Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 2

चौपाल

अतिवादों के दौर का जनक है पूजीवादी अर्थतंत्र-ब्रह्मानंद ठाकुर

ब्रह्मानंद ठाकुर विनय तरुण स्मृति व्याख्यान 2018 का विषय है- अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद। मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि साहित्य, कला, संस्कृति, नीति-नैतिकता, चिंतन और…
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चौपाल

अतिवादों के दौर में पत्रकारिता और गांधीवाद

मोनिका अग्रवाल जब हम किसी से पूछे कि  वर्तमान में हिंदी की साहित्यिक पत्रकारिता का काल कैसा है ? शायद जो जवाब मिले वो ऐसा हो- पतनशील, विकासहीन, लक्ष्यविहीन, अराजकतापूर्ण…
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मेरा गांव, मेरा देश

दरमा घाटी में जीवन की संघर्ष गाथा

अशोक पांडे के फेसबुक वाल से दरमा घाटी के वाशिंदों का जीवन बेहद संघर्ष भरा होता है । जिस तरह जम्मू-कश्मीर में ठंड के दिनों में राजधानी श्रीनगर से जम्मू…
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बिहार/झारखंड

हमारे दिलों का कोना-कोना नाप चुके हैं सागर बाबा

सुबोध कांत सिंह बात तक की है जब मैं चौथी कक्षा में पढ़ता था। स्कूल में गर्मी की छुट्टी पड़ी तो मेरे चाचा मुझे अपने गांव लेकर आए। इससे पहले…
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मेरा गांव, मेरा देश

राजकिशोर का न होना

संजीव कुमार सिंह जनसत्ता की कैच लाइन रही है सबकी खबर दे, सबकी खबर ले। टीवी में काफी समय गुजारने के बाद अपने लिए इसके मायने बदलते लग रहे हैं।…
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बिहार/झारखंड

‘अवसरवाद’ के सियासी समर में ‘सुशासनबाबू’ का चक्रव्यूह

पुष्य मित्र हाल में हुए उपचुनाव में बीजेपी की हार और विपक्षी दलों के उम्मीदवारों की जीत से बिहार अछूता नहीं रहा और ना ही नीतिश इस हार जीत के…
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चौपाल

18 साल की उम्र में ‘बजाया राजा का बाजा’

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी की ये सीरीज फेसबुक पर आ  रही है और उसे देर-सवेर हम भी बदलाव पर साझा कर रहे हैं। वो इस सीरीज में 50…
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आदर्श गांव पर रपट

सांसद चिराग पासवान के गोद लिए पंचायत दहियारी का हाल

संदीप कुमार सिंह 'उधर बदगुमानी है , इधर नातवानी है न पूछा जाय है उससे, न बोला जाय है हमसे' तथाकथित आदर्श ग्राम पंचायत दहियारी में यदि गालिब होते तो…
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आईना

दलितों का रोजमर्रा का संघर्ष -“लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट ”

चित्रा अग्रवाल फिल्म लाइफ ऑफ एन आउटकास्ट का दृश्य मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई करने वाले अच्छे से जानते हैं कि सिनेमा बस मनोरंजन नहीं बल्कि अपनी बात को जनमानस तक…
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मेरा गांव, मेरा देश

33 साल बाद आज तू फिर आ गया…!

ऐसे बहुत कम ननिहाल होते हैं , जहाँ ना माँ होती है। ना मामा और ना नानी होती है लेकिन मैंने आज ऐसा ही एक ननिहाल तक़रीबन 33 साल बाद…
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