Archives for चौपाल

चौपाल

बावरवस्ती की महिलाओं के साथ वूमन्स डे की यादें

शिरीष खरे शुक्रवार की तारीख क्यों खास थी यह मुझे पता भी न थी, लेकिन अब यह तारीख फिर भूल जाऊं तो भी इस तारीख से जुड़ी यह घटना मुझे…
और पढ़ें »
चौपाल

एक देशवासी का पीएम मोदी को खुला पत्र

फाइल फोटो आदरणीय मोदीजी, जब आपने अपनी 90 साल की मां को एटीएम की लाइन में खड़ा करवाया था, तभी मैं समझ गया था कि भारत माता को बॉर्डर पर…
और पढ़ें »
चौपाल

वर्चुअल दुनिया की दीवार और गुम होती हमारी खुशियां

  दयाशंकर जी के फेसबुक वॉल से साभार हम मनुष्‍य के सामाजिक प्राणी होने के मूल गुण से पहली बार इतनी दूर निकलते दिखाई दे रहे हैं। जहां हर चीज…
और पढ़ें »
चौपाल

‘तड़प’ और ‘सपने’ के साथ ‘मुर्दा’ नहीं है निखिल दुबे

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार वो ख़बरों का 'शार्प शूटर' है। लंबा कद, तीखे 'नैन-नक्श', आड़ी-तिरछीं काली-सफेद मूंछें और उसे ऐंठने की अपनी अदा। न्यूज़ रूम में देखने…
और पढ़ें »
चौपाल

‘किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है’ ?

ब्रह्मानंद ठाकुर पिछले दिनों देश ने गणतंत्र दिवस का जश्न बड़े धूम-धाम से मनाया । देश की हर गली मोहल्ले में हर साल की तरह जमकर रश्म अदायगी भी हुई…
और पढ़ें »
चौपाल

23-24 फरवरी को गांव हरदुआ में ‘माटी-पानी’ का न्योता

सईद अयूब के फेसबुक वॉल से साभार माटी पानी' की ओर से गाँव हरदुआ में पुस्तकालय स्थापना के अवसर पर (दिनाँक- 23-24 फ़रवरी, 2019) आप सब सादर आमंत्रित हैं। माटी…
और पढ़ें »
चौपाल

राष्ट्रीय परिदृश्य पर हावी संकीर्ण और जनविरोधी सोच

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार किसी की बीमारी पर कटाक्ष नहीं होना चाहिए। किसी को भी बद्दुआ नहीं, हर किसी को शुभकामना देनी चाहिए। बीमारी तो किसी…
और पढ़ें »
चौपाल

कुंभ पर एक ‘साहित्यकार’ की जीवंत फोटो प्रदर्शनी

अजामिल जी के फेसबुक वॉल से साभार इलाहाबाद के बहुचर्चित छायाकार एस के यादव ने विश्व के सबसे बड़े अध्यात्मिक कुंभ मेले का अभिनंदन कुंभ की स्मृतियों को सहेजे लगभग…
और पढ़ें »
चौपाल

बच्‍चों की मार्कशीट को जिंदगी पर हावी न होने दें

दयाशंकर मिश्र बच्‍चों को संपत्ति की तरह न मानने, ‘बच्‍चे हमसे हैं, हमारे लिए नहीं’ भावना वाली परवरिश के सिद्धांत, विनम्र अनुरोध को देशभर के पाठकों से बेहद सृजनात्‍मक, सुखद…
और पढ़ें »
चौपाल

आर्थिक असमानता दूर करने का ‘सियासी’ छलावा !

शिरीष खरे स्वतंत्रता के बाद भारत जैसे विशाल और विविधता सम्पन्न देश में असंतुलन तथा अंतर्विरोधी समाधान के लिए योजना को एक सकारात्मक साधन माना गया। ग्रामीण भारत में योजना…
और पढ़ें »