Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 66

ग़रीबी के जाल में मछली से तड़फड़ा रहे हैं मछुआरे

पुष्यमित्र मचान पर बिछा जाल, अब जाल का यही इस्तेमाल रह गया है। फोटो -पुष्यमित्र जातियों के नाम पर लड़े जा रहे इस चुनाव में निषाद जाति की बड़ी चर्चा…
और पढ़ें »

सूखे खलिहान, कौन लाएगा ‘हरिहर विहान’ ?

पुष्यमित्र मुरझाए खेतों में मुरझाया सा किसान। फोटो-पुष्यमित्र इन दिनों पटना समेत बिहार के सभी शहरों और कस्बों में चौक-चौराहे लाल, पीले और हरे रंगे के होर्डिंग्स से अटे पड़े हैं।…
और पढ़ें »

‘रावणों’ ने किया एक बेटी का ‘जिंदा-दहन’!

उमरपुर गांव, प्रतापगढ़, यूपी हरिगोविंद विश्वकर्मा वह सपने देखने वाली लड़की थी। देहात और ग़रीब परिवार की लड़की। करियर बनाने का दृढ़ संकल्प ले रखा था। वह पढ़-लिखकर किसी स्कूल…
और पढ़ें »

रोती-बिलखती मां भी बददुआ नहीं देती

अश्विनी शर्मा चारपाई से पर लेटी मां और पास बंधी भैंस । विख्यात कवि धूमिल के गांव खेवली की पन्ना माई बिलख रहीं हैं। अपने खून से ही दया की…
और पढ़ें »

बिहार के तीन तिलंगे-व्हाट एन इलेक्शऩ सर जी!

शंभु झा बिहार चुनाव को लेकर काफी कुछ कहा और सुना जा रहा है। अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी इतनी गहमागहमी नहीं होती होगी जितनी बिहार इलेक्शऩ को…
और पढ़ें »

महंगाई का रावण हंस रहा है… हा हा हा

हां, बह रही है विकास की गंगा दालों में डबल सेंचुरी के साथ प्याज में मुनाफाखोरी के साथ सब्जियों में जनता की जेब काटने के साथ तीन महीने में हर…
और पढ़ें »

रमन राज में नक्सलियों से आखिरी लड़ाई

फोटो- दिवाकर मुक्तिबोध की फेसबुक वॉल से  दिवाकर मुक्तिबोध छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह ने हाल ही में नई दिल्ली में ये कहा था कि राज्य में नक्सली समस्या…
और पढ़ें »

धत तेरे कि… थार में न भात, जुबान पे छै जात !

पुष्यमित्र  मूढ़ी खाता बच्चा, इसकी मां पिछले साल इसे जन्म देने के बाद गुजर गयी। फोटो-पुष्यमित्र  सरकारी आंकड़ों में बिहार में दस में से आठ बच्चे कुपोषित हैं। 26 फीसदी…
और पढ़ें »

लेखकों का ‘आपातकाल’ और ‘फासीवाद’ बस हौव्वा है ?

संजय द्विवेदी देश में बढ़ती तथाकथित सांप्रदायिकता से संतप्त बुद्धिजीवियों और लेखकों द्वारा साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाने का सिलसिला वास्तव में प्रभावित करने वाला है। यह कितना सुंदर है कि…
और पढ़ें »