वंचित तबके को साक्षर बनाने का सपना कौन ‘चर’ गया?

बदलाव प्रतिनिधि, मुजफ्फरपुर  बिहार में जब पहला चरवाहा विद्यालय खुला  तब राज्य के  प्रबुद्ध लोग इसका मखौल उड़ाने लगे थे।

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करोगे याद तो हर बात याद आएगी

कहां तक मन को ये अंधेरे छलेंगे, उदासी भरे दिन कभी तो ढलेंगे। 29 मई की रात हरेंद्र भाई ने

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‘ठेले’ से ‘ठेके’ तक उनके ‘ठेंगे’ पर है कोरोना!

पशुपति शर्मा के फेसबुक वॉल से साभार कोरोना काल- एक वो मौत हथेलियों परलेकर निकले हैंअपनों को मौत बांटने नहींअपनों

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‘भौतिक प्रगति समाज को हिंसक बनाती है’

सचिन कुमार जैन की फेसबुक वॉल से साभार महावीर और राजनीति के महावीर में कोई जोड़ नहीं है। हम जितनी

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गोवा और कार्टूनिस्ट मारियो मिरांडा का ‘अमर प्रेम’

शरद अवस्थी मौज-मस्ती..बेफिक्री…सुकून और नाईट लाइफ को जीने की जगह है गोआ…जहां रात को 12 बजे भी सड़कों से गुजरने

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शहीद सैनिकों का ‘दफ़न-विद्रोह’ और मंच पर ‘ज़िंदा’ सवाल

मोहन जोशी मशहूर लेखक व दार्शनिक ‘ज्यां पॉल सात्रे’ ने कहा था ‘ यदि आप जीत का वृतांत सुन लें , तो

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अशिक्षा और असमानता से ‘आजादी’ हमारा हक- सुभाष चंद्र बोस

ब्रह्मानंद ठाकुर जेएनयू की हालिया घटनाओं  से शिक्षा जगत में उबाल है।  छात्रों के आंदोलन को लेकर पक्ष-विपक्ष में विभिन्न

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अपनी पहचान खोता विदिशा का बासौदा नगर

पुरु शर्मा क्या वास्तव में हमारा शहर ऐसा ही था ? जैसी आज उसकी छवि पूरे प्रदेश में बन चुकी

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