Archives for गांव के रंग - Page 2

गांव के रंग

गांव की माटी की महक

श्वेता जया के फेसबुक वॉल से साभार क्या आपने गाँव को करीब से देखा है? खपरैल के घर, फूस की मड़ई, छान छप्पर, खूंटे पर बँधी गाय, भूसहूल, खेतों के…
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गांव के रंग

सामाजिक संतुलन के लिए कितना कारगर रहा भूमि सुधार कानून

शिरीष खरे आजादी के सात दशक बाद तक भूमि की संरचना पहले की तरह ही असमान है। आज भी साठ प्रतिशत से अधिक श्रम-शक्ति कृषि में लगी हुई है जिसमें…
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गांव के रंग

पशुपालन में छिपा है किसानों की खुशहाली का राज

पुष्यमित्र चार-पांच साल पहले झारखंड के एक गांव गया था । वह गांव सब्जी उत्पादन में अव्वल था । वहां के किसानों ने कहा कि वे पूरी तरह से जैविक…
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गांव के रंग

बिहार का स्लीपर सेल और छठ पर्व पर गरथैया

अनुशक्ति सिंह के फेसबुक वॉल से साभार कभी किसी को कहते सुना था, जहाँ न जाये रवि वहाँ जाये बिहारी. एक बार कश्मीर के किसी सुदूर गाँव में ठेले वाले…
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गांव के रंग

फाउंटेन पेन का लालच और चवन्नी की चोरी

ब्रह्मानंद ठाकुर तस्वीर- अजय कुमार कोसी बिहार     घोंचू भाई आज खूब प्रसन्न मुद्रा में थे। मनकचोटन भाई के दलान में तिनटंगा चउकी पर ज्योंही घोंचू भाई ने अपना आसन…
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गांव के रंग

महिलाओं की सेहत, सैनेटरी नैपकिन और जागरूकता के ‘ढाई आखर’

टीम बदलाव बिहार के औरंगाबाद में गरीब और जरूरत मंदों के लिए शिक्षा की अलख जगा रहे ढाई आखर फाउंडेशन ने एक और पहल की है । ढाई आखर की…
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ओम बाबू ! आपकी हर अदा के हम कायल हैं

पशुपति शर्मा नशे में है कौन नहीं और किसमें है नशा नहीं है नशा उन्हीं में जो कहते मुझमें नशा नहीं। नवोदय विद्यालय पूर्णिया का वो छरहरा साथी, जिसकी जुबान/लेखनी…
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गांव के रंग

बादशाह खान के प्रति

- अरुण कमल फोटो सौजन्य- अजय कुमार कोसी बिहार बुढ़ापे का मतलब है सुबह शाम खुली हवा में टहलना बूलना बुढ़ापे का मतलब ताजा सिंकी रोटियाँ शोरबे में डबो डबो…
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हाईब्रिड की माया और किसानों की मुश्किल

फाइल फोटो ब्रह्मानंद ठाकुर उतरइत उत्तरा नक्षत्र में मेघ बरस जाने से घोंचू भाई के मुरझाएल चेहरा पर जब तनिका हरियरी छाया तब घोंचू भाई आज दुपहरिया बाद नहीं खा कर…
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आलोक श्रीवास्तव की दो कविताएं

एक दिन आएगा एक दिन आएगा जब तुम जिस भी रास्ते से गुजरोगी वहीं सबसे पहले खिलेंगे फूल तुम जिन भी झरनों को छुओगी सबसे मीठा होगा उनका पानी जिन…
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