Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 53

एमपी/छत्तीसगढ़

तुम्हारी जात क्या है, तुम क्या समझोगे?

प्रशांत दुबे किसी के इंतजार में खटलापुरा मंदिर में बैठा था| एक पढ़े-लिखे, सूट-वूट वाले भाईसाहब चार चके से उतरे, कुछ मन्त्र पढ़े और पूजा पाठ की सामग्री पन्नी सहित…
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मेरा गांव, मेरा देश

पीएम साहब, सलाहकारों की फौज को भी परख लीजिए

धीरेंद्र पुंडीर फिर से एक छूट। काला धन रखने वालों को एक बार फिर से छूट। लगता है साहेब काफी दिल वाले हैं। दिल दुखता है, लेकिन दुआ हमेशा उन्हीं…
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मेरा गांव, मेरा देश

पेड़ों की छांव तले बाल मन की गूंज

वैशाली , गाजियाबाद 27 नवंबर 2016। “पेड़ों की छांव तले रचना पाठ” के अंतर्गत 26वीं साहित्य गोष्ठी वैशाली सेक्टर चार के हरे भरे मनोरम सेंट्रल पार्क में सम्पन्न हुई। हिन्दी…
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बिहार/झारखंड

नोटबंदी की ‘सियासी मंडी’ में अन्नदाता की सुध किसे ?

ब्रह्मानंद ठाकुर  किसानों के खून-पसीने से उपजाई गयी फसल जब कौडियों के मोल बिकने लगे तो उनका दर्द समझना सब के लिए आसान नहीं होता। कभी-कभी जीवन में बहुत कुछ…
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मेरा गांव, मेरा देश

ब्लैकमनी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’

कालेधन पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है । आज आधी रात से 500 और 1000 रुपये के नोट बंद करने का फैसला लिया…
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बिहार/झारखंड

छठ पर्व पर ‘सरिसवा’ नदी को बचाने की सौगन्ध

कुणाल प्रताप सिंह बिहार में हर तरफ छठ की छटा बिखरी है । नदी किनारे बने घाट सजे हुए हैं। शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ छठ की औपचारिक शुरूआत हुई…
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मेरा गांव, मेरा देश

मसला कश्मीर है… कारोबार नहीं!

धीरेंद्र पुंडीर हाथ पर चांद का फोटो खींच लेने से न चांद इतना छोटा होता कि हथेली पर आ जाए और न ही हथेली इतनी बड़ी हो जाती है कि…
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मेरा गांव, मेरा देश

महिला अधिकारों के ‘तलाक’ का हक किसको है?

धीरेंद्र पुंडीर बचपन में खेंतों को पार कर नदी के दूसरी तरफ बसे गांव न्यामू में जाना सिर्फ मेले के वक्त ही होता था। स्कूल की छुट्टियां, जून का सूरज…
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रजत! अपनों के ‘आंसू’ की फिक्र भी कर लेते भाई

पंकज त्रिपाठी आजतक का युवा रिपोर्टर रजत सिंह। करीब 29 साल की उम्र में ही इस होनहार साथी ने बहुत कुछ हासिल कर लिया था। सबसे ज़्यादा लोगों का प्यार। 24…
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जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं…!

मुलायम के कुनबे में कलह । शिवपाल कैबिनेट से रामगोपाल पार्टी से बर्खाश्त फोटो- गुगल कुमार  सर्वेश डॉ. लोहिया ने कहा था कि जिंदा कौमें पांच साल इंतजार नहीं करतीं।…
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