‘मजदूर को मजबूर किया फिर किया बदनाम’

सुनील श्रीवास्तव की फेसबुक वॉल से साभार उसे आप ने शराबकी दुकान पर देखा,उसकी फटी कमीज़ देखी,फटा पैंट भी देखा

और पढ़ें >

क्यों कर रही हो इतना चीं-चीं ?

नीलू अखिलेश कुमार क्यों कर रही हो इतना चीं-चींकिमेरे सारे काम रुक गए हैं ।देखोशाम ढली। तुम्हारे जैसेकितने ही पक्षीलौट

और पढ़ें >

बदलाव के रास्ते ‘उम्मीद की पाठशाला’ का सफर

शिरीष खरे उम्मीद की पाठशाला एक किताब भर नहीं बल्कि एक दस्तावेज है, जिसमें गोवा, महाराष्ट्र, मध्य-प्रदेश और छत्तीसगढ़ के

और पढ़ें >

नौकरी की तेरहवीं

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार आज तेरहवीं हैकोई नहीं हैउसके साथवो अकेले सोच रहा हैअब क्या? उसनेनहीं रखाकोई‘श्राद्ध

और पढ़ें >

ग्रीस मेट्रो में ‘गायब पर्स’ और ‘जय हिंद’ के हिलोरे

सच्चिदानंद जोशी पुणे जाना था। हमेशा की तरह आफिस से निकलते निकलते देर हो गयी। शाम के समय फ्लाइट पकड़ना

और पढ़ें >

विकास की अंधी दौड़ में प्रकृति से दूर होता इंसान

  ब्रह्मानंद ठाकुर गांधी और व्यावहारिक अराजकवाद सिरीज के अन्तर्गत  अभी तक आप विभिन्न अराजकवादी  चिंतकों के विचारों   से अवगत

और पढ़ें >

मुझे कश्मीर में प्लॉट नहीं, कश्मीरी दोस्त चाहिए

पुष्य मित्र आजकल कभी कभी मन होता है कि हर मुद्दे पर क्यों बोला जाये। अपनी राय जाहिर करते रहना

और पढ़ें >

भारतीय समाज का आईना है कुली लाइन्स और माटी माटी अरकाटी

पुष्यमित्र इन दोनों किताबों को एक साथ पढ़ना चाहिये और मुमकिन हो तो पहले कुली लाइन्स को पढ़ना चाहिये फिर

और पढ़ें >

मुजफ्फरपुर के ‘देवदूतों’ से मिलिए

टीम बदलाव मुजफ्फरपुर में चमकी बुखार और शासन की लापरवाही ने 150 से ज्यादा मासूमों की जान ले ली, बिहार

और पढ़ें >

1 2 3 14