Archives for चौपाल - Page 2

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राजनीतिक गणित में बुरी तरह से उलझ कर रह गई हिन्दी

डॉ संजय पंकज हिन्दी को राजभाषा का दर्जा देकर सरकार भूल गई। १४ सितम्बर १९४९ से हर वर्ष हिन्दी दिवस मनाने की जो औपचारिकता शुरू हुई वह एक सरकारी परम्परा बन…
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सेवाग्राम का सबक- स्वच्छता, प्रार्थना और स्वावलंबन

संदीप नाईक बहुत सारी खराब बातों के बावजूद बहुत सारी अच्छी बातें सेवाग्राम के आश्रम में मौजूद हैं, इनमें से प्रमुख हैं - स्वच्छता , प्रार्थना और स्वावलंबन। पूरे परिसर में…
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मानव जाति का पहला वैज्ञानिक आविष्कार क्या था ?

ब्रह्मानंद ठाकुर फोटो सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार आई का बतकही बिलकुले एक नया लुक में  था। असल में हुआ यह कि साउनीघड़ी पवनिए के दिन 15 अगस्त वाला परब…
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मीडिया को फिर से पत्रकारिता बनाने की लड़ाई कलम के नाम उधार है

ब्रह्मानंद ठाकुर अपने देश के मीडिया जगत में इन दिनों जो घटनाएं घट रही हैं, वह आकस्मिक नहीं कही जा सकती। इसका ताना-बाना तो काफी पहले ही बुना जा चुका…
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वीरेन नंदा की किस्सागोई पार्ट-7

सांकेतिक फोटो वीरेन नंदा किस्सागोई के पिछले अंक में आपने पढ़ा कि कैसे कहानीकार को लेखक की कीताबों की समीक्षा का सुझाव मिलता और उसपर अमल भी शुरू हो जाता…
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बचवा, रोज सबेरे मुंह धोके एगो ढूंढी खात रइ ह

उर्मिलेश उर्मिल के फेसबुक वॉल से माई की आज (28 अगस्त) पुण्यतिथि है। उसे गये आज पूरे 15 साल हो गये। बाबू यानी पिता जी तो बहुत पहले, सन् 1985…
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सांप्रदायिकता सरकार का सबसे बड़ा अस्त्र है- प्रेमचंद

डा. सुधांशु कुमार कथा-सम्राट प्रेमचंद। हिंदी कथा साहित्य को 'तिलस्म' और 'ऐय्यारी' के खंडहर व अंधेरी गुफा से निकालकर जनसामान्य के दुख-दर्द और यथार्थ से जोड़ने वाले कथासम्राट प्रेमचंद आज…
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बनारस में कथानक को इम्प्रेशन में बदलता ‘मैकबेथ’

संगम पांडेय व्योमेश शुक्ल की नई प्रस्तुति ‘बरनम वन’ का कलेवर मैकबेथ की तमाम होती रही प्रस्तुतियों में काफी मौलिक और नया है। यह खाली-मंच पर पश्चिमी ऑपेरा की मानिंद…
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वीरेन नंदा की किस्सागोई पार्ट-6

सांकेतिक चित्र वीरेन नंदा किस्सागोई के पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह कवि- कहानीकार दोस्तों ने भिक्षा प्रकाशन के लिए एक लाख रुपये का इंतजाम किया और ये…
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ग्रामीण चेतना के महाकवि रामइकबाल सिंह ‘राकेश’

डा. सुधांशु कुमार अवसानोन्मुख छायावाद के साहित्याकाश में मानववाद एवं ग्राम्य चेतना के महाकवि रामइकबाल सिंह 'राकेश' का उदय हिंदी कविता के लिए एक नवीन दृष्टिकोण का सबब बना ।…
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