Archives for चौपाल - Page 3

गांव के रंग

पशुपालन में छिपा है किसानों की खुशहाली का राज

पुष्यमित्र चार-पांच साल पहले झारखंड के एक गांव गया था । वह गांव सब्जी उत्पादन में अव्वल था । वहां के किसानों ने कहा कि वे पूरी तरह से जैविक…
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चौपाल

ग्रामीण भारत की बदहाली और आर्थिक विकास का लालीपॉप

शिरीष खरे भारत में ग्रामीण और शहरी अंचल के लिए निर्धनता का निर्धारण अलग-अलग तरह से होता है। एक आंकड़े के मुताबिक भारत के 75 प्रतिशत निर्धन गांवों में रहते…
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आईना

नन्हीं पीहू से प्यार और विनोद कापड़ी का पागलपन

विनोद कापड़ी फ़िल्म रिलीज़ होने में अब कुछ दिन बाक़ी हैं।अब पीहू फ़िल्म से जुड़ी कुछ कहानियाँ। सबसे पहले कैसे आया आइडिया और पहली बार कब मिली पीहू ?  …
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चौपाल

उग्र हिंदुत्व के पैरोकारों का कुछ धर्म-ईमान भी बचा है?

राकेश कायस्थ के फेसबुक वॉल से साभार मैं आरएसएस को एक अतार्किक गैर-जिम्मेदार, षडयंत्रकारी और विभाजनकारी विचारधारा मानता हूं। यह बात विचारधारा को लेकर है, व्यक्तियों को लेकर नहीं। व्यक्तिगत…
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चौपाल

16 नवंबर को बड़े पर्दे पर नटखट पीहू का ‘विनोद’ और रोमांच

सत्येंद्र कुमार यादव 2016 की बात है । उस वक्त मेरा बेटा अथर्व करीब 2 साल का होगा। उसकी मां कुसुम बॉथरूम में थी और अथर्व ने खेल-खेल में बाहर…
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चौपाल

पूंजी में #Me Too की कुंजी

ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई  दोपहर में खाना खा कर आराम करने के लिए  बिछौना पर लेटबे किए थे कि मनकचोटन भाई अपने रिश्ते के एक मामू को साथ लिए उनके…
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चौपाल

पुरखों को याद करें, लेकिन बुजुर्गों की इज्जत करना ना भूलें

फोटो- अजय कुमार, कोसी , बिहार ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई  आज साइकिल से बाजार गये हुए थे। लौटने में देर हो रही थी। हम मनोकचोटन भाई के तिनटंगा चउकी पर…
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चौपाल

अखबार के जरिए यथार्थ से जुड़ना, एक मुगालता- आलोक श्रीवास्तव

पशुपति शर्मा पत्रकारिता में वैश्वीकरण के बाद एक नया बदलाव आया है। वो समाज के बड़े मुद्दों पर बात नहीं करती, समाज सापेक्ष न हो कर वो सिविक समस्याओं पर…
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चौपाल

हिन्दी की चिंता ऊपर से नहीं, नीचे से कीजिए

फाइल चित्र ब्रह्मानंद ठाकुर हिंदी दिवस से एक दिन पहले मैंने पूरा दिन 11-4 बजे तक एक उच्च विद्यालय में बिताया। हिन्दी की तीन कक्षाएं लीं। विद्यालय के प्रधान मुझे…
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चौपाल

राजनीतिक गणित में बुरी तरह से उलझ कर रह गई हिन्दी

डॉ संजय पंकज हिन्दी को राजभाषा का दर्जा देकर सरकार भूल गई। १४ सितम्बर १९४९ से हर वर्ष हिन्दी दिवस मनाने की जो औपचारिकता शुरू हुई वह एक सरकारी परम्परा बन…
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