Archives for गांव के रंग

गांव के रंग

पिता का ‘जज बेटा’ क्यों बन गया पत्रकार ?

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से साभार सुबह-सुबह आज 'बाबू' की याद आई ! मां-पिता के गये वर्षों गुजर गये पर हर दुख-सुख में, कोई काम करते, खेत-खलिहानों की…
और पढ़ें »
गांव के रंग

हरित क्रांति वाला पूर्वांचल क्या कोरोना काल में करेगा नई क्रांति ?

कोरोना काल को 'रिवर्स पलायन' के तौर पर भी याद किया जाएगा। शहर की चकाचौंध छोड़कर बड़ी संख्या में लोग गांव की ओर लौट रहे हैं। शहर की एक बड़ी…
और पढ़ें »
गांव के रंग

बस 72 घंटों में टूट गया कोरोना का लॉकडाउन… निकल पड़े अपने गांव

अरुण प्रकाश लॉकडाउन का तीसरा दिन। देश के अलग-अलग हिस्सों से गरीबों की मदद करते पुलिसवालों और आम लोगों की तस्वीरें सामने आ रही थीं। मन को सुकून मिल रहा…
और पढ़ें »
गांव के रंग

मुजफ्फरपुर में दो दिवसीय ग्राम समागम

टीम बदलाव, मुजफ्फरपुर गांधी चाहते थे कि इस देश के युवा एक निश्चित लक्ष्य लेकर गांवों में जायें और वहां कुछ सृजनात्मक काम करें. ताकि गांव और देश की स्थितियां…
और पढ़ें »
गांव के रंग

सरकार कारोबारी बन रही है, JNU की जंग के मायने समझें

पुष्यमित्र अभी जिस ट्रेन से देहरादून से लौट रहा था, वह ट्रेन हावड़ा तक जाती है। जाहिर सी बात है, ट्रेन में कई बंगाली यात्री भी थे। पेन्ट्री कार के…
और पढ़ें »
गांव के रंग

‘आप लोग जैसी हिंदी बोलते हैं उसमें बहुत दोष है’

आज से करीब 30-35 साल पहले की बात है । मैं एक स्कूल में बतौर शिक्षक कार्यरत था ।  घर से 12 किलोमीटर  की दूरी साइकिल से तय करने के बाद…
और पढ़ें »
गांव के रंग

रचना प्रक्रिया का ‘अधूरा साक्षात्कार’

पशुपति शर्मा बंसी कौल, रंग निर्देशक 23 जुलाई को ग्रेटर नोएडा में बंसी दा से एक और मुलाकात। कमरे में बिस्तर पर लेटी माताजी और बाहर सोफे पर बैठे बेचैन…
और पढ़ें »
गांव के रंग

हक लिए आपको लड़ना ही होगा

पुष्यमित्र पारिवारिक वजहों से लगभग आधा अगस्त महीना सहरसा आते-जाते गुजरा। इस दौरान मैने महसूस किया कि सड़क मार्ग से सहरसा से मधेपुरा जाने में ठीक-ठाक हिम्मती लोग भी घबरा…
और पढ़ें »
गांव के रंग

अपने ही गांव में आज हम अजनबी बन गए

धीरेंद्र पुंडीर अपने ही मकान में हम अजनबी या अजनबी मकान में हम कुछ भी कह पाना मुश्किल है। अकेले देवता किसकी सलामती की दुआ मांगे वो खामोश पत्थरों में…
और पढ़ें »
गांव के रंग

भारत की समकालीन राजनीति और अविश्वसनीयता का ताना-बाना !

वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश के फेसबुक वॉल से कभी-कभी भारतीय राजनीति और उस पर अपने नियमित लेखन से मन उचटने लगता है! वैसे ही जैसे ज्यादातर न्यूज चैनलों और क्रिकेट से…
और पढ़ें »