Archives for परब-त्योहार

परब-त्योहार

घाटों पर तीन दिन की ‘चांदनी’, फिर अंधेरी रात…

पुष्यमित्र छठ जीवित देवताओं का पर्व है। यह सिर्फ सूर्योपासना का ही पर्व नहीं है, जल धाराओं की उपासना का भी पर्व है। तभी तो पिछ्ले तीन चार दिनों से…
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यह दुनिया माया है

पुष्य मित्र जब तक भारत गांवों का, किसानों का देश था, तब तक दीपावली पर हर घर में लक्ष्मी आती थी। अगहन में जब धान के बोझे खलिहान में उतरते…
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इस पल का कोई मोल नहीं

अखिलेश कुमार के फेसबुक वॉल से साभार बच्चों को कहानियां सुनाने का अपना अलग ही मजा है । फिर से बचपन जीने का मौका लग जाता है । ऐसे मौकों…
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शब्दों की हिंसा फैलाने वालों से भी ‘संवाद’ करना होगा

प्रवीण कुमार लगातार बातों, गरमा-गरम बहसों के दौर मेंसबसे खतरनाक है, सब कुछ सुनकर भी चुप रह जाना ठोस अनुभवों से कह सकता हूं कि हम एक बड़े मंथन के…
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विंध्य की पहाड़ियों में आस्था और पर्यटन का अद्भुत संगम

पुरु शर्मा विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं की रमणीय वादियों की गोद में बसा अलौकिक शक्ति और आस्था का केंद्र करीला धाम। कंकरीट के जंगल और शहर के कोलाहल से दूर, शांतिमय…
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‘संक्राति काल’ में कवि नेमि गाते हैं!

नटरंग प्रतिष्ठान की ओर से तीन दिवसीय नेमि शती कार्यक्रम का दिल्ली में आयोजन। सत्येंद्र कुमार यादव अपनी शर्तों पर चलना आसान नहीं होता। सामाजिक मान्यताओं, धारणाओं को तोड़ना सबके…
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रिवायत- राजधानी में लोक-उत्सव की ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

पशुपति शर्मा रिवायत लोक उत्सव की आयोजक बिंदु चेरुंगथ। आप सपने देखें तो वो सच भी होते हैं। इसी विश्वास के साथ दिल्ली में लोक कलाओं के अपने पहले उत्सव…
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शादी-विवाह में मैथिल संस्कृति की झलक

अरविंद दास वर्षों पहले किसी पत्रिका में एक लेख पढ़ा था- शादी हो तो मिथिला में। जाहिर है, इस लेख में जानकी और पुरुषोत्तम राम की शादी की चर्चा के…
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विएना ओपेरा हाउस की वो शाम

सच्चिदानंद जोशी के फेसबुक वॉल से साभार हमारे रंगकर्म के गुरु प्रभात दा गांगुली जब मूड में होते थे तो वो अपने विदेश में हुए प्रदर्शनों के किस्से सुनाते थे।…
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‘अच्छे दिन’ वाली सरकार का 5 साल बाद ‘साफ नीयत’ का रोना

राकेश कायस्थ चुनावी नारा राजनीतिक दलों के लिए एक भावनात्मक चीज़ भी होता है। नारा यानी वह सबसे अहम बात जिसे आप दिल की गहराई से महसूस करते हैं, इसलिए…
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