आशीष सागर

उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है । प्रधानमंत्री मोदी हों या फिर सीएम योगी । अखिलेश यादव हों या फिर राहुल गांधी या बीएसपी सुप्रीमो मायावती । हर कोई बुंदेलखंड की दुर्दशा से वाकिफ है । लेकिन इन नेताओं को बुंदेलखंड की याद सिर्फ चुनाव के दौरान ही आती है । पिछले तीन साल में मोदी सरकार ने ना तो बुंदेलखंड की दशा सुधारने के लिए कोई ठोस कदम उठाये और ना ही अभी तक सीएम योगी ने कोई ठोस पहल की । ये अलग बात है कि बाते खूब हुईं लेकिन जमीन पर कुछ होता दिखा नहीं । पहले की तरह आज भी किसान मर रहा है । हर दिन कोई ना कोई किसान खुदकुशी कर रहा है । बाँदा के शहर कोतवाली क्षेत्र के अरबई गाँव निवासी बुजुर्ग छन्नीलाल पुत्र मनीराम ने पिछले हफ्ते देर रात अपने खेत में आत्महत्या कर ली। लघु किसान छन्नीलाल के पास कुल चार बीघा जमीन है । किसान क्रेडिट कार्ड से उसने तीस हजार रूपये और रिश्तेदार से एक लाख का कर्जा लिया था। बेटी की शादी को लिया गया कर्जा वो चुकता नहीं कर सका।

इधर पांच बेरोजगार बेटे जो दिल्ली में मजदूरी करते हैं। परिवार का खर्चा वे ही चलाते हैं। मृतक के बेटे ( पिता का दाग लिए ) अवधेश ने कहा कि गाँव में अब तक बने पिछले सामंती प्रधानों ने कभी इस घर की तरफ देखा तक नही। अब बिरादरी का ( खंगार जाति ) बना है तो देखो पीएम आवास योजना का लाभ मिल जाये । ( ऐसा उसका अपना जातीय दावा है ) जब मौके पर पहुंचा तो किसान के वे बेटे जो शनिवार को पिता की अर्थी उठाकर आये थे बारिश में गिरे अपने घर को छा रहे थे । अगर नहीं छाएंगे तो पिता के निधन पर शोक जताने आने वाले क्या कहेंगे । छन्नीलाल की बूढी पत्नी से कुछ कहते नही बना । उम्र ने कान में सुन पाने की ताकत भी छीन ली है । रुपया होता तो मशीन लगवा लेते ।शोकाकुल परिवार से जब पूछा कि गाँव के प्रधानों ने कभी मदद क्यों नहीं की तो उसका जवाब था बाबूजी गाँव में अबहूँ ठकुरैसी चलत है। शहर निहाय ।

फ़िलहाल अच्छी बात ये है पांच भाई एक साथ रहते हैं उनमे बंटवारा नहीं है। पांच बेटों अवधेश, संतोष, गुलाब, कमलेश, लवलेश का संयुक्त परिवार एक साथ इसी तंग झोपड़े में गुजर-बसर करता है। कृषि जमीन पिता के नाम ही थी। छन्नीलाल के आत्महत्या के दो दिन पहले ही रघुवंशी डेरा के किसान अतीस ( बड़ा किसान ) चार भाई के बीच आठ लाख के कर्जे से फांसी लगा ली थी। 24 घंटे में दो किसान मरे है अब सरकार कहती है कर्जमाफी कर तो रहे हैं।

उत्तर प्रदेश सरकार ने किसानों के 1 लाख तक के कर्ज माफ़ी की घोषणा ज़रूर कर दी है लेकिन अभी वो हकीकत के धरातल पर नही उतरी है। इसके साथ ही साथ सच ये भी है की पिछले कई वर्षो से चले आ रहे सूखे के कारण किसानो को सिर्फ 1 लाख के क़र्ज़ की राहत देना नाकाफ़ी है। यदि बुन्देलखण्ड के किसानों को इस मौत के मुहाने से बाहर निकलना है तो सरकार को बकायदे वहां के किसानों की स्थिति का विस्तृत अध्ययन कर उन्हें सुनियोजित तरीके से कर्जमुक्ति के लिये प्लानिंग कर बड़े राहत पैकेज को खर्च करने की तैयारी करनी होगी । यदि ऐसा नही हुआ तो ये मौत का अंतहीन सिलसिला ऐसे ही जारी रहेगा ।


ashish profile-2बाँदा से आरटीआई एक्टिविस्ट आशीष सागर की रिपोर्ट फेसबुक पर एकला चलो रेके नारे के साथ आशीष अपने तरह की यायावरी रिपोर्टिंग कर रहे हैं। चित्रकूट ग्रामोदय यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। आप आशीष से ashishdixit01@gmail.com पर संवाद कर सकते हैं।

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