Archives for गांव के रंग - Page 2

गांव के रंग

कल संवारना है तो आज सुन लो अच्छे किस्से

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर मुजफ्फरपुर जिले के सुदूर गांव पियर में बदलाव बाल क्लब की कहानी कार्यशाला शुरू हो गई। हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार सह जाने माने युवा कवि डाक्टर संजय पंकज…
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गांव में तकनीक

‘अंगूठा छाप’ क्रांति से बदलेगी बैंकिंग की दुनिया

सत्येंद्र कुमार यादव गांव में पहले और आज भी अनपढ़ लोगों को अंगूठा छाप ही बोला जाता है। ऐसे लोग वोट देते वक्त, बैंक से पैसे निकालते वक्त, किसी दस्तावेज…
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‘झिझिया’ से इतनी झिझक क्यों भाई !

पुष्य मित्र अगर हमें अपनी संस्कृति और लोक परंपराओं को जीवित रखना है तो उसे सिर्फ दिल में सहेजने भर से काम नहीं चलेगा । उसे जुबां पर लाने की…
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गांव के रंग

भरत मिलाप, मेला और हमारा बचपन

फोटो- अजय कुमार मृदुला शुक्ला बचपन में दशहरे पर नए कपड़े मिलने का दुर्लभ अवसर आता था । हम सारे भाई बहन नए कपड़े पहन शाम को पापा के साथ…
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अब नवरात्र में जादू-टोना वाला डर नहीं

मूर्तिकार संजय कुमार । ब्रह्मानंद ठाकुर  बिहार के मुजफ्फरपुर जिले का हमारा गाँव पिअर विगत 60 सालों में काफी कुछ बदल गया है । फिलहाल मैं अपने गाँव में शारदीय…
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गांव की गलियां

सहरसा के आरण गांव में नाचे मन ‘मोर’

सभी फोटो- बिपिन कुमार सिंह पुष्य मित्र आपके घर के बाहर अगर मोर नज़र आ जाए तो बरबस ही मन नाच उठेगा और बचपन की धुंधली यादें ताजा हो जाएंगी…
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गांव के रंग

स्वच्छता के लिए 30 किलोमीटर लंबी मानव शृंखला

अविनाश उज्ज्वल नीयत साफ हो और इरादा मजबूत तो हर काम आसान लगने लगता है । कुछ ऐसे ही हौसले और जज्बे के साथ बिहार के सीतामढ़ी में गांव वालों…
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गांव के रंग

फटफटिया से बहनों तक पहुंचाई राखी

आशीष सागर दीक्षित बीते दिनों कान्हा नेशनल टाइगर में प्रवास के दौरान ग्राम खटिया में यह श्यामलाल साधुराम बिसेन मिले। रहवासी ग्राम सरेखा, तहसील जिला बालाघाट, मध्यप्रदेश से हैं। अपनी…
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देखो, नौटंकी कहीं तमाशा न बन जाए

पशुपति शर्मा दिल्ली के एनएसडी प्रांगण का अभिमंच सभागार शनिवार, 6 अगस्त की शाम हमारी लोक परंपराओं में से एक नौटंकी के रंगों से सराबोर नज़र आया। नगाड़े की धमक…
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शादियों में लीजिए गालियों का भी मजा

भारती द्विवेदी क्या आपने कभी गाली को एन्जॉय किया है? सुनकर अजीब लगा ना ! ऐसा सच में होता है गांव की शादियों में। मैं बिहार के मोतिहारी जिले में…
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