Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 2

मेरा गांव, मेरा देश

हमेशा हंसाने वाला दीपांशु आज सबको रुला गया

दीपांशु की फाइल फोटो टीम बदलाव पिछले कुछ दिनों से मीडिया के साथियों के निधन की ख़बर विचलति करने लगी है । ऐसा कोई महीना नहीं जब युवा पत्रकारों के…
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माटी की खुशबू

महाराणा प्रताप के आखिरी ठीये की मेरी पहली यात्रा

जयंत कुमार सिन्हा हिंदू-मुसलमान के बीच पनप रहे घिन्न भरे माहौल में एक ऐसा मुस्लिम सहकर्मी मिला, जिसने तड़क-भड़क की दुनिया से दूर एक अलग जगह दिखाने में रूचि दिखाई।…
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परब-त्योहार

हमारे पोते-पोतियों को हमसे दूर मत करो भाई- दिल की आवाज़

ब्रह्मानंद ठाकुर बदलाव पाठशाला के प्रथम सालगिरह और विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस के अवसर पर 2 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर के पियर गांव में एक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। संवाद…
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बिहार/झारखंड

पुलिस और आम जनता का ऐसा मिलन हो तो क्या कहना?

अखिलेश कुमार के फेसबुक वॉल से साभार 30 सितंबर को सोनथा (कोचाधमन), किशनगंज में नवोदय अलुम्नी असोशिएसन बिहार, (किशनगंज चैप्टर) ने मेगा हेल्थ कैम्प का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में…
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आईना

विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस पर गाजियाबाद में स्नेहन भरी एक शाम

टीम बदलाव बुजुर्गों के अकेलेपन की त्रासदी कितनी गंभीर होती जा रही है? एक उम्र के बाद क्यों समाज अपने ही बुजुर्गों की उपेक्षा करने लगता है? क्यों परिवार के…
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मेरा गांव, मेरा देश

दिल्ली से बिहार तक आज बुजुर्गों के मन की बात

महानगरीय जीवन में सिकुड़ते परिवार और रिश्तों में बढ़ती दूरियों के बीच बुजुर्गों के महत्व को रेखांकित करने की कोशिश के तहत बदलाव ने एक पहल की है। बदलाव और…
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चौपाल

पुरखों को याद करें, लेकिन बुजुर्गों की इज्जत करना ना भूलें

फोटो- अजय कुमार, कोसी , बिहार ब्रह्मानंद ठाकुर घोंचू भाई  आज साइकिल से बाजार गये हुए थे। लौटने में देर हो रही थी। हम मनोकचोटन भाई के तिनटंगा चउकी पर…
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मेरा गांव, मेरा देश

30 सितंबर को आइए और समझिए हमने अपने बुजुर्गों को कैसी ज़िंदगी दी

 टीम बदलाव विश्व वरिष्ठ नागरिक दिवस की पूर्व संध्या पर बदलाव और ढाई आखर फाउंडेशन की ओर से ‘कल और आज’- कुछ अपनी कहें कुछ हमारी सुनें नाम से 30…
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आईना

‘दादी’ के दर्शन और दादी से बिछड़ने का डर

नीलू  अग्रवाल उस लड़की ने हाथ पकड़ रखे हैं अपनी दादी के और मजबूती से पकड़ रखे हैं । मजबूती हाथों में नहीं दिल में है, उसने जैसे ठान ही…
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गांव के रंग

बादशाह खान के प्रति

- अरुण कमल फोटो सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार बुढ़ापे का मतलब है सुबह शाम खुली हवा में टहलना बूलना बुढ़ापे का मतलब ताजा सिंकी रोटियाँ शोरबे में डबो डबो…
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