Archives for चौपाल - Page 3

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मैया नहीं मालगाड़ी बन गई है नर्मदा

शिरीष खरे जब पहली यात्रा समाप्त होने की कगार पर होती है तो मेरे भीतर दूसरी यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही होती है। यह होती है विचारों की यात्रा।…
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टॉयलेट का फ्लश और आंकड़ों का ‘ओवरफ्लो’?

साजिद अशरफ पीएम मोदी का दावा है कि, बिहार में एक हफ्ते में 8 लाख 50 हजार से ज्यादा शौचालय बनाए गए। अगर ये सच है तो मान लीजिये कि…
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आंदोलनों में हिंसा तो होती है, चौरी-चौरा वाला दम नहीं दिखता

अमित ओझा 5 फरवरी 1922 गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा देश अब अंगड़ाई लेने लगा था।अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ बापू के असहयोग आंदोलन की आग धीरे-धीरे पूरे मुल्क में फैलती…
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खामोशियां… मनमोहन से मोदी तलक

रविकिशोर श्रीवास्तव हज़ार जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी...अगस्त 2012 का वो वक्त... जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब हुए... तो टूजी स्पैक्ट्रेम, कोलगेट जैसे मुद्दों…
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जॉर्डन में जुटे दुनिया के ‘बाल-दूत’

टीम बदलाव छोटू, मुन्नू, बबलू ये कुछ ऐसे नाम हैं जो हम गांव और शहरों में चाय की दुकान या फिर ढाबा जैसी जगहों पर नजर आ जाते हैं, हम…
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विद्रोह समाप्त, अब विद्रोह का माफी-राग!

धीरेंद्र पुंडीर एक के बाद एक माफी का सिलसिला चल निकला। याद है कि इस शख्स ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन कोई मंत्रालय नहीं क्योंकि देश भर…
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प्रभात गांगुली ने क्यों छोड़ा ग्वालियर, ये किस्सा फिर कभी

अनिल तिवारी बीआईसी के मुख्य नाट्य निर्देशक थे सत्य पाल सोलंकी और श्री के सी वर्मा। सोलंकीजी एक नाट्य संस्था और चलाते थे जिसका नाम था- अभिनव कला केन्द्र। इसी…
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बनपुरी के डिजिटल स्कूल बनने की कहानी गजब-दिलचस्प है!

शिरीष खरे बारह साल पहले जब यहां यह स्कूल नहीं था तब एक आदमी ने अपनी जमीन दान कर दी। लेकिन, स्कूल के लिए जब भवन उपलब्ध नहीं था तब…
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सांगली की रानमला बस्ती के स्कूल के रंग

शिरीष खरे एक छोटे-से कमरे के एकमात्र दरवाजे पर हर दिन सुबह-सुबह छोटे बच्चे एक सुंदर रंगोली बनाते हैं, जो अंग्रेजी के किसी एक अक्षर पर आधारित होता है। जैसे…
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सांगली का मादलमुठी शाला- एडुकेशन मॉडल के 8 दशक

शिरीष खरे "देश भर के गांवों में ऐसा स्कूल मिलना मुश्किल है।"- यह दावा है मादलमुठी शाला (सांगली, महाराष्ट्र) के मुख्य अध्यापक बालासाहेब नाथाजी आडके का। उन्हें अपनी बात पर…
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