Archives for मेरा गांव, मेरा देश

मेरा गांव, मेरा देश

‘कानून’ आया आपके द्वार: ‘समझबूझ’ कर लड़ो लड़ाई

प्रियंका यादव राजधानी दिल्ली में एसडीएम ऑफिस में अपनी तरह का पहला फ्री लीगल क्लिनिक सेवा की शुरुआत की गई है । मध्य दिल्ली के करोलबाग एसडीएम ऑफिस में शुरू…
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मेरा गांव, मेरा देश

कोरेगांव की लड़ाई- सैनिकों की कोई जाति नहीं होती

अमरेश मिश्र  कोरेगांव की लड़ाई का जश्न मैं कभी पचा नहीं पाया। फिर भी, आधुनिक भारत की जटिल जातीय राजनीति के मद्देनज़र, इस घटना का उत्सव मनाने के लिए दलित…
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बिहार/झारखंड

पल्लवी ने बनाई बिहार की ‘पहली प्लास्टिक की सड़क’

प्लास्टिक की सड़क बनाती 10वीं की छात्रा पल्लवी आपके आस-पास फैला प्लास्टिक का कचरा आपके लिए कूड़े से ज्यादा कुछ नहीं होता, लेकिन क्या आप सोच सकते हैं वो प्लास्टिक…
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मेरा गांव, मेरा देश

‘करोड़ों’ की जमीन का मालिक मजदूरी करने को मजबूर

शिरीष खरे अलेक्जेंड्राइट नाम के दुनिया के बेशकीमती पत्थर जिस खेत से निकले उस खेत का मालिक कैसा होना चाहिए । क्या ऐसा नहीं होना चाहिए कि उसके पास आधुनिक…
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आईना

सुकून का कहीं कोई वाई फाई नेटवर्क नहीं!

सच्चिदानंद जोशी मैं जैसे ही उस रिसोर्ट में दाखिल हुआ अचंभित रह गया। शहर से इतने पास, लेकिन शहर के कोलाहल से दूर, इतनी सुंदर जगह की तो मैंने कल्पना…
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चौपाल

दांडी बंगला और डाक बंगले का फ़र्क मिटने को है!

धीरेंद्र पुंडीर "नाम क्या है इसका।" एक वीरान से पड़े बंगले के अंदर खड़े होकर मैंने बंगले में बैठे उस युवा से पूछा। एक शर्माती सी मुस्कुराहट के साथ अशोक ने…
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माटी की खुशबू

… और मां के साथ मर गया मनुष्य

देवांशु झा बेटे ने बूढ़ी मां से कहा मां चलो, सूर्य नमस्कार करते हैं लगभग अपंग मां सहज तैयार हुई बहू ने खुश होकर दरवाजा खोला बेटे ने मां को…
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बिहार/झारखंड

बहू अंजलि ग्रेजुएट हो गई!

मिथिलेश कुमार राय सवेरे जब मैं काम पर निकल रहा था, माँ बोली कि मिठाई लेते आना। कल शुक्रवार है। थान पर चढ़ाना है- पतोहू ग्रेजुएट हो गई। जरूर। यह…
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आईना

देहरादून में सृजन का सादगी भरा साहित्य उत्सव

प्रियदर्शन साहित्य समारोह अक्सर अपनी भव्यता और भटकावों में मुझे अरुचिकर लगते रहे हैं। इन समारोहों में साहित्य और विचार पीछे छूट जाते हैं और ग्लैमर और चकाचौंध का शोर…
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आईना

नए साल पर पठन-पाठन का चैलेंज

सोशल मीडिया पर पिछले दो दिनों से शुभकामनाओं का सिलसिला चल रहा है, ऐसे में एक पोस्ट पर नज़र गई। वरिष्ठ पत्रकार प्रियदर्शन जी की ये पोस्ट नए साल में…
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