोरखपुर से पटना  जा…
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रोटियां उनकी थाली में कम, भूखे क्यों तुम ?

फोटो सौजन्य-अजय कुमार, कोसी बिहार जब, तुम खोद रहे होते हो खाई अपने और उनके बीच सिर पर टोकरा लिए वो बना रहे होते हैं पुल। तुम जी लेते हो…
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मैनपुरी का ‘मास्टर्स इन फ्लावर’

दिल्ली के कृषि मेले में फूलों के बीच युवा किसान रवि पाल अरुण यादव बदलाव की बयार कब और कहां से निकलेगी ये कोई नहीं जानता । क्या आप सोच…
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30 साल बाद… अपने कॉलेज में ‘ताका-झांकी’

मुज़फ़्फ़रपुर के एलएस कॉलेज की नई-पुरानी यादें (मैं, ममता और मेरी बेटी ) अजीत अंजुम की फेसबुक वॉल से अतीत बहुत पीछे छूट जाता है । असंख्य चेहरे होते हैं,…
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नौबतपुर का अनोखा रामभक्त

चित्र- रवि वर्मा पुष्य मित्र देश में कभी राम को लेकर वाकयुद्ध चलता है तो कभी भारत माता के नाम पर महाभारत, लेकिन ऐसे लोगों को ना तो राम से…
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चाची के हाथ की मछली खाने की ललक

मनोरमा सिंह ये मिश्रा चाची हैं। बरौनी आरटीएस, में मेरे पड़ोस की चाची। मैथिल और अंगिका बोलने वाली चाची, अपनी पीढ़ी में राजनीतिक रूप से जबरदस्त सचेत महिला हुआ करती…
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तिरंगे के रंग हज़ार

साभार-   तिरंगे के रंग आँखें तभी साफ़ साफ़ देख पाती हैं जब पेट में रोटी होती है, हाथ तिरंगे को तभी मज़बूती से थाम पाते हैं जब उन्हें श्रम…
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पंडितजीका गायन ही देश-राग है

देवांशु झा सन चौरासी की बात है। रेडियो पर दोपहर डेढ़ बजे शास्त्रीय संगीत का कार्यक्रम आता था। स्कूल के छात्रावास से घर आने वाले बड़े भैया उन दिनों शास्त्रीय…
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फागुन के महिना में खेत के खेत खाली डरे… छाती फटत

कीर्ति दीक्षित ‘का बताएं बेटा मर रहे... सब सरकार तो सरकार इसुर तक दुश्मन बनो बैठो किसान को तो , देख लेओ फागुन के महिना में खेत के खेत खाली…
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