Archives for गांव के रंग - Page 3

चुनावी शोर में किसानों की फिक्र कर लेना नेताजी

नीलू अग्रवाल बिहार में चुनाव का शोर शुरू हो गया है। इसके साथ ही सियासी दलों के रणनीतिकार जाति के आंकड़ों को जुटाने, उसका विश्लेषण करने और जाति के वोटबैंक…
और पढ़ें »

प्रधानमंत्री से सीधे बतियाता है एक गांव

जितेंद्र कुमार देश का एक ऐसा गांव जो सीधे सेवन आरसीआर से संवाद करता है। हम बात कर रहे हैं दिल्ली से करीब 800 किमी दूर बसे जयापुर गांव की जिसकी…
और पढ़ें »

आजतक ने जोड़ा ख़बरों से गांव का ‘कनेक्शन’

सत्येंद्र कुमार फोटो- आज तक का गांव कनेक्शन गांव की अधिकांश सड़कें कच्ची से पक्की हो गई। कई गांव से होकर चौड़ी सड़कें दौड़ने लगीं। टमटम की जगह टैंपो चलने…
और पढ़ें »

गाँवन के गुनहगार अपने, आ कोसेला गाँव के

डॅा० जयकान्त सिंह 'जय' हमार गतर-गतर गँवई गरिमा के गवाही देला। रोंआँ-रोंआँ ओकरे रिनी (ऋणी) बा। हमार मन-मिजाज आ दिल-दिमाग हर घरी ओही गँवई गंध-सुगंध में बोथाइल-गोताइल रहेला। नोकरी-चाकरी के…
और पढ़ें »

फिरंगी लुट गयो रे हाथुस के बाज़ार में

धीरेंद्र पुंढीर लोकगीतों का सिलसिला अनंत है। देश के हर हिस्से में अंग्रेजों को मार भगाने की ललक उनके लोकगीतों में दिखती है। लोकाचार में दिखाई देती है। लेकिन जिन…
और पढ़ें »

नटुआ… ‘सरकारी नाच’ पर मत करिहो सवाल

कलाकार जब सवाल पूछते हैं तो कईयों को तकलीफ़ हो जाती है। फोटो- गांव जवार संस्‍कृति समाज का निर्माण करती है और कलाएं संस्‍कृति व समाज का संरक्षण। इसे ताक…
और पढ़ें »

पगला नथुनिया… तेरा बऊआ आया गांव रे!

  बदलाव के बयार में कहीं टूट ना जाएं संवेदनाओं के तार। तब ये ट्रेन कहां थी गांव जाने के लिए। रामेश्वर घाट पर मिनी बसें छोड़ जातीं और फिर…
और पढ़ें »

ट्रिंग-ट्रिंग… चल पड़ी है बेटी मेरे गांव की

बिहार में साइकिल ने बदली बेटियों की ज़िंदगी। फोटो स्रोत बिहार में इन दिनों सड़कों पर आशाएं और उम्मीदें साइकिल पर सवार दिखती हैं। जिधर देखिए उधर टिन-टिन घंटी बजाते…
और पढ़ें »