ब्रह्मानंद ठाकुर

हमारे देश में किसानों की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है, फिर भी सरकारी योजनाओं और बजट में किसानों की हमेशा से अनदेखी होती रही है । किसानों के नाम पर जो कुछ योजनाएं बनती है उसका लाभ अन्नदाता की बजया बिचौलिये या फिर कारोबारी किसी ना किसी रूप में लेते हैं, लेकिन किसान खाली हाथ रह जाता है । लिहाजा किसानों की क्षेत्रवार समस्याएं समझने के लिए देश के किसान अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति की अगुवाई में एक मंच पर आए और 19  राज्यों में करीब 10 हजार किलोमीटर की  किसान मुक्ति यात्रा पूरी कर पिछले साल 20 नवम्बर को देशभर के किसान दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित किसान संसद का हिस्सा बने। जिसका मकसद किसानों के हितों के लिए एक विस्तृत और दूरगामी प्रस्ताव पास कर किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक ड्रॉफ्ट तैयार किया । ऑल इण्डिया किसान खेत मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक सत्यवान जी ने टीम बदलाव से किसान संसद में पास बिल के बारे में विस्तार से चर्चा की और कहा कि “अगर  सरकार इस बिल पर अमल करे तो अन्नदाता खुशहाली के रास्ते पर बढ़ सकता है ।” देश का आम बजट पेश होने वाला है लिहाजा जरूरी है कि एक बार फिर उन बातों को बदलाव के पाठकों के सामने रखा जाए जो किसान संसद में तय किया गया ।

किसानों की अपनी संसद में दो विधेयक पास किए गए जिसमें  पहला किसानों को कर्ज से मुक्ति का  विधेयक  और दूसरा किसानों को कृषि उपज लाभकारी मूल्य गारंटी बिल शामिल हैं। जिसपर सरकार अगर थोड़ा भी ध्यान दे तो किसानों की किस्मत बदल सकती है ।

चलिए अब आपको बताते हैं कि कर्ज माफी संबंधी किसान संसद के बिल में क्या प्रावधान किए गए हैं- पहला तो ये है कि किसानों के सभी तरह के कर्ज चाहे वे बैंक से लिए गये हों या सहकारी समितियों या निजी स्रोतों से उन्हें माफ करने का प्रस्ताव है। इसके साथ ही आने वाले दिनों में आपदाओं या   अन्य कारणों से  हुए घाटे की भरपाई करने का भी बिल में प्रावधान किया गया है।  कृषि में  खेती, बागवानी औषधीय फसलों की उपज, अन्तर्वर्ती फसलें, फल , सब्जियां, दुग्ध उत्पादन, नर्सरी,पशुधन, मत्स्य पालन के अतिरिक्त लघु जंगल उत्पाद का संग्रहण, समेत अन्य कृषि कार्य शामिल हैं।

 विधेयक किसान की श्रेणी में कौन आएगा उसको भी परिभाषित किया गया है मसलन किसान  ऐसे व्यक्ति को माना जाएगा जिसकी आजीविका या धनोपार्जन का मुख्य स्रोत खेती हो । जो जमीन की मिल्कियत के साथ या उसके बिना भी अन्य प्राथमिक कृषिगत जिंसों को पैदा करता हो, इसमें शामिल हो सकते हैं। सभी कृषि कार्य में संलग्न धारक, खेतिहर, खेत मजदूर, बटाईदार, पट्टेदार,  मुर्गी और मवेशी पालन करने वाले, मधुमक्खी पालने वाले, गैर कारपोरेट वृक्षारोपक , बागान के मजदूर, जंगल के संग्राहक, स्वयंसहायता समूह जो सामूहिक तौर पर मिल्कियत वाली जमीन या पट्टे पर जमीन लेकर खेती करते हैं।

 किसान संसद में कर्ज के सूद की दर पर भी प्रस्ताव आया है। इसमें सूद की दर के बारे में स्पष्ट कहा गया है कि इसके दर का निर्धारण आयोग करेगा। यह भी कहा गया है कि आयोग से तात्पर्य होगा किसान कर्ज राहत आयोग जो विधेयक के धारा 4 के अंतर्गत गठित है। आपदा प्रभावित इलाके की घोषणा सरकार अपनी या नौकरशाहों की मर्जी से नहीं बल्कि नवगठित किसान आयोग की सलाह पर करेगी जिसमें प्राकृतिक आपदाएं, कीमतों का गिरना और नकली लागत आपूर्ति या अन्य कारणों से फसल को नुकसान हुआ हो।  आपदा प्रभावित फसल की परिभाषा देते हुए विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि राज्य की ऐसी कोई भी फसल या फसलें जिसे आयोग की सिफारिश के तहत   प्राकृतिक आपदा , दाम के गिरने या नकली लागत देने या अन्य कारणों से फसल न होने के कारण सरकार ने घोषित किया हो।

 इसीतरह आपदा प्रभावित किसान की परिभाषा विधेयक में यह दी गई है  कि ऐसा किसान और खेत मजदूर आपदा प्रभावित किसान माना जाएगा जिसे आयोग ने प्रभावित घोषित किया हो।  विधेयक की धारा 3 (1) में प्रावधान किया गया है कि प्रत्येक किसान 20 नवम्बर 2017 तक बैंक से लिए गये बकाया फसली ऋण का पूरी राशि का तत्काल और बिना शर्त छूट का हकदार होगा।

क्योंकि मैं किसान हूँ
फ़ाइल फोटो

ऐसे किसान जिन्होंने पूर्ववर्ती वित्तीय वर्ष में उपधारा 1 के तहत तय समयावधि में बैंक कर्जे का भुगतान कर दिया है, उनके बैंक खाते में खेतों में पैदा फसल के अनुपात में राशि जमा होगी।

सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि सभी लाभार्थी किसानों को अगली फसल के लिए नये कर्ज दिए जाएं।

सहकारी बैंकों की कर्ज माफी  लागू करने के लिए केन्द्र सरकाल पर्याप्त धन राज्यों को उपलब्ध कराएगी।

ऐसे किसान जिन्होंने खेती के लिए गैर सांस्थानिक कर्ज लिया है, वह सरकार द्वारा सुनिश्चित प्रक्रिया के तहत कर्ज की अदला-बदली कर उसे बैंक कर्ज में परिणत कर दिए जाएंगे।

विधेयक में एक प्रावधान यह  भी है कि सरकार ऐसे सभी कदम उठाएगी ताकि कर्ज की अदला-बदली से उत्पन्न बैंक ऋण का भुगतान वह करे।

विधेयक के अध्याय 3 में किसान ऋण राहत आयोग के गठन का प्रावधान है। इसके अतिरिक्त भी किसान संसद द्वारा तैयार इस विधेयक में किसानों की माली हालत सुधारे जाने, कृषि को लाभकारी बनाने एवं ऋण के जाल से किसानों को स्थाई रूप से छुटकारा दिलाने सम्बंधी  कई महत्वपूर्ण प्रावधान इस विधेयक में शामिल किए गये हैं।

हालांकि इस विधेयक पर अमल करना या न करना सरकार का अधिकार है लेकिन किसान संगठन अपनी बात सरकार तक पहुंचाने की हर मुमकिन कोशिश कर रहा है । किसान संसद के फैसलों की अगली कड़ी में बात किसान संसद में पास दूसरे विधेयक पर बात होगी ।


ब्रह्मानंद ठाकुर। BADALAV.COM के अप्रैल 2017 के अतिथि संपादक। बिहार के मुज़फ़्फ़रपुर के निवासी। पेशे से शिक्षक। मई 2012 के बाद से नौकरी की बंदिशें खत्म। फिलहाल समाज, संस्कृति और साहित्य की सेवा में जुटे हैं। गांव में बदलाव को लेकर गहरी दिलचस्पी रखते हैं और युवा पीढ़ी के साथ निरंतर संवाद की जरूरत को महसूस करते हैं, उसकी संभावनाएं तलाशते हैं।

संबंधित समाचार