Archives for चौपाल - Page 2

चौपाल

मेलघाट में भूख से मरते बच्चे और 90 के दशक का सन्नाटा

शिरीष खरे मेलघाट में शिरीष, साल 2008 शिरीष खरे की बतौर पत्रकार यात्रा की ये तीसरी किस्त है। मेलघाट से लौटते हुए ट्रेन में उनकी विचार यात्रा का सिलसिला फिर…
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पत्रकार के लिए हत्या की धमकी ही सबसे बड़ी चुनौती नहीं होती

शिरीष खरे शिरीष खरे, मेलघाट की एक तस्वीर (2008) ट्रेन की सामान्य गति से मुंबई की ओर लौटते हुए मेलघाट में जो घटा उसके बारे में सोच रहा हूं। जलगांव…
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ग्वालियर के ‘गुंडे’ ने किसी रंगकर्मी से बदसलूकी नहीं की

अनिल तिवारी करीब 1962 के दौरान पिता जी का तबादला ग्वालियर हो गया और मेरा दाखिला उस समय के सर्वश्रेष्ठ स्कूल जो बिरलाजी द्वारा संचालित था और बिरला नगर में…
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रंगकर्मी की संवेदना और गृहस्थी में कैद मां

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी जी ने अपनी रंग यात्रा को फेसबुक पर एक सीरीज में साझा किया है। उनका ये सिलसिला जारी है। एक रंगकर्मी की ज़िंदगी के…
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पद्मावत- जाति के ठेकेदारों ने बवाल क्यों काटा?

अनुशक्ति सिंह मैं पैदाइश से राजपूत हूँ. मेरे नाम के पीछे लगा 'सिंह' सरनेम मेरे पिता की थाती है जो मेरे साथ जुड़ी हुई है. वैसे ही जैसे किसी भी…
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मनमोहन-मोदी का फर्क, जवाब में नहीं मीडिया के सवाल में ढूंढिए

राकेश कायस्थ यह समय भारतीय समाज के स्मृति लोप का है। याद्दाश्त गजनी की तरह आती-जाती रहती है। जो लोग यह कहते हैं कि पहले वाले प्रधानमंत्री भी मीडिया से…
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‘कानून’ आया आपके द्वार: ‘समझबूझ’ कर लड़ो लड़ाई

प्रियंका यादव राजधानी दिल्ली में एसडीएम ऑफिस में अपनी तरह का पहला फ्री लीगल क्लिनिक सेवा की शुरुआत की गई है । मध्य दिल्ली के करोलबाग एसडीएम ऑफिस में शुरू…
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कोरेगांव की लड़ाई- सैनिकों की कोई जाति नहीं होती

अमरेश मिश्र  कोरेगांव की लड़ाई का जश्न मैं कभी पचा नहीं पाया। फिर भी, आधुनिक भारत की जटिल जातीय राजनीति के मद्देनज़र, इस घटना का उत्सव मनाने के लिए दलित…
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दांडी बंगला और डाक बंगले का फ़र्क मिटने को है!

धीरेंद्र पुंडीर "नाम क्या है इसका।" एक वीरान से पड़े बंगले के अंदर खड़े होकर मैंने बंगले में बैठे उस युवा से पूछा। एक शर्माती सी मुस्कुराहट के साथ अशोक ने…
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किसके डर की अभिव्यक्ति है भीमा-कोरेगांव की घटना

ब्रह्मानंद ठाकुर जहां तर्क और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सिरे से नकारते हुए अंधविश्वास, कूपमंडूकता  और अतार्किक मानसिकता को बढावा देकर आर्थिक और सामाजिक विषमता की खाई चौड़ी करने में ही…
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