Archives for गांव के रंग - Page 3

गांव के रंग

बादशाह खान के प्रति

- अरुण कमल फोटो सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार बुढ़ापे का मतलब है सुबह शाम खुली हवा में टहलना बूलना बुढ़ापे का मतलब ताजा सिंकी रोटियाँ शोरबे में डबो डबो…
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गांव के रंग

हाईब्रिड की माया और किसानों की मुश्किल

फाइल फोटो ब्रह्मानंद ठाकुर उतरइत उत्तरा नक्षत्र में मेघ बरस जाने से घोंचू भाई के मुरझाएल चेहरा पर जब तनिका हरियरी छाया तब घोंचू भाई आज दुपहरिया बाद नहीं खा कर…
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आलोक श्रीवास्तव की दो कविताएं

एक दिन आएगा एक दिन आएगा जब तुम जिस भी रास्ते से गुजरोगी वहीं सबसे पहले खिलेंगे फूल तुम जिन भी झरनों को छुओगी सबसे मीठा होगा उनका पानी जिन…
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गांव के रंग

शिक्षक नहीं, मल्टीपर्पस ड्राइवर

डॉ. सुधांशु कुमार जी हां ! हम शिक्षक नहीं, ड्राइवर हैं । मल्टीपर्पस, मल्टीटैलेंट । इसीलिए खिचड़ी से लेकर बत्तख गणना, पशुगणना, चुनाव कार्य, वोट गिनती, प्रातः काल में लोटाधारी…
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देश के गांधी अड्डों की सूरत बदलनी चाहिए

संदीप नाईक एक ही है सेवाग्राम देश में, एक है कस्तूरबाग्राम इंदौर में और फिर देशभर में फैले हैं - गांधी चबूतरे और गांधी आश्रम , पीठ, अध्ययनकेन्द्र और पुस्तकालय…
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गांव के रंग

हुजूर, हमारी कई ज़िंदगियों से बड़ा है उनका मान-सम्मान

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार मित्रो इन दिनों कुछ लोगों का सम्मान आम लोगों की ज़िंदगी से लाखों-करोड़ों गुना ज्यादा अहम हो गया है। शायद यही वजह है…
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‘मौलाना जोशी’ ने ‘मुल्क’ से कुछ मांगा है, दे पाओगे?

सच्चिदानंद जोशी कुछ दिन पहले बचपन का एक दोस्त मिला। मेरे रूप को देखते ही बोला "अरे यार तुम तो एकदम बदल गए "। उम्र के साथ शरीर और बाल…
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अंधविश्वास और बाज़ारवाद के मायाजाल से घिरी आस्था

ब्रह्मानंद ठाकुर धनरोपिया खतम हो जाने से घोंचू भाई अब पूरी तरह से फुर्सत में हैं। इधर दू- चार दिन से टिप-टाप और बीच-बीच में झमकउआ मेघ बरसते रहने से टोला के…
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‘देश में समान शिक्षा के लिए जन आंदोलन की जरूरत’

टीम बदलाव आजादी के 7 दशक बाद भी हम देश में समान शिक्षा और समान स्वास्थ्य जैसी मूलभूत जरूरतों को भी आम जन मानस तक नहीं पहुंचा सके । हम…
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एमरी अषाढ शुक्ल पक्ष का नवमी शनिवारे को पड़ा है!

ब्रह्मानंद ठाकुर तस्वीर- अजय कुमार कोसी बिहार हमारे घोंचू भाई उस पीढी से बिलांग करते हैं जिस पीढी के अधिकांश लोग खलास हो चुके हैं या बड़ी तेजी से इस…
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