Archives for आईना - Page 17

पढ़ाई के लिए ऐसी लड़ाई! जय बीना, जय हिंद!

रूपेश कुमार बीना अपनी दुधमुंही बच्ची के साथ। फोटो-रुपेश कुमार बीना को इसलिए उसके ससुरालवालों ने घर से निकाल दिया कि वह पढ़ना चाहती थी, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।…
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कुछ सपनों के मर जाने से, जीवन नहीं मरा करता है…

रिषीकांत सिंह प्रत्युषा बनर्जी की आखिरी विदाई। चार दिन पहले की बात है। रात में सोने की तैयारी कर रहा था। अचानक ऊपर वाले फ्लैट में चीख-पुकार मची। दौड़ कर…
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सिलिकन वैली से कुछ यूं देखा उसने अपने हिंदुस्तान को…

रिद्धी भेदा अपनी मां के साथ रिद्धी भेदा। अमेरिका और हिंदुस्तान दो देशों की संस्कृतियों का समागम। मैं मिड्ल स्कूल की छात्रा हूं और इन दिनों सांटा क्लारा में रहती…
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मुस्कान… आशाओं वाली… उम्मीदों वाली

हेमन्त वशिष्ठ ये तस्वीर आपसे कुछ कहना चाहती है... ये बेफिक्री... कुछ कहना चाहती हैं... कुछ कहना चाहते हैं ये चेहरे... ये चेहरे... अनजाने से... कुछ साफ कुछ धुंधले ...…
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किताबी कायदों में ज़िंदा जज़्बातों की क़ब्र न बने साहब!

बांदा: लड़ने का जज़्बा हो तो ऐसा सत्येंद्र कुमार यादव आप समाजेसवी हैं, सच्चे दिल से समाज की सेवा में लगे हैं, सामाजिक सरोकारों को लेकर किसी से लड़ने-भिड़ने के…
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आओ हंसें, खिलखिलाएं, बातें करें और दिल को ‘हलका’ कर लें

विकास मिश्रा अपनी मां के साथ विकास मिश्रा मुझे मेरी मां से बहुत कुछ मिला, लेकिन एक ऐसी चीज भी मिल गई, जिसे मैं कभी नहीं चाहता था। वो था…
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सब ठाठ धरा रह जायेगा…

तू आया है, तो जायेगा हम रोटी–भात खायेगा। तू लोहा–सोना खोदेगा हम खेत में नागर जोतेगा। तू हीरा-पन्ना बेचेगा हम गाछ पे पानी सींचेगा। तू सेल्फी फोटू खींचेगा हम फटा-चिथन्ना…
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काश! कोई सुन ले दिव्यांश की चीखें

धीरेंद्र पुंडीर दिल्ली के एक निजी स्कूल में दिव्यांश की मौत। ये दिव्यांश की तस्वीर है। एक परिवार को छोड़ दें तो बाकि सब के लिए एक तस्वीर। कुछ देर में…
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बांदा के गांव में जिंदा है ‘ठाकुर का कुआं’

आशीष सागर दीक्षित ''आइए महसूस करिए ज़िन्दगी के ताप को मैं चमारों की गली तक ले चलूँगा आपको  जिस गली में भुखमरी की यातना से ऊब कर मर गई फुलिया…
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महामना! इन्हें माफ़ कर देना…

महामना एक्सप्रेस की दुर्दशा- मुसाफ़िरों की मेहरबानी भूपेंद्र सिंह कोई भी देश अपने शासक से महान नहीं बनता है, वह महान बनता है अपने लोगों से, अपने समाज से। यदि…
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