Archives for अतिथि संपादक

अतिथि संपादक

जीवन के संघर्षों से जिसने सीखा समाजवाद का पाठ

ब्रह्मानंद ठाकुर आम, कटहल,नींबू और अमरुद की घनी छांव तले एक छोटा सा घर । जिसका नाम है चमेला कुटीर । प्रकृत की गोंद में बना चमेला कुटीर किसी ऋषि…
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अतिथि संपादक

मजहब नहीं सिखाता, ‘गांधीवाद’ से बैर रखना!

ब्रह्मानंद ठाकुर बिहार के मुजफ्फरपुर का मझौलिया गांव कभी हथकरघा उद्योग के लिए जाना जाता था। आज यहां काफी कुछ बदल गया है। एक-दो परिवार हैं जो हथकरघा को जिंदा रखे…
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अतिथि संपादक

चंपारण के 100 साल, आज तो कर लो गांधी को याद

ब्रह्मानंद ठाकुर मौसम भी है और मौका भी।  इसमें जो चूक गया, वह पछताएगा। भले ही गांधी की हत्या किसी एक ने की थी लेकिन पिछले 70 सालों से उनके…
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अतिथि संपादक

आओ गांधी-गांधी खेलें !

ब्रह्मानंद ठाकुर देश महात्मा गांधी के चम्पारण सत्याग्रह शताब्दी वर्ष मना रहा है तो जाहिर है कि मुजफ्फरपुर इस आयोजन में बढ़चढ़ का हिस्सा लेगा । मुजफ्फरपुर में 10 अप्रैल…
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अतिथि संपादक

मजहब नहीं नाजायज रिवाज से जंग लड़ रही हैं मुस्लिम महिलाएं

ब्रह्मानंद ठाकुर औरत ने जन्म दिया मर्दों को , मर्दों ने उसे बाजार दिया। जब जी चाहा मसला-कुचला, जब जी चाहा दुत्कार दिया।" 1958 में बनी फिल्म 'साधना ' का…
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अतिथि संपादक

जानिए मशरूम की खेती का आसान तरीका

ब्रह्मानंद ठाकुर हमारे देश का अन्नदाता बदहाल है, लेकिन सरकारें खुशहाल । कोई किसानों की कर्जमाफी का वादा करता है तो कोई बिजली का बिल माफ करने का भरोसा देता…
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अतिथि संपादक

कनुप्रिया ने याद दिला दिए रामलीला वाले दिन

ब्रह्मानंद ठाकुर बात उन दिनो की है जब देश को आजाद हुए दस -बारह साल ही हुए थे। गांव सच्चे अर्थों में गांव था। आडम्बर, तड़क-भड़क और दिखावे से काफी…
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अतिथि संपादक

बदलाव के पहले अतिथि संपादक ब्रह्मानंद ठाकुर

ब्रह्मानंद ठाकुर का जन्म बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जनवरी 1952 में निम्न मध्यम वर्ग परिवार में हुआ । पढ़ने के साथ पत्र-पत्रिकाओं में लिखने का शौक बचपन से रहा है…
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