फाइल फोटो
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अरुण यादव

बिहार सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू करने का फ़ैसला किया है । नीतीश सरकार के इस फैसले को काफी सराहनीय कदम माना जा रहा है, क्योंकि बिहार में प्राकृतिक आपदाओं की वजह से हर साल किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है जिस वजह से किसान धीरे-धीरे खेती से दूर होता चला जा रहा है । आपको बता दें कि अभी हाल में ही केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए फसल बीमा योजना लागू करने की अपील की थी । हालांकि शुरुआत में नीतीश कुमार ने फसल बीमा का नाम सिर्फ प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना रखे जाने पर ऐतराज जताया था । नीतीश की दलील थी कि इस योजना में राज्य को भी काफी धन खर्च करना पड़ता है इसलिए इसका नाम केंद्र-राज्य फसल बीमा किया जाना चाहिए । तमाम अंतर्विरोधों के बावजूद किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए नीतीश सरकार ने इसे खरीफ की फसल से लागू करने का फैसला किया । हालांकि फसल बीमा की आखिरी तारीफ 15 अगस्त हैं लिहाजा राज्य सरकार ने कहा है कि अगर जरूरी हुआ तो सरकार उसकी समय सीमा बढ़ाने पर विचार कर सरकती है ।

बिहार में 15 साल से फसल बीमा क्षतिपूर्ति दावों का औसत करीब 20 फीसदी रहा है। प्रीमियम दर पिछले दस साल में हुए नुकसान के आकलन के आंकड़ों पर निर्भर है। यूपी में कम जोखिम होने के कारण बीमा कंपनियों ने औसत न्यूनतम प्रीमियम दर 2.46 से 6.91 फीसदी तक तय किया है। वहीं झारखंड में जोखिम यूपी से ज्यादा होने की वजह से यहां औसत न्यूनतम प्रीमियम दर 10.34 से 17.03 फीसदी है। गुजरात में 9.40 से 14.10, महाराष्ट्र में 12.58 से 29.37 प्रतिशत है। प्रीमियम का ज्यादा अंश सरकार को ही बहन करना पड़ता है। केंद्र सरकार ने ये भी स्पष्ट कर दिया है कि बीमा कंपनियों के चयन की निविदा राज्य सरकार ही देती है। केंद्र का इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं है।

पहली बार ऐसा हो रहा है। बुवाई न होने पर भी किसानों को मुआवजा मिलेगा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बारिश या किसी आपदा की वजह से फसलों की बुवाई न होने पर या कटाई के बाद फसलों के नुकसान पर भी मुआवजा मिलेगा। इसकी जानकारी संसद में कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने दी। बहुत कम प्रीमियम पर फसलों का बीमा कराना होगा। अब तक आपदा की वजह से बुवाई न होने पर बीमा या मुआवजे का प्रावधान नहीं था लेकिन नई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों के ये सभी फायदे मिलेंगे।

यही नहीं पिछले दिनों कृषि मंत्री ने संसद को बताया कि मौसम आधारित फसल बीमा योजना में फसलों सहित मशीनों, जीवन, दुर्घटना, घर और छात्र सुरक्षा संबंधित अन्य परिसंपत्तियों को कवर किया जाएगा। किसानों को खरीफ फसल की लागत का अधिकतम 2 फीसदी बीमा प्रीमियम के रूप में देना होगा जबकि रबी की फसल के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम देना होगा। नकदी फसलों और बागवानी जैसी फसलों लिए 5 फीसदी बीमा प्रीमियम निर्धारिहत की गई है।


 अरुण यादव। उत्तरप्रदेश के जौनपुर के निवासी। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र। इन दिनों इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में सक्रिय