Archives for चौपाल

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सासू मां से प्रेम किया तो सारा डर भाग गया

जूली जयश्री हाई स्कूल में हमारे एक टीचर थे , पाठक जी पढाते तो अंग्रेजी थे लेकिन अंग्रेजी से ज्यादा उनपर बेटियों में संस्कार बोने का दायित्व था ! उनका फेवरेट डॉयलाग…
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बेल्लारी- नैतिकता न इधर है न उधर

धीरेंद्र पुंडीर धर्म किसी ओर नहीं है, नैतिकता न इधर है न उधर है, सच का न इधर से कोई वास्ता न उधर से कोई ताल्लुक। लोकतंत्र सिर्फ सिक्कों पर…
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पहले किसान नेता और क्रांति के अग्रदूत कुंअर सिंह

कुमार नरेंद्र सिंह आज भी भोजपुर के उज्जैनिया राजपूतों के गांव लहठान में एक बहुत बड़ा तालाब है, जिसके बारे में वहां के लोग बताते हैं कि वह पोखरा कुंअर सिंह…
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कुंअर सिंह- सन् सनतावन के अगिया बैताल

कुमार नरेंद्र सिंह ‘कुंअर सिंह एक ऐसा आदमी है, जिसने हमें 80 साल की अवस्था में एक पूर्ण पराजय का त्रासद घाव दिया, जिसने बेलगाम विद्रोहियों से ऐसी हुक्मबरदारी हासिल…
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मैं जेल जाना चाहता हूं !

सांकेतिक जी हां ! मैं जेल जाना चाहता हूं !! इसमें कौतूहल वाली कोई बात नहीं, क्योंकि जेल तो हमारी मानव सभ्यता के विकास की चिर संगिनी है । बड़ी…
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मैया नहीं मालगाड़ी बन गई है नर्मदा

शिरीष खरे जब पहली यात्रा समाप्त होने की कगार पर होती है तो मेरे भीतर दूसरी यात्रा तेजी से आगे बढ़ रही होती है। यह होती है विचारों की यात्रा।…
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टॉयलेट का फ्लश और आंकड़ों का ‘ओवरफ्लो’?

साजिद अशरफ पीएम मोदी का दावा है कि, बिहार में एक हफ्ते में 8 लाख 50 हजार से ज्यादा शौचालय बनाए गए। अगर ये सच है तो मान लीजिये कि…
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आंदोलनों में हिंसा तो होती है, चौरी-चौरा वाला दम नहीं दिखता

अमित ओझा 5 फरवरी 1922 गुलामी की बेड़ियों में जकड़ा देश अब अंगड़ाई लेने लगा था।अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ बापू के असहयोग आंदोलन की आग धीरे-धीरे पूरे मुल्क में फैलती…
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खामोशियां… मनमोहन से मोदी तलक

रविकिशोर श्रीवास्तव हज़ार जवाबों से अच्छी है मेरी खामोशी...अगस्त 2012 का वो वक्त... जब तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब हुए... तो टूजी स्पैक्ट्रेम, कोलगेट जैसे मुद्दों…
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जॉर्डन में जुटे दुनिया के ‘बाल-दूत’

टीम बदलाव छोटू, मुन्नू, बबलू ये कुछ ऐसे नाम हैं जो हम गांव और शहरों में चाय की दुकान या फिर ढाबा जैसी जगहों पर नजर आ जाते हैं, हम…
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