Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 2

आईना

‘टी पार्टी’ से बन ही गये हम नचकैया

अनिल तिवारी 1968 में जब मेरी उम्र मात्र 15 वर्ष की थी तब तक मैं स्कूल के शिक्षकों के लिये सर दर्द का सबब बन चुका था। उस समय हमारे क्लास…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

रंगों का कोलाज विकल्प… कुछ रंग अब भी बिखरे हैं

अजीत अंजुम प्यारा सा ये लड़का इस दुनिया में नहीं रहा . विकल्प त्यागी नाम था इसका . फेसबुक पर Zypsy's Story के नाम से प्रोफ़ाइल बना रखी थी .…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

वक़्त ने तीसरी मोहलत नहीं दी

रंजीत कुमार बिल्कुल ठीक-ठीक याद तो नहीं जब पहली बार तुम मिले थे, चैनल लांचिंग से पहले ट्रेनिंग का दौर था जब पहली बार नोटिस किया था मैंने। एक पतला-दुबला…
और पढ़ें »
आईना

जब मम्मी-पापा ने कर दिया घर-बदर

अनिल तिवारी अब थोड़ा घर की तरफ रुख करते हैं। इन सारी गतिविधियों से घरवाले बहुत तंग आ गये थे। आगरा के दो प्रतिष्ठित परिवारों का बड़ा लड़का, आखिर किस…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

‘मोदीकेयर’- महंगे इलाज का दंश कौन झेलेगा?

बब्बन सिंह हमने टीवी चैनलों पर विशेषज्ञों को नई स्वास्थ्य सुरक्षा नीति (मोदीकेयर) पर बड़ी-बड़ी बातें करते सुना. स्वाभाविक रूप से हमें भी लगा कि चुनावी कारणों से सरकार खेती…
और पढ़ें »
मेरा गांव, मेरा देश

चुनावी साल में चलो गांव के विकास का शोर तो है!

बब्बन सिंह मित्रो, हम एक सामान्य व्यक्ति हैं जो संयोग से पत्रकारिता के पेशे में हैं, जैसे आप किसी और पेशे में. हम किसी प्रकार का दंभ नहीं पालते कि…
और पढ़ें »
आईना

फ्लाइंग किस पर बिग फाइट

अनिल तिवारी वरिष्ठ रंगकर्मी अनिल तिवारी की फेसबुक सीरीज को हम साथियों से साझा कर रहे हैं। इसमें एक तारतम्यता है। अगर आप शुरुआती हिस्से से न गुजरें हो तो…
और पढ़ें »
बिहार/झारखंड

अक्टूबर में पाठशाला, जनवरी में पुस्तकालय

ब्रह्मानंद ठाकुर 30 जनवरी को देश ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 70वीं पुण्यतिथि मनाई । दिल्ली से लेकर देश के तमाम हिस्सों में श्रद्धांजलि सभाएं हुईं । लेकिन उससे ज्यादा…
और पढ़ें »
परब-त्योहार

श्मशान में जीवन का संगीत और सौंदर्य

पशुपति शर्मा 20 जनवरी, 2018 की उस दोपहर, राजधानी के मंडी हाउस इलाके में 'अलग मुल्क के बाशिंदे' से मुखातिब होने का मौका मिला। संगीत नाटक अकादमी के प्रेक्षागृह में…
और पढ़ें »
चौपाल

ग्वालियर के ‘गुंडे’ ने किसी रंगकर्मी से बदसलूकी नहीं की

अनिल तिवारी करीब 1962 के दौरान पिता जी का तबादला ग्वालियर हो गया और मेरा दाखिला उस समय के सर्वश्रेष्ठ स्कूल जो बिरलाजी द्वारा संचालित था और बिरला नगर में…
और पढ़ें »