Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 58

इस तरह रहेगी मानवता, कब तक मनुष्य से डरी हुई ?

कीर्ति दीक्षित काश हे मजदूर! तुम भी असहिष्णु हो जाते, हे किसान! तुम भी असहिष्णु हो जाते। आकुल अन्तर की आह मनुज की, इस चिन्ता से भरी हुई इस तरह…
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हड़ताल के 35 दिन, सर्राफ़ा कारोबार में हाहाकार क्यों?

पशुपति शर्मा शुभाशीष दे। कारीगरी के बाद खोली अपनी दुकान। 35 दिनों से हड़ताल की वजह से कामकाज ठप। शुभाशीष दे। गीता ज्वैलर्स के प्रोपराइटर। गाजियाबाद के वसुंधरा में कमल…
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न्यूक्लियर प्लांट के ‘भयावह’ सच को ‘लीक’ करने की अंतहीन सज़ा

कुछ दिन पहले 11 मार्च को गुजरात में मौजूद काकरापार न्यूक्लियर प्लांट में लीकेज की ख़बर आई थी लेकिन इस ख़बर को मुख्यधारा की मीडिया ने चलते फिरते अंदाज में…
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दिव्यांगों को समझने की ‘दिव्य दृष्टि’ नदारद है…

फोटो- अजय कुमार, कोसी बिहार विनोद कुमार मिश्र साल 2007 में संयुक्त राष्ट्र संघ में विकलांगों के अधिकार आधारित व्यवस्था के निर्माण हेतु जब घोषणा पत्र जारी हुआ तो हस्ताक्षर करने…
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देश की राजधानी में किसानों का मेला

अरुण यादव दिल्ली में कृषि मेला। राजधानी का ताना-बाना खेत-खलिहान वाला नहीं है, लेकिन पिछले हफ्ते देश के सबसे बड़े कृषि अनुसंधान केंद्र में कृषि मेला लगा तो दिल्ली ही…
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गांव वालों ने लौटाईं अस्पताल की ‘सांसें’

पुष्यमित्र गांव के लोगों के बीच नीली शर्ट में अविनाश कुमार सिंह. जिन्होंने अस्पताल को खुलवाने के लिए उच्च न्यायालय में मुकदमा किया था। फोटो-पुष्यमित्र यह उन हौसले वाले ग्रामीणों…
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गांधी के ग्राम-स्वराज को साकार करता गांव

शिवाजी राय  चमचमाती गलियां, रात को हर चौक-चौराहे पर जलते लैंप पोस्ट, सुबह के वक़्त गलियों में साफ-सफाई करते बच्चे, युवक और बुजुर्गों की टोली, खेतों में लहलहाती नकदी फसलें।…
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‘सागर’ की गहराई तो समझो साहब !

अरुण यादव पिछले कुछ दिनों से आशीष सागर दीक्षित का फेसबुल वॉल नहीं देख पाया था, लेकिन जब बदलाव पर आशीष से जुड़ी कल ख़बर पड़ी तो हैरान रह गया ।…
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कर्जदार हम भी, कर्जदार तुम भी… बस किस्मत जुदा-जुदा है!

धीरेंद्र पुंडीर दस साल का बच्चा था। गांव में जाना था। एक जीप कॉपरेटिव डिपार्टमेंट की थी। उसमें बैठा हुआ था। जीप में अमीन बैठे थे। कुर्क अमीन। यही नाम…
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वो बस, जिसने हज़ारों लड़कियों के सपनों को दी रफ़्तार

पुष्यमित्र कैमूर जिले के रामगढ़ प्रखंड का एक सुदूरवर्ती गांव है बनका बहुआरा। इस गांव में हर रोज सुबह आठ बज कर पच्चीस मिनट पर एक कॉलेज बस आती है। सुधा…
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