Archives for मेरा गांव, मेरा देश - Page 2

परब-त्योहार

‘किसकी है जनवरी, किसका अगस्त है’ ?

ब्रह्मानंद ठाकुर पिछले दिनों देश ने गणतंत्र दिवस का जश्न बड़े धूम-धाम से मनाया । देश की हर गली मोहल्ले में हर साल की तरह जमकर रश्म अदायगी भी हुई…
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आईना

CBI का सीमित दायरा और राज्यों के अधिकार की ABCD

टीम बदलाव पश्चिम बंगाल पुलिस और सीबीआई के बीच घमासान अब सियासी रंग ले चुका है । चिट फंड केस में कोलकाता पुलिस के घर छापा मारने गई सीबीआई टीम…
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मेरा गांव, मेरा देश

आंकड़ों से समझिए किसान और गरीब सरकार की कितनी है प्राथमिकता

ग्राफिक इमेज साभार भास्कर सरकार का कुल बजट 27 लाख 84 हजार 200 करोड़ शिक्षा के लिए 93 हजार 848 करोड़ रुपये आवंटित यानी कुल बजट का महज फीसदी ।…
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चौपाल

23-24 फरवरी को गांव हरदुआ में ‘माटी-पानी’ का न्योता

सईद अयूब के फेसबुक वॉल से साभार माटी पानी' की ओर से गाँव हरदुआ में पुस्तकालय स्थापना के अवसर पर (दिनाँक- 23-24 फ़रवरी, 2019) आप सब सादर आमंत्रित हैं। माटी…
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आईना

अहिंसा धर्म अत्यंत कठिन है- गांधी

पुष्यमित्र के फेसबुक वॉल से साभार आज गांधी जी की पुण्यतिथि है। यह हम सब जानते हैं कि गांधी की हत्या एक सनकी इंसान ने की थी और यह भी…
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गांव के नायक

गांधी तो अब मर रहे हैं आहिस्ता-आहिस्ता

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार आज बापू की शहादत का दिन है। किसी सिरफिरे ने उन्हें गोली मार दी थी। लेकिन गांधी जैसी शख्सियत की हत्या महज गोली…
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बिहार/झारखंड

राजगीर की प्राकृतिक छटा और टमटम की सवारी

 पुष्यमित्र राजगीर का घोड़ाकटोरा झील, मानसरोवर नहीं है, न ही सिक्किम के नाथुला इलाके में बसा छांगू लेक। मगर जनवरी के इस आधे कंपकपाते आधे सुलगते दिन में जब आप…
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माटी की खुशबू

प्री-प्रेंगनेंसी शूट- नया चलन और कुछ सवाल

सीमा मधुरिमा के फेसबुक वॉल से साभार पिछली बार संस्कृतियों के परिवर्तन की बात करते समय आपको प्री वेडिंग शूट की यात्रा पर ले गए थे ! आशा ही नहीं…
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परब-त्योहार

गणतंत्र बड़ा हुआ, लेकिन हमारी सोच छोटी

ब्रह्मानंद ठाकुर आजादी के 5 साल बाद और भारत को गणतंत्र घोषित होने के दो साल बाद 1952 में मेरा जन्म हुआ। सात साल की उम्र में गांव के बेसिक…
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बिहार/झारखंड

जब मैंने पहली बार कर्पूरी ठाकुर को देखा और सुना

ब्रह्मानंद ठाकुर साल तो ठीक याद नहीं, शायद 1964-65 रहा होगा। मैं अपने गांव के बेसिक स्कूल में छठी कक्षा का विद्यार्थी था। नवम्बर का महीना था। मौसम भी खुशगवार।…
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