Archives for गांव के रंग - Page 2

गांव के रंग

सांची कहे तोरे आवन से हमरे, अंगना में आई बहार भौजी

विकास मिश्रा 1982 में आई थी फिल्म 'नदिया के पार'। तब मेरी उम्र 12 साल की रही होगी। गाना सुपरहिट था- 'सांची कहे तोरे आवन से हमरे, अंगना में आई…
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दम तोड़ता बेनीपुरी के सपनों का भारत

ब्रह्मानंद ठाकुर/  कलम के जादुगर रामवृक्ष बेनीपुरी । यह नाम जेहन में आते ही एक ऐसे व्यक्ति का चित्र उभरता है, जिसका व्यक्तित्व बहुआयामी है। देशभक्त बेनीपुरी, पत्रकार बेनीपुरी, साहित्यकार…
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गांव के रंग

…तो आप अपने बच्‍चों के केंद्र में कभी नहीं रह पाएंगे।

दयाशंकर मिश्रा के फेसबुक वॉल से साभार/ मेरे पास परिवार के लिए समय नहीं बचता। सुबह, बच्‍चे जब स्‍कूल जाते हैं, मैं ऑफिस निकलने की जल्‍दी में होता हूं। जब…
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गांव की माटी की महक

श्वेता जया के फेसबुक वॉल से साभार क्या आपने गाँव को करीब से देखा है? खपरैल के घर, फूस की मड़ई, छान छप्पर, खूंटे पर बँधी गाय, भूसहूल, खेतों के…
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सामाजिक संतुलन के लिए कितना कारगर रहा भूमि सुधार कानून

शिरीष खरे आजादी के सात दशक बाद तक भूमि की संरचना पहले की तरह ही असमान है। आज भी साठ प्रतिशत से अधिक श्रम-शक्ति कृषि में लगी हुई है जिसमें…
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पशुपालन में छिपा है किसानों की खुशहाली का राज

पुष्यमित्र चार-पांच साल पहले झारखंड के एक गांव गया था । वह गांव सब्जी उत्पादन में अव्वल था । वहां के किसानों ने कहा कि वे पूरी तरह से जैविक…
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बिहार का स्लीपर सेल और छठ पर्व पर गरथैया

अनुशक्ति सिंह के फेसबुक वॉल से साभार कभी किसी को कहते सुना था, जहाँ न जाये रवि वहाँ जाये बिहारी. एक बार कश्मीर के किसी सुदूर गाँव में ठेले वाले…
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फाउंटेन पेन का लालच और चवन्नी की चोरी

ब्रह्मानंद ठाकुर तस्वीर- अजय कुमार कोसी बिहार     घोंचू भाई आज खूब प्रसन्न मुद्रा में थे। मनकचोटन भाई के दलान में तिनटंगा चउकी पर ज्योंही घोंचू भाई ने अपना आसन…
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महिलाओं की सेहत, सैनेटरी नैपकिन और जागरूकता के ‘ढाई आखर’

टीम बदलाव बिहार के औरंगाबाद में गरीब और जरूरत मंदों के लिए शिक्षा की अलख जगा रहे ढाई आखर फाउंडेशन ने एक और पहल की है । ढाई आखर की…
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ओम बाबू ! आपकी हर अदा के हम कायल हैं

पशुपति शर्मा नशे में है कौन नहीं और किसमें है नशा नहीं है नशा उन्हीं में जो कहते मुझमें नशा नहीं। नवोदय विद्यालय पूर्णिया का वो छरहरा साथी, जिसकी जुबान/लेखनी…
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