Archives for माटी की खुशबू - Page 8

चौपाल

नहीं मिल रही मुद्रा, कैसे बढ़ेगा कारोबार ?

सत्येंद्र कुमार यादव नमस्कार, मैं अपना डी जे साउन्ड का काम शुरु करना चाहता हूँ । इसमें कुल खर्च लगभग 5 लाख रुपये है । इसके लिये मुझे लोन की…
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माटी की खुशबू

आदमी को आदमी बनाने के लिए आंखों वाला पानी चाहिए

चंदन शर्मा हम कैसा समाज बनाना चाहते हैं? जहां प्‍यार के लिए कोई जगह नहीं हो, जहां बस नफरत और हिंसा का पाठ पढ़ाया जाए। हम किसी प्रेमी जोड़े को…
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माटी की खुशबू

विकास की डगर पर बढ़ चला है पैगम्बरपुर गांव

ब्रह्मानंद ठाकुर गांवों के स्याह अंधेरे में रौशनी की एक किरण है मुजफ्फरपुर की पैगम्बरपुर पंचायत। सकरा प्रखण्ड की यह पंचायत विकास की नई इबारत लिख रही है। इसके खाते…
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दूसरे सूबे की ख़बरें

प्रकृति सोशल मीडिया से नहीं चलती !

एक शपथ अपनी धरती के लिए ! कीर्ति दीक्षित इस साल हमने गर्मी में तापमान का उच्चतम् स्तर देखा, सूखे की भयावहता देखी, बूँद बूँद पानी के लिए संघर्ष देखा…
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माटी की खुशबू

‘सर्जरी’ आपने की, दर्द की शिकायत किससे करें?

बैंक के सामने कैश के लिए खड़े ग्रामीण । फोटो- अनिल यादव सत्येंद्र कुमार यादव ये तस्वीर यूपी के देवरिया के लार क्षेत्र की है । नोटबंदी के बाद से…
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बिहार/झारखंड

बिहार के संझौली में एक शौचालय ‘सम्मान’ का

चंदन शर्मा के फेसबुक वॉल से  किसी मकसद को अंजाम देने के लिए किसी का मुंह ताकने से बेहतर है खुद हिम्मत कर आगे बढ़ना। कुछ ऐसी ही मिसाल पेश…
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माटी की खुशबू

एक साहित्यिक आयोजन की ‘सिल्वर जुबली’

कई बार यह विचार आता है कि हम अपनी रोजमर्रा की ज़िंदगी में जनहित और समाजहित के लिए कितना वक्त निकाल पाते हैं। समाज की बुराइयों से लड़ने की अपनी-अपनी…
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माटी की खुशबू

लमही में एक लम्हा ‘प्रेम’ का

अरुण यादव इधर कुछ दिनों से दफ्तर के कामकाज ने इस कदर उलझा रखा था कि समाज और साहित्य दोनों से ही मैं जैसे कटता चला गया। इस बीच ऑस्ट्रेलिया…
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बुंदेलखंड में होती है राक्षस की पूजा

कीर्ति दीक्षित परम्पराएं, custom, rituals जैसे शब्द धरती के किसी भी कोने से खड़े होकर बोलें तो इनकी समृधि में भारत का नाम सबसे पहले आएगा, भारत ही ऐसा देश…
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गांव के रंग

भरत मिलाप, मेला और हमारा बचपन

फोटो- अजय कुमार मृदुला शुक्ला बचपन में दशहरे पर नए कपड़े मिलने का दुर्लभ अवसर आता था । हम सारे भाई बहन नए कपड़े पहन शाम को पापा के साथ…
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