Archives for गांव के नायक - Page 3

सहारा नहीं, खुद के भरोसे चलते हैं बांदा के देवराज

बांदा के किसान का सहारा बनी लाठी आशीष सागर कहते हैं लाठी बुढ़ापे का सहारा होती है लेकिन अगर जवानी के शुरुआती पलों में थामनी पड़े तो जरा सोचिए पूरा…
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होने और न होने का अफसोस

28 अगस्त 2010। विनय के अलविदा कहने के चंद दिनों बाद पूर्णिया में हुए आयोजन की तस्वीर। साथी विनय तरुण के नाम पर एक और आयोजन रायपुर में हो रहा…
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कमाल है तेरा कुआं, सलाम है कस्तूरी

एक महीने में कुआं खोदने वाली कस्तूरी के हौसले को सलाम आशीष सागर दीक्षित कस्तूरी कुंडलि बसे, मृग ढुंढे वन माहि।  ऐसे घट-घट राम हैं, दुनिया देखे नाहि।  वैसे तो…
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एक यारबाज अफ़सर की वीरगति को सलाम

विकास मिश्रा साभार-विकास मिश्रा के फेसबुक वॉल से मुकुल द्विवेदी का यूं जाना खल गया। मेरठ में मैं जब दैनिक जागरण का सिटी इंचार्ज था तब मुकुल द्विवेदी वहां सीओ…
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महीनों का काम घंटों में… कमाल है डीएम साहब!

अरुण यादव अगर आपके जिले के आलाधिकारी आपकी समस्या का निपटारा घर बैठे कर दें, तो कैसा लगेगा ? जरा सोचिए आप अपने घर पर हों और अधिकारी आपको फोन…
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तनाव से मुक्ति के लिए एक पत्रकार बन गया योगगुरु

आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी में हर कोई व्यस्त है । किसी के पास वक्त नहीं । खासकर युवाओं के पास तो बिल्कुल नहीं । ना अपने लिए और ना ही…
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आओ कि कोई ख्वाब बुनें कल के वास्ते…

चंदन शर्मा जहां टॉयलेट में जंजीर से मग और बैंक में रस्सी से पेन बांध कर रखने की नौबत हो, उस देश में करप्शन क्या खाक खत्म होगा? यहां ईमानदार…
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बुंदेलखंड के लिए एक उम्मीद है दशरथ का कुआं

आशीष सागर -हमारे देश में सूखा सियासत नहीं करता बल्कि सूखे पर सियासत जरूर होती है । शायद यही वजह है कि सूखे से जूझ रहे बुंदेलखंड तक मोदी सरकार…
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सीमांचल में ‘वर्चुअल दुनिया’ से रियल फाइट

पुष्यमित्र सोशल मीडिया ने आज पूरी दुनिया को एक सूत्र में बांध दिया है, किसी को पुराने दोस्त की तलाश करनी हो तो फेसबुक, किसी को अपने मन की बात…
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मैनपुरी का ‘मास्टर्स इन फ्लावर’

दिल्ली के कृषि मेले में फूलों के बीच युवा किसान रवि पाल अरुण यादव बदलाव की बयार कब और कहां से निकलेगी ये कोई नहीं जानता । क्या आप सोच…
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