Archives for चौपाल - Page 23

गुरु कहे- ‘घंटालों’ से निपटें, तब तो बात बने

शरत कुमार इलाहाबाद हाई कोर्ट का सरकारी स्कूलों की दशा पर आया निर्णय ऐतिहासिक है। सरकारी स्कूलों की दुर्दशा का कारण नीति निर्माताओं, अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों का भ्रष्ट तंत्र माना जा…
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‘सरकारी’ माने ‘चलताऊ’… ये सोच बदले तो कैसे?

निशांत यादव 'सरकारी' शब्द समाज में इस प्रकार उच्चारित किया जाने लगा है मानो जुगाड़ से चल रही कोई 'चलताऊ' व्यवस्था हो। एक राजकीय शिक्षक होने के नाते मुझे यह…
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सरकारी स्कूलों में बदलाव की ABCD, डगर बड़ी मुश्किल

हिंदुस्तान के सबसे बड़े सूबे की शिक्षा व्यवस्था पर आया है एक बड़ा फ़ैसला। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक ऐतिहासिक फ़ैसले में यूपी के सरकारी स्कूलों में बड़े बदलाव के…
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‘काली नज़रों’ से घर नहीं जलते, बकरी नहीं मरती…

सत्येंद्र कुमार यादव की रिपोर्ट झारखंड में डायन बता कर 5 महिलाओं की हत्या। किस युग में है हमारा समाज कौन जाने? छोटी-छोटी बातों पर महिलाओं को टोनहिन, डायन, नज़र…
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द ट्रुथ… द ओनली ट्रुथ… बट द कलर इज़ ‘ब्लैक’

  कौन बनाता है एक महिला को डायन, कौन है हत्यारा? -संजय श्रीवास्तव के फेसबुक वॉल से मैं डायन प्रथा के बारे में ज्यादा नहीं जानता था। पिछले दिनों जब…
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‘डायन’ बता कर मत करना ‘मर्डर’

-पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से विश्व आदिवासी दिवस के मौके पर मैंने फेसबुक पर कई मित्रों के शुभकामना संदेश देखे। कुछ साथी यह बताते रहे कि आज भी भारत में आदिवासियों…
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वो पूछेंगे ज़रूर-बता तेरा हुनर क्या है?

-सत्येंद्र कुमार की रिपोर्ट देश में हर साल एक करोड़ से ज्यादा नौजवान रोजगार के लिए शहरों की ओर पलायन करते हैं। गरीब, वंचित वर्ग के साथ मिडिल क्लास के…
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‘चंद्रकांता’ के देश में एक किस्सा चकिया का भी है जी!

कुमार सर्वेश की रिपोर्ट चकिया जहां तराशे जाते हैं पत्थर।-अशोक दुबे चकिया...छोटी सी चकिया...यानी पत्थर का छोटा सा गोल-मटोल चक्के जैसा टुकड़ा...यहां रहने वाले लोगों का जीवन भी बरसों से,…
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कखन हरब दुख मोर है ‘कमला मैया’

बाढ़ के डर से खेत चारागाह बन गए।- फोटो- रुपेश कुमार मधुबनी से रूपेश कुमार की रिपोर्ट मधुबनी जिले के बिस्फी को कवि कोकिला विद्यापति की जन्मस्थली होने का गौरव…
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न पटवारी, न अधिकारी… हम बदलेंगे गांव

अपने घर से करें बदलाव की शुरुआत। फोटो- नीलू अग्रवाल हम अक्सर गांव की समस्याओं के लिए शासन, पंचायत या फिर सरपंच को दोषी ठहराते रहते हैं। कभी कहते हैं…
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